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लोगों को मिलावटी दूध-जहरीली सब्जियां न खानी पड़ें, इसके लिए क्या कदम उठा रहे: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान HC ने आमजन के स्वास्थ्य पर गंभीरता दिखाते हुए कहा कि मिलावटी दूध और जहरीले पानी से उगाई जा रही सब्जियां न खाने पड़ें, इसके लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
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जयपुर

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Santosh Trivedi

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Updated: 13 Feb 2026, 11:58 AM IST

Allahabad High Court

सांकेतिक इमेज

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने आमजन के स्वास्थ्य पर गंभीरता दिखाते हुए कहा कि मिलावटी दूध और जहरीले पानी से उगाई जा रही सब्जियां न खाने पड़ें, इसके लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

कोर्ट ने राजस्थान कॉपरेटिव डेयरी फैडरेशन (आरसीडीएफ) मिलावटी दूध की खरीद, प्रोसेसिंग व गुणवत्ता परीक्षण की व्यवस्था के बारे में रिपोर्ट तलब की।

वहीं राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल से कहा कि प्रदेश में कॉमन ट्रीटमेंट प्लांट्स (सीईटीपी) व उनकी स्थिति और जहरीले पानी से सब्जियां उगाने के मामलों में कार्रवाई के बारे में जानकारी दी जाए। अब 6 अप्रेल को सुनवाई होगी।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा व न्यायाधीश संगीता शर्मा की खंडपीठ ने मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री को लेकर स्वप्रेरणा से दर्ज याचिका पर गुरुवार को यह आदेश दिया।

साथ ही इस मामले में आरसीडीएफ व प्रदूषण नियंत्रण मंडल को पक्षकार बनाया। कोर्ट ने दूध प्रोसेसिंग और गुणवत्ता जांच के लिए अपनाई जा रही मानक संचालन प्रक्रिया तथा उपभोक्ताओं तक आपूर्ति से पहले किए जाने वाले परीक्षण प्रोटोकॉल की जानकारी मांगी।

साथ ही कहा कि दूध आवश्यक वस्तु है और इसकी गुणवत्ता को लेकर लापरवाही का सीधा स्वास्थ्य पर असर होता है।
सुनवाई के दौरान न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता एम एस सिंघवी व अधिवक्ता दर्श पारीक ने कहा कि प्रदेश में 11 टेस्टिंग लैब में कितनी चालू हैं, यह भी एक सवाल है।

चौमूं की सब्जी पसंद, सांगानेर की नहीं

सिंघवी ने कहा कि जब वे जयपुर रहते थे तो लोग चौमूं की सब्जी पसंद करते थे, सांगानेर की नहीं। वजह सांगानेर में दूषित जल से सब्जियां उगाई जा रही हैं। इस पर महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि सांगानेर के उद्योगों का पानी सीईटीपी में जा रहा है और वह चालू है, जिसके जवाब में सिंघवी ने कहा कि सीईटीपी से रिस कर पानी जाता है और क्या पूरे राजस्थान में सीईटीपी चालू हैं।

41 जिलों में 11 ही फूड टेस्टिंग लैब

खाद्य सुरक्षा जांच को लेकर महाधिवक्ता ने कहा कि खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर आ रही समस्या दूर हो चुकी, उनका उनका प्रशिक्षण चल रहा है। इसी दौरान कोर्ट ने कहा कि 41 जिलों में 11 फूड टेस्टिंग लैब हैं, क्या टेस्टिंग कराने लोग दूसरे जिलों में जाएं? इस पर महाधिवक्ता ने कहा कि यह प्रशासनिक विषय है, तो कोर्ट ने कहा कि पर्याप्त संख्या में लैब तो हानी ही चाहिए।

ट्रीटमेंट प्लांट के पास कितने आरओ लगे

कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण मंडल से पूछा कि नदी-नालों में दूषित पानी आने से रोकने के लिए क्या कदम उठाए? ट्रीटमेंट प्लांट के पास कितने आरओ लगे हैं, ताकि दूषित जल का रिसाव रुक सके। प्रदूषण फैलाने वाले और गंदे पानी से सब्जियां उगाने वालों पर क्या कार्रवाई जा रही है। सरकारी पक्ष से यह भी रिपोर्ट मांगी कि दूध की मात्रा बढ़ाने के लिए पशुओं को ऑक्सीटोसीन इंजेक्शन लगाने का स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव हो रहा है?

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