जयपुर

Rajasthan Panchayat  Election : ओवैसी की AIMIM और मायावती की BSP के बाद अब अठावले की RPI का ऐलान, 35 ज़िलों में उतारेंगे उम्मीदवार

RPI Entry in Rajasthan Politics : राजस्थान के पंचायत चुनाव में पहली बार ताल ठोकेगी RPI! जयपुर में केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने 35 जिलों में उम्मीदवार उतारने का किया ऐलान, BJP को रहेगा फुल सपोर्ट।
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Aug 04, 2026
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Asaduddin Owaisi, Mayawati, Ramdas Athawale - File PICs

राजस्थान में आगामी पंचायत और स्थानीय निकायों के चुनावी समर में इस बार एक नया सियासी समीकरण देखने को मिलेगा। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (A) के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामदास अठावले ने ऐलान करते हुए कहा है कि उनकी पार्टी राजस्थान में पहली बार संगठनात्मक मजबूती के साथ पंचायत चुनावों में उतरने जा रही है। अठावले ने साफ किया कि आरपीआई प्रदेश के 35 जिलों में ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद स्तर पर अपने उम्मीदवार उतारेगी और इन चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को उनका 'फुल सपोर्ट' रहेगा। जयपुर में आयोजित एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने अपनी पार्टी की चुनावी रणनीति और राज्य के ज्वलंत मुद्दों पर बेबाक राय रखी।

गौरतलब है कि हाल ही में सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM और मायावती की बसपा ने भी राजस्थान के पंचायत और नगर निकाय चुनावों में अपने-अपने उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया है।

'भाजपा को देंगे समर्थन, जरूरत पड़ी तो करेंगे गठबंधन'

जयपुर में पत्रकारों से रूबरू होते हुए अठावले ने पार्टी के मुख्य तौर पर 3 रुख को स्पष्ट किए:

35 जिलों में चुनावी ताल: आरपीआई त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद) के सभी स्तरों पर 35 जिलों में अपने प्रत्याशी मैदान में उतारेगी।

भाजपा से तालमेल: अठावले ने कहा कि केंद्र में एनडीए (NDA) का हिस्सा होने के नाते आरपीआई राजस्थान के पंचायत चुनावों में भाजपा को पूरा समर्थन देगी। जिन सीटों पर जरूरत होगी, वहां भाजपा के साथ आधिकारिक गठबंधन में चुनाव लड़ा जाएगा।

संगठन का विस्तार: उन्होंने कहा कि राजस्थान में पार्टी के आधार को जमीनी स्तर तक ले जाने के लिए यह फैसला लिया गया है, जिससे दलित, शोषित और वंचित वर्ग की आवाज को पंचायती राज संस्थाओं में मजबूती मिल सके।

भूमिहीन गरीबों के लिए उठाई मांग: 'मिले 5-5 एकड़ जमीन'

प्रेसवार्ता के दौरान केंद्रीय मंत्री ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पलायन को लेकर राज्य सरकार के सामने बड़ी मांग रखी। अठावले ने मांग की कि राजस्थान सरकार को गांवों से शहरों की तरफ हो रहे लगातार पलायन को रोकने के लिए ठोस नीतियां बनानी चाहिए।

उन्होंने सिफारिश की कि राज्य के भूमिहीन गरीब परिवारों को जीविकोपार्जन और कृषि कार्यों के लिए 5-5 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वावलंबन को बढ़ावा मिल सके।

राजस्थान के ग्रामीण रण में नए समीकरणों की आहट

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) के 35 जिलों में उम्मीदवार उतारने के फैसले से राज्य के पारंपरिक वोट बैंक समीकरणों में हलचल देखने को मिल सकती है। विशेष रूप से अनुसूचित जाति (SC) और वंचित वर्ग बहुल ग्रामीण क्षेत्रों में आरपीआई की सक्रियता से भाजपा-एनडीए गठबंधन को जमीनी स्तर पर बढ़त मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

जानें RPI (A) के बारे में

रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) को संक्षिप्त में RPI (A) कहा जाता है। यह राजनीतिक दल मुख्य रूप से महाराष्ट्र केंद्रित है जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले हैं। यह पार्टी डॉ. बी.आर. अम्बेडकर द्वारा स्थापित 'शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन' की विरासत और मूल रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के विभाजन से उपजी है। वर्तमान में, राष्ट्रीय स्तर पर यह पार्टी भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा है।

राजस्थान में चुनावी इतिहास

RPI (A) ने राजस्थान में पूर्व में विधानसभा चुनाव लड़े हैं। साल 2023 के राजस्थान विधानसभा चुनावों में पार्टी ने श्रीगंगानगर जिले की सादुलशहर जैसी कुछ सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। हालांकि, पार्टी राज्य में कोई बड़ा चुनावी प्रभाव या सीट जीतने में अब तक असमर्थ रही है।

स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव

पार्टी ने पूर्व में कुछ सीमित स्तरों पर पंचायत चुनावों में उतरने की घोषणाएं की थीं, लेकिन अब पार्टी पहली बार राज्य के पंचायत और नगर निकायों के आगामी चुनावों में संगठित तौर पर बीजेपी के साथ गठबंधन या आपसी तालमेल के तहत अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है।

राजस्थान में जनाधार की स्थिति

राजस्थान की राजनीति में RPI (A) का जमीनी जनाधार और वोट शेयर सीमित और नगण्य रहा है। पार्टी मुख्य रूप से अनुसूचित जाति (SC) और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं के बीच अपनी पैठ बनाने की कोशिश करती है, लेकिन राजस्थान में इस वर्ग का बड़ा वोट बैंक मुख्य रूप से कांग्रेस और भाजपा या स्थानीय स्तर पर बसपा (BSP) के बीच विभाजित रहता है।

रामदास अठावले के अनुसार, पार्टी ने राजस्थान के 35 जिलों में अपनी कार्यकारिणी का गठन किया है और वे निकाय चुनावों के जरिए राज्य में अपने आधार को मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं।

Updated on:
04 Aug 2026 09:14 am
Published on:
04 Aug 2026 09:14 am