
जयपुर। ग्रामीण क्षेत्र में पिछले दो दिनों से लगातार बारिश हो रही है, लेकिन इसके बावजूद रामगढ़ बांध को पानी की आवक का इंतजार है। बांध को भरने वाली मुख्य बाण गंगा नदी के साथ सहायक माधोवेणी नदी, गोमती (अचरोल) नदी, राजपुरावास ताला नाला और निजी विश्वविद्यालय के पीछे चिताणु की पहाड़ियों से निकलने वाले नालों में भी पानी नहीं पहुंच पाया है।
बारिश के बाद पहाड़ियों से बहकर आने वाला पानी नदी-नालों तक पहुंचने के बजाय रास्ते में बने एनीकट और तालाबों में रुक गया। वहीं, कई जगह नदी-नालों के बहाव क्षेत्र में हुए अतिक्रमण भी पानी की राह में रोड़ा बने हुए हैं। तेज बारिश के बावजूद बाण गंगा नदी में पानी की आवक नहीं होने से ग्रामीणों में निराशा है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक कार्रवाई कागजी प्रक्रिया तक सीमित नजर आ रही है। नदी के बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण आज भी मौजूद हैं। बाण गंगा से जुड़ने वाले छोटे-बड़े नालों पर भी कई जगह अतिक्रमण से उनका प्राकृतिक बहाव प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारी फिलहाल रामगढ़ बांध के कैचमेंट एरिया की मुख्य और सहायक नदी-नालों में अतिक्रमण चिन्हित करने में जुटे हैं, लेकिन गांवों से इन नदी-नालों में मिलने वाले छोटे नालों की स्थिति की अब तक पर्याप्त सुध नहीं ली गई है। मामले को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में 13 अगस्त को सुनवाई है।
कैचमेंट एरिया में अतिक्रमण से जुड़े कुल 277 रेफरेंस तैयार कर संबंधित स्तर पर भेजे गए थे। इनमें से 197 रेफरेंस पर निर्णय लिया जा चुका है, जबकि करीब 80 रेफरेंस अभी भी विचाराधीन हैं। इनमें कई ऐसे मामले भी शामिल हैं, जिनमें वर्षों पहले ही निर्णय हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद मौके पर संबंधित आदेशों की पालना अब तक नहीं हो सकी है। यानी रिकॉर्ड में मामलों का निस्तारण हो चुका है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति पूरी तरह नहीं बदली है। ऐसे में हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई से पहले प्रशासन की ओर से रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया जारी है। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन मामलों में पहले ही आदेश जारी हो चुके हैं, उन आदेशों की मौके पर वास्तविक पालना आखिर कब तक होगी।