
विकास सिंह
जयपुर। अलवर जिले की राजगढ़ रेंज में जंगल विकास के नाम पर हुए 17-18 करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार के मामले की जांच एसीबी से कराने की फाइल दो महीने से वनमंत्री संजय शर्मा के पास लंबित है। यह स्थिति तब है जब मुख्यमंत्री 'भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति' अपनाने का दावा करते हैं। वनमंत्री शर्मा उसी अलवर जिले से विधायक है, जहां यह घोटाला हुआ है। दूसरी ओर, यह मामला हाईकोर्ट में सरकार के गले की फांस बनता जा रहा है। हाईकोर्ट ने दो टूक चेतावनी दी है कि वन विभाग ने 26 अक्टूबर तक जवाब दाखिल नहीं किया तो विभाग के मुखिया पीसीसीएफ (हॉफ) को अदालत में हाजिर होना पड़ेगा।
राजस्थान पत्रिका ने 'सीसीएफ का लेटर बम', 'जंगल के नाम पर 17 करोड़ का खेल' और 'बुलडोजर चला, मजदूर कागजों में' जैसी खबरों से यह घोटाला उजागर किया था। वर्दा फाउंडेशन की जनहित याचिका में पत्रिका की खबरों को अहम साक्ष्य के रूप में शामिल किया गया है। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने एक जुलाई 2026 को राज्य सरकार, अतिरिक्त मुख्य सचिव और पीसीसीएफ (हॉफ) को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा था। जवाब के लिए बार-बार समय नांगने पर 15 सितंबर को कोर्ट ने विभाग को कड़ी फटकार लगाई।
पीसीसीएफ (हॉफ) अरिजीत बनर्जी के पत्र और विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में बिना सत्यापन 11.77 करोड़ रुपए का भुगतान पकड़ा गया। करीब 10 करोड़ रुपए के ऐसे भुगतान भी मिले, जिनका प्राप्तकर्ता अज्ञात है। इनके अलावा 52.5 लाख रुपए के संदिग्ध नकद लेनदेन सामने आए हैं। बिल की राशि और किए गए भुगतान आपस में मेल नहीं खाते। एक ही दिन में एक ही व्यक्ति या पक्ष को दो लाख रुपए से कम के कई चेक जारी कर नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं।
7 फरवरी 2025: प्रारंभिक जांच अधिकारी और तत्कालीन सीसीएफ जयपुर राजीव चतुर्वेदी ने अनियमितताओं को बेहद गंभीर माना। उन्होंने मामले को एसीबी जांच के योग्य बताते हुए इसकी सिफारिश की।
7 जुलाई 2026: पीसीसीएफ (हॉफ) अरिजीत बनर्जी ने सात ग्राम वन सुरक्षा समितियों के जरिए 17 करोड़ रुपए के अवैध आहरण की एसीबी जांच का प्रस्ताव सरकार को भेजा।
9 जुलाई 2026: पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर अंतिम मंजूरी के लिए फाइल वन मंत्री कार्यालय को भेज दी।
अब तक: दो महीने से अधिक बीतने पर भी मंजूरी पर वनमंत्री ने कोई फैसला नहीं किया।
घोटाले में रेंजर, वनपाल, तकनीशियन और लेखाधिकारी सहित 10 विभागीय कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित है। तत्कालीन डीसीएफ (अलवर) अपूर्व कृष्ण श्रीवास्तव को कारण बताओ नोटिस जारी हुआ है। निवर्तमान डीसीएफ (अलवर) राजेंद्र कुमार हुड्डा को भी नोटिस दिया गया था, लेकिन वर्तमान सीसीएफ (जयपुर) आरके खैरवा ने उनके स्पष्टीकरण को संतोषप्रद मानते हुए आरोप सिद्ध नहीं मानने की अनुशंसा की है। हालांकि, मुख्यालय ने अभी हुड्डा को क्लीन चिट नहीं दी है। 7 जुलाई के प्रस्ताव में साफ लिखा है कि विभागीय अधिकारियों के साथ निजी व्यक्तियों की संलिप्तता को देखते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 की धारा 17(ए) के तहत एसीबी से विस्तृत जांच कराना ही उचित है।