Ramjal Setu Link Project : रामजल सेतु लिंक परियोजना में आने वाला पानी चम्बल नदी के 30 मीटर ऊपर से बहेगा। बूंदी जिले के गुहाटा गांव के पास चम्बल नदी पर देश का सबसे बड़ा एक्वाडक्ट यानि पानी का पुल बनाया जा रहा है। जानें और बहुत कुछ।
Ramjal Setu Link Project : रामजल सेतु लिंक परियोजना में आने वाला पानी चम्बल नदी के 30 मीटर ऊपर से बहेगा। बूंदी जिले के गुहाटा गांव के पास चम्बल नदी पर देश का सबसे बड़ा एक्वाडक्ट (ब्रिज) बनाया जा रहा है। नवनेरा बैराज से आने वाला पानी इस एक्वाडक्ट के जरिए मेज बांध तक पहुंचेगा, जिसके लिए पानी को चम्बल नदी के ऊपर से ही क्रॉस कराया जाएगा।
करीब 2300 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस एक्वाडक्ट की लम्बाई करीब 2.28 किलोमीटर और चौड़ाई 45 मीटर होगी। खास बात यह है कि राजस्थान में पहली बार इतनी बड़ी इंजीनियरिंग संरचना आकार ले रही है। यहां पानी भी बहेगा और इसके ऊपर वाहन भी चलेंगे।
अभी इस प्रोजेक्ट में पिलर का निर्माण कार्य चल रहा है। एक्वाडक्ट बनाने में नई और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिससे यह ढांचा ज्यादा मजबूत और लंबे समय तक टिकने वाला होगा। पिलर और पानी ले जाने वाली संरचना (ट्रफ) को साइट पर बनाने की बजाय पहले से तैयार करके यहां लाकर फिट किया जाएगा।
यह एक्वाडक्ट एक सेकंड में ढाई सौ क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड तक पानी ले जा सकेगा। इसके लिए 5060 मजबूत नींव पर 450 पिलर खड़े किए जाएंगे और इनके ऊपर 76 हिस्सों में ट्रफ रखी जाएगी। यह प्रोजेक्ट राजस्थान में पानी की व्यवस्था और बुनियादी ढांचे को नई मजबूती देगा।
इस एक्वाडक्ट की खासियत यह भी है कि इसके समानांतर 8 मीटर चौड़ी सड़क बनाई जा रही है, जिससे वाहन भी आसानी से गुजर सकेंगे। यह इंफ्रास्ट्रक्चर पानी प्रवाह के साथ-साथ सड़क संपर्क को भी मजबूत करेगी।
एक्वाडक्ट एक ऐसी विशेष संरचना है, जिसके जरिए पानी को नदी, घाटी या अन्य अवरोध के ऊपर से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जाता है। आमतौर पर इसका उपयोग नहरों या जल परियोजनाओं में किया जाता रहा है, ताकि पानी बिना रुकावट अपने गंतव्य तक पहुंच सके।
1- देश का सबसे बड़ा एक्वाडक्ट।
2- लंबाई : 2280 मीटर, चौड़ाई - 45 मीटर।
3- ऊंचाई : चम्बल नदी से करीब - 30 मीटर ऊपर।
4- क्षमता : 250 क्यूबिक मीटर प्रति सेकण्ड पानी प्रवाह।
देश में सबसे बड़ा एक्वाडक्ट बनाया जा रहा है, इसके जरिए चम्बल नदी के ऊपर से पानी का प्रवाह किया जाएगा। आधुनिक तकनीक से बन रहा यह ढांचा मजबूत और लंबे समय तक टिकाऊ रहेगा। यह प्रोजेक्ट जल प्रबंधन और कनेक्टिविटी, दोनों को नई दिशा देगी।
रवि सोलंकी, प्रबंध निदेशक, राजस्थान वाटर ग्रिड कॉर्पोरेशन