जयपुर

Exclusive: राजस्थान में 52 लाख लोगों को कवर करने वाली RGHS से दूरी बना रहे निजी अस्पताल, जानें क्यों

राजस्थान सरकार की करीब 52 लाख लोगों को कवर करने वाली कैशलेस स्वास्थ्य योजना 'आरजीएचएस' भुगतान संकट और नियमों की लगातार बढ़ती सख्ती के बीच गंभीर संकट में है।
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Oct 06, 2026
RGHS payment crisis
आरजीएचएस। फोटो: पत्रिका

जयपुर। राजस्थान सरकार की करीब 52 लाख लोगों को कवर करने वाली कैशलेस स्वास्थ्य योजना 'आरजीएचएस' भुगतान संकट और नियमों की लगातार बढ़ती सख्ती के बीच गंभीर संकट में है। भुगतान समय पर नहीं मिलने का हवाला देकर कुछ निजी अस्पतालों ने इस योजना से आंशिक, तो कुछ ने पूरी तरह दूरी बना ली है। चिंता की बात यह है कि इस योजना से जुड़े लाभार्थी सरकारी कर्मचारी, पेंशनर और उनके परिवार के सदस्य हैं। इनमें से अधिकांश इलाज न मिलने के बावजूद आधिकारिक तौर पर सरकार के पोर्टल पर शिकायत दर्ज नहीं करवा रहे है। इसका कारण सरकारी नौकरी में परेशानी खड़ी होने का डर माना जा रहा है, जबकि योजना से जुड़े अधिकारी केवल शिकायत मिलने पर ही कार्रवाई की बात कह रहे है।

यह भी सामने आया है कि जयपुर के एक बड़े निजी अस्पताल ने आगामी दिनों में निर्माण कार्य का हवाला देकर आरजीएचएस मरीजों का इलाज बंद करने का निर्णय लिया है, जबकि नकद भुगतान करने वाले मरीजों का इलाज जारी रहेगा। हालांकि, इसकी आधिकारिक घोषणा से बचा जा रहा है, लेकिन मरीजों को इसकी जानकारी दी जाने लगी है। एक अन्य निजी अस्पताल में आरजीएचएस के तहत सूचीबद्ध मरीज से एक लाख रुपए से अधिक लेकर इलाज किया गया। यहां बताया गया कि पहले भी इसी तरह योजना के मरीज से इतने ही पैसे लेकर इलाज किया गया था। उक्त मरीज ने शिकायत दर्ज नहीं करवाई, क्योंकि उनके परिवार के सदस्य राज्य सरकार में पदस्थ है।

आरजीएचएस पोर्टल के अनुसार, योजना में 13.61 लाख पंजीकृत लाभार्थी और 38.53 लाख परिवार के सदस्य यानी करीब 52.14 लाख लोग दर्ज है। प्रदेश में 2,663 अस्पताल इस योजना से जुड़े हैं। योजना का मूल उद्देश्य सूचीबद्ध अस्पतालों में निर्धारित पैकेज के तहत मरीजों को कैशलेस इलाज उपलब्ध कराना है।

अस्पतालों के लिए सख्त नियम

कुछ अस्पताल नियमों में बरती जा रही सख्ती के कारण भी योजना से दूरी बना रहे हैं। इसमें मुख्य प्रवेश द्वार, ओपीडी और दवा वितरण केंद्र के पास हेल्प डेस्क बनाना व कर्मचारी तैनात करना, गर्भवती महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों को प्राथमिकता देना तथा सूचीबद्ध डॉक्टर की ओर से प्रिस्क्रिप्शन का व्यक्तिगत सत्यापन आदि है।

इसलिए बना रहे दूरी

अस्पतालों का तर्क है कि भुगतान लंबे समय तक अटका रहता है। दवाओं, इम्प्लांट, जांच, डॉक्टरों और अन्य सेवाओं का खर्च अस्पताल को तत्काल वहन करना पड़ता है, जिससे उनकी कार्यशील पूंजी फंसती जाती है। कुछ संस्थानों की गड़बड़ियों पर कार्रवाई करने के बजाय लगातार नए नियम लागू किए जा रहे हैं। इनके पालन के लिए अतिरिक्त मैनपावर और संसाधनों की आवश्यकता होती है।

शिकायत करें

सूचीबद्ध अस्पताल या डॉक्टर कैशलेस इलाज के बजाय नकद राशि लेकर इलाज करता है तो यह गंभीर मामला है। मरीज और परिजन राजस्थान सरकार के संपर्क पोर्टल पर शिकायत कर सकते हैं। ऐसे अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी कर आगे की कार्रवाई की जाती है।
-निधि पटेल, परियोजना निदेशक, आरजीएचएस

Updated on:
06 Oct 2026 07:24 am
Published on:
06 Oct 2026 07:24 am