जयपुर

एसआई भर्ती-2021: हाईकोर्ट ने 4 आरोपियों को दी जमानत, ‘पेपर खरीदने और बेचने का आरोप, लेकिन पुख्ता साक्ष्य नहीं’

राजस्थान हाईकोर्ट ने एसआई भर्ती-2021 पेपरलीक के चार आरोपियों को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा, प्रकरण की तथ्यात्मक स्थिति, आरोपियों की ओर से जेल में बिताई अवधि और केस की सुनवाई में लगने वाले समय को देखते हुए उन्हें जमानत पर रिहा करना उचित है।

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Jan 13, 2026
Rajasthan SI Recruitment 2021 (Patrika File Photo)

जयपुर: राजस्थान में चर्चित एसआई भर्ती-2021 पेपरलीक मामले में हाईकोर्ट ने चार आरोपियों को बड़ी राहत देते हुए जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। न्यायमूर्ति विनोद कुमार भारवानी ने कैलाश कुमार, मंगलाराम, परमेश चौधरी और विनोद कुमार जाट की जमानत याचिकाओं को स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रकरण की तथ्यात्मक स्थिति, आरोपियों द्वारा अब तक जेल में बिताई गई अवधि और मुकदमे की सुनवाई में लगने वाले संभावित लंबे समय को देखते हुए उन्हें जमानत पर रिहा किया जाना न्यायोचित है। कोर्ट ने यह भी माना कि जांच एजेंसी द्वारा अनुसंधान पूरा कर आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया जा चुका है। ऐसे में आरोपियों को लंबे समय तक जेल में रखना उचित नहीं है।

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ठोस व प्रत्यक्ष साक्ष्य उपलब्ध नहीं

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि उन्हें एसआई भर्ती-2021 पेपरलीक मामले में झूठा फंसाया गया है और उनके खिलाफ कोई ठोस व प्रत्यक्ष साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। रिकॉर्ड के अनुसार, विनोद कुमार जाट 28 अगस्त, कैलाश कुमार 19 सितंबर, परमेश चौधरी 23 सितंबर और मंगलाराम 27 सितंबर से न्यायिक अभिरक्षा में थे। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि मामले के अन्य सह-आरोपियों को पहले ही जमानत का लाभ मिल चुका है। ऐसे में समानता के आधार पर इन आरोपियों को भी राहत दी जानी चाहिए।

प्रकरण में अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि विनोद कुमार लंबे समय तक फरार रहा था। जबकि कैलाश कुमार और मंगलाराम पर पेपर खरीदने के गंभीर आरोप हैं। वहीं, मंगलाराम पर डमी अभ्यर्थी बैठाने और विनोद पर पेपर खरीदने व बेचने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, बचाव पक्ष ने दलील दी कि अभियोजन के पास आरोपों के समर्थन में कोई पुख्ता साक्ष्य मौजूद नहीं है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि फिलहाल आरोपियों को जमानत पर रिहा किया जाना उचित होगा। इसके साथ ही कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि आरोपियों को ट्रायल के दौरान अदालत के निर्देशों का पालन करना होगा।

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Published on:
13 Jan 2026 01:42 am
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