
राजस्थान में छात्र राजनीति और युवाओं के अधिकारों की लड़ाई अब बेहद खतरनाक और गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव बहाल कराने की मुख्य मांग को लेकर अनशन पर बैठे छात्र नेता शुभम रेवाड़ का आमरण अनशन बुधवार 5 अगस्त को 14वें दिन में प्रवेश कर गया।
जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल के ICU में भर्ती शुभम रेवाड़ ने सरकार के उदासीन रवैये से आहत होकर अब अन्न के बाद जल और मेडिकल ट्रीटमेंट (इलाज) दोनों का पूरी तरह त्याग कर दिया है। डॉक्टरों के अनुसार, पिछले कई दिनों से बिना अन्न-जल और बिना किसी चिकित्सा सहायता के रहने के कारण उनका शरीर तेजी से जवाब दे रहा है और उनकी स्थिति किसी भी क्षण जानलेवा हो सकती है।
छात्र नेता शुभम रेवाड़ 23 जुलाई से राजस्थान यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार पर अपनी दो प्रमुख मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरने और आमरण अनशन पर बैठे थे।
छात्र संघ चुनाव की बहाली: प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में बंद पड़े छात्र संघ चुनावों को अविलंब पुनः शुरू किया जाए।
राजस्थानी भाषा विभाग की स्थापना: राजस्थान विश्वविद्यालय के भीतर एक नियमित राजस्थानी भाषा विभाग का गठन किया जाए।
अनशन के 9वें दिन (31 जुलाई) अचानक सांस लेने में तकलीफ और ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर तक गिरने के बाद पुलिस-प्रशासन ने उन्हें जबरन एसएमएस अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया था।
अस्पताल परिसर में भर्ती रहने के बावजूद राज्य सरकार की तरफ से कोई वार्ताकार या प्रतिनिधि न भेजने से शुभम रेवाड़ ने अपना आंदोलन और कड़ा कर दिया। उन्होंने डॉक्टरों को किसी भी प्रकार की ड्रिप, इंजेक्शन या जीवन रक्षक दवाइयां देने से साफ मना कर दिया है और पानी की एक बूंद भी पीने से इंकार कर दिया है।
छात्र नेता का कहना है कि जब तक भजनलाल शर्मा सरकार लिखित में उनकी दोनों मांगों पर ठोस कार्रवाई का आश्वासन नहीं देती, तब तक वे अपनी देह का त्याग करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
23 जुलाई: आंदोलन का आगाज: RU के मुख्य गेट के बाहर आमरण अनशन शुरू.
छात्र संघ चुनाव बहाली और राजस्थानी भाषा विभाग की मांग को लेकर शुभम रेवाड़ ने यूनिवर्सिटी गेट पर सत्याग्रह शुरू किया।
31 जुलाई (9वां दिन): तबीयत बिगड़ी: सांस लेने में तकलीफ के बाद पुलिस ने SMS अस्पताल में कराया भर्ती.
स्वास्थ्य अत्यधिक खराब होने के बाद प्रशासन ने उन्हें जबरन सवाई मानसिंह अस्पताल जयपुर में दाखिल कराया।
4 अगस्त: इलाज और जल का बहिष्कार: सरकारी बेरुखी के विरोध में जल और दवाओं का त्याग.
सरकार की ओर से कोई संवाद न होने पर छात्र नेता ने मेडिकल ट्रीटमेंट, ड्रिप और पानी का पूर्ण रूप से त्याग कर दिया।
5 अगस्त (14वां दिन): स्थिति अत्यंत नाजुक: विपक्ष ने सरकार को घेरा.
14वें दिन अनशन जारी रहने से स्वास्थ्य गंभीर मोड़ पर। कांग्रेस विधायक मुकेश भाकर समेत कई नेताओं ने पहुंचकर सरकार को चेताया।
सरकार के किसी नुमाइंदे या प्रशासनिक अधिकारी के वार्ता के लिए न पहुंचने पर छात्र समुदाय और राजनीतिक हलकों में भारी रोष है। हाल ही में कांग्रेस विधायक मुकेश भाकर सहित कई छात्र नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एसएमएस अस्पताल पहुंचकर शुभम रेवाड़ के स्वास्थ्य का हाल जाना।
विधायक भाकर ने सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र में युवाओं की जायज मांगों को सुनने के बजाय सरकार आंखें मूंदकर बैठी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अनशनकारी छात्र नेता के स्वास्थ्य को कोई नुकसान पहुंचता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी और पूरे राजस्थान में उग्र छात्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।