सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने इन कानूनों को लागू करने के लिए आवश्यक नियम अब तक अधिसूचित नहीं किए हैं।
जयपुर। राजस्थान में जन आंदोलनों की मांग पर विधानसभा द्वारा पारित तीन अहम अधिकार आधारित कानून—राजस्थान न्यूनतम आय गारंटी अधिनियम 2023, राजस्थान स्वास्थ्य का अधिकार अधिनियम 2023 और राजस्थान प्लेटफॉर्म आधारित गिग वर्कर्स कल्याण एवं पंजीकरण अधिनियम 2023 अब नियमों के अभाव में प्रभावी रूप से लागू नहीं हो पा रहे हैं। इसे लेकर सामाजिक संगठनों और श्रमिक संगठनों में रोष बढ़ता जा रहा है।
सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने इन कानूनों को लागू करने के लिए आवश्यक नियम अब तक अधिसूचित नहीं किए हैं। खासतौर पर स्वास्थ्य का अधिकार कानून, जो देश का पहला ऐसा कानून है जो नागरिकों को वैधानिक रूप से स्वास्थ्य सेवाओं का अधिकार देता है, आज कागज़ों में सीमित रह गया है। स्वास्थ्य संस्थानों की आधारभूत संरचना, मानव संसाधन, दवाइयों और आपात सेवाओं को सुदृढ़ करने के ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
न्यूनतम आय गारंटी अधिनियम के तहत सामाजिक सुरक्षा पेंशन में हर वर्ष 15 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रावधान है, लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा। वर्ष 2026-27 के लिए पेंशन राशि 1500 रुपए से अधिक होनी चाहिए थी। जबकि हाल ही में मात्र 50 रुपए की बढ़ोतरी की गई। निखिल डे ने इसे गरीबों, बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगजनों के साथ अन्याय बताया।
ग्रामीण क्षेत्रों में 125 दिन और शहरी क्षेत्रों में 25 दिन रोजगार उपलब्ध कराने के प्रावधान पर भी सवाल उठाए गए। आरोप है कि शहरी रोजगार में केवल औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं और मांग-आधारित रोजगार की पारदर्शी व्यवस्था नहीं बन पाई है। गिग वर्कर्स कल्याण अधिनियम के तहत बजट प्रावधान होने के बावजूद खर्च नहीं होने से असंगठित श्रमिकों को लाभ नहीं मिल पा रहा।
11 फरवरी को पेश बजट में स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और श्रमिक कल्याण को अपेक्षित प्राथमिकता न मिलने पर भी सवाल खड़े किए गए। निखिल डे ने कहा था कि जब विधानसभा कानून पारित करती है और सरकार उन्हें लागू नहीं करती तो यह लोकतंत्र के साथ अन्याय है। अधिकारों को कागज़ों में सीमित नहीं रहने दिया जाएगा। संगठनों ने मांग की है कि तीनों कानूनों के नियम तत्काल अधिसूचित किए जाएं, पेंशन में 15 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि लागू हो और स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए ठोस बजटीय कदम उठाए जाएं। कार्रवाई नहीं होने पर व्यापक जनआंदोलन की चेतावनी दी गई है।