RGHS : राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी आरजीएचएस योजना गंभीर संकट से जूझती नजर आ रही है। लेकिन चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इलाज के आंकड़े जारी कर ऑल इज वेल बता रहे हैं। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
RGHS : राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी आरजीएचएस योजना गंभीर संकट से जूझती नजर आ रही है। राजस्थान पत्रिका को प्रदेशभर से मरीजों की लगातार मिल रही शिकायतों ने व्यवस्था की हकीकत उजागर कर दी है। निजी अस्पतालों ने कैशलेस इलाज रोक दिया है, दवाएं नहीं मिल रही हैं और ऑपरेशन टल रहे हैं। मरीजों की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इलाज के आंकड़े जारी कर ऑल इज वेल बता रहे हैं।
कैंसर मरीजों की स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि महंगी दवाएं अब उन्हें अपनी जेब से खरीदनी पड़ रही हैं। जोधपुर से अलवर तक मरीजों को पर्ची तक से इनकार किया जा रहा है। लंबित भुगतान के चलते अस्पतालों की मनमानी जारी है और योजना का भरोसा टूटता जा रहा है।
राजधानी जयपुर के मानसरोवर निवासी सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी योगेंद्र कुमार ने बताया कि एक निजी नेत्र अस्पताल में पिछले एक महीने से इलाज चल रहा है, लेकिन अस्पताल की फार्मेसी ने कैशलेस दवाएं देना बंद कर दिया है। वजह बताई जा रही है कि सरकार की ओर से अस्पतालों का भुगतान लंबित है। ऐसे में मरीजों को अपनी जेब से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
इसी तरह मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए पंजीकरण कराने वाले एक मरीज को पहले 9 अप्रेल, फिर 15 अप्रेल की तारीख दी गई, लेकिन ऑपरेशन के दिन आरजीएचएस के तहत इलाज से ही मना कर दिया गया। मरीजों का कहना है कि यह स्थिति बेहद असुरक्षित है, अगर बीच प्रक्रिया में इलाज रोका गया तो जान का जोखिम भी हो सकता है।
कैंसर मरीजों की स्थिति और भी चिंताजनक है। एक महिला ने बताया कि उनके पति की हर महीने 15 से 20 हजार रुपए की दवाएं आरजीएचएस के तहत मिलती थीं, लेकिन अब दवाएं नहीं मिलने से इलाज प्रभावित हो रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह स्थिति असहनीय होती जा रही है।
शिकायतें केवल जयपुर तक सीमित नहीं हैं। जोधपुर में एक मरीज को 300 किलोमीटर दूर से अस्पताल आने के बावजूद पर्ची तक नहीं काटी गई। अलवर के एक निजी अस्पताल में भी महीनों से दवाएं नहीं देने की शिकायत सामने आई है। वहीं कई लाभार्थियों के आरजीएचएस कार्ड निष्क्रिय होने की समस्या भी सामने आ रही है, जिससे वे इलाज से वंचित हो रहे हैं।
मरीजों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ अस्पतालों में दवाओं और इंजेक्शन के दाम बाजार से अधिक वसूले जा रहे हैं और कैशलेस मरीजों से अतिरिक्त नकद शुल्क लिया जा रहा है। इन हालातों के बीच मरीजों की एक ही मांग है।
सरकार अस्पतालों के लंबित भुगतान को जल्द जारी करे, ताकि आरजीएचएस की सेवाएं बिना बाधा जारी रह सकें। यदि समय रहते समाधान नहीं किया गया तो यह योजना अपने मूल उद्देश्य से भटक सकती है और आमजन का भरोसा टूट सकता है।