
सुभाष राज/जयपुर/नई दिल्ली। अप्रेल में राजस्थान के संसदीय इतिहास में पहला मौका होगा, जब प्रदेश पर लम्बे समय तक राज करने वाली कांग्रेस का इस राज्य से संसद के उच्च सदन में कोई भी सदस्य नहीं होगा।
अभी राजस्थान से कांग्रेस के दो सदस्य नरेन्द्र बुड़ानिया और अभिषेक मनु सिंघवी हैं, लेकिन दोनों का ही कार्यकाल अप्रेल में समाप्त हो रहा है। अप्रेल में ही भाजपा के भूपेन्द्र यादव भी रिटायर हो रहे हैं।
राज्यसभा की राजस्थान से खाली हो रही तीनों सीटों पर संख्याबल के चलते भाजपा के उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है, क्योंकि कांग्रेस के पास विधानसभा में सिर्फ 25 विधायकों का संख्याबल है।
अगर निर्दलीय राजकुमार शर्मा को जोड़ दिया जाए तो भी पार्टी के पास आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से राज्यसभा का एक सदस्य चुने जाने लायक विधायक नहीं हैं।
तीसरा मोर्चा में ज्यादातर भाजपा के साथ
राजस्थान के मामले देख रहे कांग्रेस के एक सचिव के अनुसार वैसे तो विधानसभा में बसपा के दो, नेशनल पीपुल्स पार्टी के चार, जमींदारा पार्टी के दो और सात निर्दलीय सदस्य भी हैं, लेकिन इनमें से जमींदारा पार्टी, नेशनल पीपुल्स पार्टी के सदस्य पार्टी के तौर पर भाजपा के साथ माने जाते हैं। हालांकि प्रदेश नेतृत्व से तनातनी के चलते नेशनल पीपुल्स पार्टी की भाजपा से पटरी नहीं बैठती, लेकिन पार्टी के एकछत्र नेता किरोड़ीलाल मीणा के भाजपा केन्द्रीय नेतृत्व से बेहतरीन रिश्ते हैं। इसलिए उनके वोट अंततोगत्वा भाजपा की झोली में ही जाकर गिर सकते हैं।
क्रॉस वोटिंग का दांव चलने की संभावना
एआईसीसी सूत्रों के अनुसार पार्टी इस सम्भावना पर जरूर विचार कर रही है कि भाजपा के प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ बने माहौल को देखते हुए क्या क्रॉस वोटिंग का दांव लगाया जा सकता है। ऊपरी तौर पर यह असम्भव लगता है, लेकिन कांग्रेस इस सम्भावना को ध्यान में रखते हुए किसी प्रभावशाली (धनबल युक्त) को निर्दलीय के तौर पर समर्थन देने का दांव भी लगा सकती है? पार्टी का मानना है कि कांग्रेस के 25 विधायकों के साथ ही निर्दलियों, किरोड़ीलाल मीणा की पार्टी और बसपा के दो वोटों को मिलाकर कुल 38 विधायकों की संख्या के साथ अगर भाजपा से क्रॉस वोटिंग हो जाए तो लोकसभा उपचुनावों के घाव सहला रही भाजपा को राज्यसभा में भी करारा झटका दिया जा सकता है।