
जयपुर. टोंक रोड स्थित राडो शोरूम में 30 से 35 मिनट के भीतर 4 से 5 करोड़ रुपए की 251 लग्जरी घड़ियां चुराने वाले गिरोह तक आखिर पुलिस पहुंच गई। 26 दिन की पड़ताल, 800 सीसीटीवी कैमरों से जुटाए सुराग और 3,000 किलोमीटर का सफर तय करके पुलिस ने बिहार के मोतिहारी से आरोपी अजय प्रसाद और दिनेश पासवान को गिरफ्तार किया है। जबकि गिरोह के सरगना अरुण शाह और श्याम बाबू उर्फ गुल्लीशाह, सुबोध उर्फ विकास, सुरेंद्र प्रसाद उर्फ बैला, राजा मालाहा व राजकुमार मालाहा की तलाश में पुलिस ने नेपाल सीमा से सटे रक्सौल और बीरगंज बॉर्डर तक चौकसी बढ़ा दी है। इसके बाद आरोपी ई-रिक्शा से सिंधी कैप बस स्टैंड पहुंचे और फिर हरियाणा रोडवेज की बस से दिल्ली चले गए। वहां से वे गाजियाबाद पहुंचे, जहां उन्होंने इकट्ठा होने के लिए किराए का कमरा ले रखा था।
बदमाशों ने वारदात के लिए अलसुबह का समय चुना। एक अक्टूबर को टोंक रोड पर शोरूम का शटर तोड़ने से पहले उन्होंने उसके बाहर एक बड़ा पर्दा और बेडशीट तान दी थी, ताकि सड़क से गुजरने वाले राहगीरों और आसपास के लोगों को लगे कि दुकान पर कोई अंदरूनी मरम्मत या दूसरा काम चल रहा है। इसी आड़ में उन्होंने शटर उखाड़ा और बोरियों में घड़ियां भरकर फरार हो गए। वारदात के बाद आरोपियों ने अपनी लोकेशन छिपाने के लिए मोबाइल फोन बंद कर दिए थे।
पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों की फुटेज के आधार पर आरोपियों के भागने का रूट मैप तैयार किया। जांच के दौरान सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब गाजियाबाद के एक इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरे में दो संदिग्धों के चेहरे से नकाब हटा हुआ नजर आया। यही वह सुराग था जिसने पुलिस को आरोपियों की असली पहचान तक पहुंचाया। इसके बाद बजाज नगर थाना पुलिस और डीएसटी की संयुक्त टीम ने बिहार के मोतिहारी में दबिश दी।
वारदात के तुरंत बाद ही आरोपियों को पकड़ने में बजाज नगर थाना पुलिस और डीएसटी (ईस्ट) जुट गई थी। थानाधिकारी मुनींद्र सिंह, एसआई गिरवर सिंह, हेड कांस्टेबल अविनाश, डीएसटी से एसआई बन्नालाल, कांस्टेबल राजेश चौधरी, गौरव सोलंकी, नीरज, हेमंत, रामअवतार सहित अन्य पुलिसकर्मियों ने आरोपियों को पकड़ने में अहम भूमिका निभाई। पुलिस ने बताया कि गिरोह के सभी आरोपी बिहार में मोतिहारी में स्थित घोडासन के रहने वाले हैं। देश के कई राज्यों में ये आरोपी वारदात करते आए हैं।