
कैचमेंट एरिया में ऐसे एनिकट से भी रुकी जलधाराएं (Photo-Patrika)
जयपुर। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद रामगढ़ बांध के कैचमेंट एरिया को अतिक्रमण और अवैध निर्माण से मुक्त कराने की कवायद अब कार्रवाई के चरण में पहुंच गई है। जिला प्रशासन ने कैचमेंट क्षेत्र में अतिक्रमण और अवैध निर्माण की पहचान का पहला चरण पूरा कर लिया है। गुरुवार को जिला कलक्टर ने राजस्व, जल संसाधन, जेडीए और अन्य महकमों के अधिकारियों के साथ बैठक की और विभागवार जानकारी ली।
हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद जिला कलक्टर ने संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा है। इसके बाद महज पांच दिन में विभिन्न विभागों ने कैचमेंट क्षेत्र की प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर ली। राजस्व विभाग की टीमें मौके पर लगातार जांच कर रही हैं। जमवारामगढ़, शाहपुरा, विराटनगर और आमेर क्षेत्र के एसडीएम, तहसीलदार, पटवारी और गिरदावर इस कार्रवाई में लगाए गए हैं। जल संसाधन विभाग की दो टीमें और जेडीए की टीमें भी काम कर रही हैं। पहले चरण में अतिक्रमण और अवैध निर्माण चिन्हित कर अब अगले चरण में संबंधित लोगों और संस्थानों की सूची तैयार की जा रही है।
बैठक में सामने आया कि निम्स यूनिवर्सिटी का साउथ-ईस्ट ब्लॉक नाले की जमीन पर बना हुआ है। इसे हटाने के लिए जेडीए को निर्देश दिए गए हैं। जेडीए इस हिस्से में वर्ष 2019 में भी कार्रवाई कर चुका है। दोबारा निर्माण ने जेडीए की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके अलावा एमिटी विश्वविद्यालय का कुछ हिस्सा भी नाले की जमीन पर बना हुआ है। संबंधित निर्माण और जमीन की स्थिति का सत्यापन कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में तय हुआ कि जेडीए दोनों विवि को नोटिस जारी करेगा। इसके बाद अगले सप्ताह से अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई होगी। इसके लिए जरूरी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं। बैठक में पेश की गई रिपोर्ट में रामगढ़ बांध के भराव क्षेत्र में 125 फसली अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं। कैचमेंट क्षेत्र में अन्य अवैध निर्माण और अतिक्रमण भी चिन्हित किए गए हैं। अधिकारियों को सभी अतिक्रमणकारियों और अवैध निर्माण करने वालों की सूची तैयार कर नोटिस देने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
Updated on:
07 Aug 2026 11:51 am
Published on:
07 Aug 2026 11:47 am
