
राजधानी की प्यास बुझाने वाले ऐतिहासिक रामगढ़ बांध का गला घोंटने का सिलसिला वर्षों से जारी है। नक्शे अब भी बताते हैं कि यहां नदी बहती है, लेकिन जमीन पर पानी नहीं, कब्जे दिखाई देते हैं। रामगढ़ बांध के कैचमेंट एरिया में शुरू हुए संयुक्त सर्वे ने शुरुआती दौर में ही चौकाने वाले संकेत दिए हैं। बाणगंगा और उसकी सहायक नदियों के बहाव क्षेत्र में बड़े पैमाने पर खेती, मेड़बंदी, फार्महाउस और अन्य निर्माण सामने आ रहे हैं।
अधिकारियों के अनुसार बाणगंगा नदी और उसकी सहायक नदियों के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र में खेती, मेड़बंदी, तारबंदी, ट्यूबवेल और अन्य निर्माणों के रूप में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण सामने आ रहे हैं। कैचमेंट क्षेत्र में बने फार्महाउस, रिसॉर्ट, होटल और अन्य पक्के निर्माणों का भी पुराने रिकॉर्ड से मिलान किया जा रहा है।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद जिला प्रशासन ने रामगढ़ बांध के कैचमेंट क्षेत्र की व्यापक पड़ताल और 57 गांवों में जांच तेज कर दी है। बहाव क्षेत्र का राजस्व रिकॉर्ड और मौके की स्थिति से मिलान कर अतिक्रमण चिन्हित किए जा रहे हैं। जमवारामगढ़, विराटनगर, शाहपुरा और आमेर उपखंड के राजस्व अधिकारियों को मौके पर प्राकृतिक बहाव क्षेत्र का सत्यापन कर राजस्व रिकॉर्ड से मिलान करने के निर्देश दिए गए हैं।
जल संसाधन विभाग ने करीब 20 किलोमीटर तक बाणगंगा नदी के बहाव क्षेत्र का निरीक्षण किया। इसमें 10 किलोमीटर से अधिक हिस्से में खेती के नाम पर बहाव क्षेत्र पर कब्जा मिला है।
जिला प्रशासन ने जमवारामगढ़ एसडीएम ललित मीणा और विराटनगर एसडीएम लालचंद यादव के माध्यम से पटवारियों और गिरदावरों से 4 अगस्त तक मौका रिपोर्ट तलब की है।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि कैचमेंट एरिया में किसके फार्महाउस हैं, किसके होटल और रेस्टोरेंट संचालित हो रहे हैं, इसकी पूरी जानकारी रिपोर्ट में शामिल की जाए। प्रभावशाली व्यक्ति क्यों न हो, अतिक्रमणियों के नाम रिपोर्ट में आने चाहिए। कोर्ट के कैचमेंट एरिया में अतिक्रमण करने वालों के नाम बताने के निर्देश पर प्रशासन ने कार्मिकों को जांच के लिए भेजा है।