जयपुर

Jaipur: ‘बहन ने की रक्षा’, 4 बहनों के इकलौते भाई को मिला ऐसा तोहफा की बदल गई जिंदगी, बोले-मुझे इन्हें राखी बांधनी चाहिए

जयपुर में रक्षाबंधन के मौके पर भाई-बहन के अनोखे रिश्तों की कहानियां सामने आई हैं। किसी बहन ने भाई को लिवर का हिस्सा देकर नई जिंदगी दी, तो किसी ने खून का रिश्ता न होने के बावजूद भाई-बहन का रिश्ता निभाया।
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Aug 28, 2026
rakshabandhna special
भाई-बहन का फोटो: पत्रिका

Raksha Bandhan Special Story:राखी का धागा छोटा जरूर है, लेकिन इसमें बंधा रिश्ता बहुत बड़ा होता है। यह सिर्फ भाई की कलाई पर बंधने वाला धागा नहीं, बल्कि उस भरोसे का प्रतीक है जिसमें बहन भाई की सलामती की दुआ करती है और भाई उसकी खुशियों और सुरक्षा के लिए हर मुश्किल के सामने खड़ा रहने का वचन देता है। वक्त बदलता है, जिंदगी की राहें बदलती हैं, लेकिन भाई-बहन का साथ उन रिश्तों में शामिल रहता है, जो मुश्किल समय में सबसे मजबूत सहारा बनते हैं। जयपुर में ऐसे कई भाई-बहन हैं, जिनकी कहानियां बताती हैं कि राखी का असली अर्थ सिर्फ रक्षा का वचन नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे के लिए अपना सबकुछ दांव पर लगा देना है।

4 बहनों के इकलौते भाई को मिला ऐसा तोहफा की बदल गई जिंदगी

4 बहनों के इकलौते भाई अश्विनी शर्मा जब जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे थे तब बहन नीतू कैसे पीछे हटतीं। जिस भाई को बहनों ने बचपन से दुआओं में मांगा था उसी की जिंदगी बचाने के लिए नीतू ने अपना लीवर देने का फैसला किया। ट्रांसप्लांट से पहले अश्विनी 5 दिन तक कोमा और वेंटिलेटर पर रहे। हालत गंभीर थी। पत्नी ने भी लीवर डोनेट करने की कोशिश की लेकिन नीतू भाई की जिंदगी बचाने के लिए आगे आईं और अपने लीवर का हिस्सा देकर उन्हें नई जिंदगी दी। इसके बाद तो उनकी जिंदगी ही बदल गई।

अश्विनी कहते हैं कि मेरी बहन ने जिस तरह मेरी रक्षा की वह कोई और नहीं कर सकता। ये सिर्फ बहन ही कर सकती है। मेरी 3 छोटी बेटियां हैं, पत्नी है, मां-पिता हैं। अगर मैं नहीं रहता तो इनकी देखभाल कौन करता? मेरी बहनों ने हर मुश्किल घड़ी में मेरा साथ दिया और इस बार तो नीतू ने मुझे अपना कलेजे का हिस्सा देकर जिंदगी दे दी। वे कहते हैं, अब लगता है कि राखी मुझे अपनी बहनों को बांधनी चाहिए क्योंकि मेरी रक्षा तो मेरी बहनें कर रही हैं।

एक मुलाकात ने दिया बहन का रिश्ता, साथ मिलकर साकार किया सपना

हर राखी पर सोचता था कि काश मेरी भी बहन होती। नेहा दीदी आईं तो लगा जैसे भगवान ने मेरी यह कमी पूरी कर दी। तरूण बंसल ने बताया कि वर्ष 2021 में कारोबार के सिलसिले में हुई एक मुलाकात ने उनकी जिंदगी में ऐसा रिश्ता जोड़ दिया, जिसकी उन्होंने शायद कभी कल्पना भी नहीं की थी। नेहा गट्टानी से पहली मुलाकात ग्राहक और सप्लायर के तौर पर हुई। नेहा इंटीरियर डिजाइनिंग, सोफा और फर्नीचर का काम करती थीं, जबकि तरूण लकड़ी, प्लाइवुड और फर्नीचर हार्डवेयर का कारोबार करते थे। काम के साथ एक अपनापन बनने लगा तो हमने एक-दूसरे को भाई बहन बना लिया। इसके बाद राखी और भाई-दूज साथ मनाने लगे। 2024 में नोएडा की मशीनरी प्रदर्शनी में साथ जाने के बाद सपना पक्का हुआ। रास्ते में मुश्किलें आईं तो नेहा ने कहा, अब तू अकेला नहीं है, मैं तेरे साथ हूं। हम दोनों मिलकर इसे खड़ा करेंगे। 31 जुलाई 2025 को दोनों ने अपनी इकाई शुरू कर दी। हमने प्लांट का नाम दोनों की फर्म को मिलाकर रखा। तरूण कहते हैं, हमारा रिश्ता खून का नहीं, लेकिन मेरे लिए बिल्कुल सगे भाई-बहन जैसा है।

रक्षाबंधन पर भाई के लिए चांदी का खास श्रृंगार

आकांक्षा और तनु अग्रवाल का अपना सगा भाई नहीं है। पिछले 16 वर्षों से दोनों बहने लड्डू गोपाल को अपना भाई मान रही है। उन्हें ही हर साल राखी बांध रही है। अपने भाई के साथ रिश्ता कुछ अनोखा है। छोटे भाई की तरह उनका पूरा ख्याल रखती है। यही नहीं अपनी सारी बाते उनसे शेयर करती है। भाई की तरह उनके साथ लड़ती-झगड़ती भी है और उनकी हर छोटी-बड़ी जरूरत का ध्यान रखती हैं। यही नहीं जब घूमने जाते है तो इन्हें साथ लेकर जाते हैं। यही नहीं हम हमारी शादी में भाई की सारी रस्में इनसे ही करवाएंगे। इस रक्षाबंधन पर दोनों ने अपने भाई के लिए खास तोहफा भी तैयार कराया है। उन्होंने लड्डू का पूरा चांदी का श्रृंगार बनवाया है, जिसमें कानों की चेन से लेकर हाथों और पैरों के आभूषण तक शामिल हैं। उनके लिए लड्डू गोपाल सिर्फ भगवान नहीं, बल्कि 16 साल से घर का हिस्सा बने प्यारे भाई हैं।

Updated on:
28 Aug 2026 07:23 am
Published on:
28 Aug 2026 07:23 am