राजस्थान में सरकारी कामकाज के ढर्रे को बदलने और आम जनता की सुनवाई को प्राथमिकता देने के संकल्प का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की 'जीरो टॉलरेंस' और 'त्वरित समाधान' की नीति ने 'राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन' को प्रदेश के आम नागरिक का सबसे बड़ा सहारा बना दिया है।
राजस्थान में सरकारी विभागों से जुड़ी शिकायतों के निपटारे में एक बड़ा क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश की राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन (181) ने सफलता के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। मार्च 2026 में नागरिक संतुष्टि का स्तर 80 प्रतिशत के पार पहुँच गया है, जो राजस्थान के प्रशासनिक इतिहास में अब तक का सबसे उच्चतम स्तर (All-Time High) है। पिछले महीने यह आंकड़ा लगभग 69.54 प्रतिशत था, जिसमें महज 30 दिनों में जबरदस्त उछाल आया है।
इस ऐतिहासिक सुधार के पीछे मुख्यमंत्री का वह कड़ा निर्देश है, जिसके तहत अब केवल बाबू या ऑपरेटर ही नहीं, बल्कि एसीएस (ACS) से लेकर शासन सचिव स्तर के वरिष्ठ अधिकारी खुद 181 के कॉल सेंटर पर बैठ रहे हैं।
राजस्थान संपर्क पोर्टल की कार्यक्षमता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 24 फरवरी 2026 को एक ही दिन में रिकॉर्ड 25,254 प्रकरणों का निस्तारण किया गया।
मुख्य सचिव के अनुसार, 'राजस्थान संपर्क' अब केवल एक हेल्पलाइन नहीं बल्कि 'नेक्स्ट जेन जन संपर्क' बन चुका है। तकनीक के माध्यम से सरकार और जनता के बीच की दूरी को न्यूनतम कर दिया गया है।
प्रदेश का कोई भी नागरिक बिजली, पानी, सड़क, राशन या किसी भी अन्य सरकारी विभाग से जुड़ी समस्या के लिए टोल-फ्री नंबर 181 पर कॉल कर सकता है। इसके अलावा 'राजस्थान संपर्क ऐप' और पोर्टल के जरिए भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। 80% संतुष्टि स्तर यह साबित करता है कि अब शिकायतों को केवल 'डिस्पोज' नहीं किया जा रहा, बल्कि गुणवत्तापूर्ण समाधान (Quality Redressal) सुनिश्चित किया जा रहा है।
मुख्य सचिव के निर्देशों के अनुसार, यह विशेष निगरानी अभियान 28 अप्रैल तक जारी रहेगा। इस दौरान हर विभाग की जवाबदेही तय की जाएगी। जो अधिकारी या कर्मचारी शिकायतों के निस्तारण में कोताही बरतेंगे, उन पर सख्त कार्रवाई की गाज भी गिर सकती है।