
Rajasthan : कांग्रेस नेता अशोक गहलोत। फाइल फोटो पत्रिका
Rajasthan : राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने कहा, एक वक्त था जब भारतीय निर्वाचन आयोग की साख सिर्फ देश में नहीं बल्कि दुनिया में थी। दुनिया के मुल्कों में जब चुनाव होते थे तो कई मुल्कों में तो भारतीय निर्वाचन आयोग का सहयोग लिया जाता था। चुनाव आयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के संदर्भ में मीडिया के सवालों को जवाब देते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा अविलंब होना चाहिए। प्राइम मिनिस्टर मोदी और अमित शाह को हस्तक्षेप कर इनका इस्तीफा करवाना चाहिए।
सवाल- राहुल गांधी जी ने फॉर्म नंबर 6 में बदलाव को लेकर ट्वीट किया है और इन दिनों चुनाव आयोग पर लगातार कई आरोप लग रहे हैं। आप इस पूरी स्थिति को किस तरह देखते हैं?
जवाब- देखिए, एक दौर था जब भारतीय निर्वाचन आयोग की साख न केवल देश में, बल्कि पूरी दुनिया में स्थापित थी। दुनिया के कई देशों में जब चुनाव होते थे, तो भारतीय निर्वाचन आयोग से मार्गदर्शन और सहयोग लिया जाता था। दुर्भाग्य से, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के आने के बाद जिस प्रकार मिलीभगत से फैसले लिए गए, उसने आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राहुल गांधी ने बहुत पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वोटों की चोरी हो रही है और SIR गलत हो रहा है, लेकिन तब किसी ने ध्यान नहीं दिया।
ज्ञानेश कुमार ने जिस भाषा और शैली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की, वैसी उम्मीद देश के मुख्य चुनाव आयुक्त से कदापि नहीं की जा सकती। विपक्षी दलों को सम्मान देना उनकी ड्यूटी है, लेकिन उन्होंने किसी का सम्मान नहीं किया। यह तमाशा देश पिछले लगभग एक साल से देख रहा है।
अशोक गहलोत ने कहा कि अब एक-एक कर उनके झूठ पकड़े जा रहे हैं। हाल ही में जब 'द इंडियन एक्सप्रेस' में यह खुलासा हुआ, तो पूरा देश स्तब्ध रह गया। आयोग के ही दो सदस्य यह आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने 14 बार आपत्तियां दर्ज कराईं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई और अंततः उन्हें कैबिनेट सचिव को पत्र लिखना पड़ा। हालांकि उन्हें राष्ट्रपति जी को पत्र लिखना चाहिए था। परंतु देश की शीर्ष निर्वाचन संस्था की यह नौबत आ जाना बेहद चिंताजनक है।
आज पूरे देश में विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और सभी राजनीतिक दल सड़कों पर हैं। पूरे देश में इस स्थिति को लेकर आक्रोश है। यदि निर्वाचन आयोग ही निष्पक्ष नहीं रहेगा, तो लोकतंत्र कहां बचेगा? और यदि लोकतंत्र ही समाप्त हो जाएगा, तो क्या यहां तानाशाही पूर्ण शासन करना चाहते हैं? जैसा कि चीन, उत्तर कोरिया या रूस जैसे देशों में नाममात्र के चुनावों के रूप में देखा जाता है? सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद पूरा देश ज्ञानेश कुमार से पूछ रहा है कि अब कोई शर्म बची हुई है आपकी?
अशोक गहलोत ने कहा कि इन्होंने आपसी बैठक करके और तीनों सदस्यों को साथ बिठाकर एक प्रेस नोट जारी करने तथा सफाई देने का प्रयास किया। उसमें यह दावा किया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने उनके फैसले को बरकरार रखा है। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि उन्होंने न तो कोई फैसला बरकरार रखा है और न ही इस पर कोई टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट के इस स्पष्टीकरण के बाद अब क्या बच जाता है? अब उनका इस्तीफ़ा होना चाहिए।
अशोक गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह इस मामले में इंटरवीन क्यों नहीं कर रहे हैं? यदि तत्कालीन उपराष्ट्रपति का अचानक 'स्वास्थ्य कारणों' से इस्तीफा कराया जा सकता है जिसके पीछे का सच क्या था, यह तो वे ही जानते होंगे। तो ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा स्वास्थ्य कारणों से क्यों नहीं कराया जा सकता? और पक्ष-विपक्ष अपनी भूमिका अदा करना शुरू करें। अगर 19 दिन तक हाउस के अंदर प्राइम मिनिस्टर और अमित शाह नहीं आए यह एक बड़ा इश्यू था। इसलिए मैं कहना चाहूंगा कि ज्ञानेश कुमार का तत्काल इस्तीफा होना चाहिए।
Updated on:
05 Oct 2026 07:01 pm
Published on:
05 Oct 2026 06:37 pm
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