जयपुर

Rajasthan BJP : ‘साफा-शॉल-महंगे उपहार नहीं’, राज्यसभा उम्मीदवार डॉ. सतीश पूनिया ने की सार्वजनिक अपील

भाजपा के राज्यसभा उम्मीदवार डॉ. सतीश पूनिया की कार्यकर्ताओं से बड़ी अपील। साफा, शॉल, माला और महंगे उपहारों से किया परहेज। कहा- सम्मान करना है तो किताब दें या गौशाला को दान।

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Jun 10, 2026
Satish Poonia Special Appeal To BJP Workers Books Gaushala Donation Gift Avoid
Image Credit : Dr. Satish Poonia FB Page

राजस्थान की सियासत में अपनी जमीनी पकड़ और सादगीपूर्ण जीवनशैली के लिए पहचाने जाने वाले पूर्व भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया ने एक बार फिर जनता और कार्यकर्ताओं का दिल जीत लिया है। राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए भाजपा के आधिकारिक प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन दाखिल करने के ठीक बाद उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक विशेष वीडियो संदेश साझा किया है। इस वीडियो संदेश के माध्यम से उन्होंने अपने स्वागत-सत्कार की पारंपरिक और राजसी व्यवस्था को पूरी तरह से बदलने का सामाजिक आह्वान किया है। डॉ. सतीश पूनिया ने अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं से भावुक लहजे में अपील की है कि वे उनके स्वागत कार्यक्रमों में होने वाले अनावश्यक आर्थिक खर्चों को पूरी तरह बंद कर उस पैसे को समाज के वंचित, असहाय और मूक पशुओं के कल्याण में लगाएं।

'इस विशेष अपील पर सहयोग करेंगे'

डॉ. सतीश पूनिया ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो पोस्ट करते हुए एक बेहद संक्षिप्त और प्रभावी संदेश भी लिखा। उन्होंने लिखा, "इस विशेष अपील पर आप गौर करेंगे और मेरा सहयोग करेंगे; ऐसा मुझे पूरा भरोसा है।" उनके इस पोस्ट को साझा करते ही राजस्थान भाजपा के कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों के बीच इसकी जबरदस्त चर्चा शुरू हो गई है।

वीडियो में डॉ. सतीश पूनिया ने कहा, "मेरी आप सभी से एक विशेष गुज़ारिश है, कि भविष्य में आयोजित होने वाले किसी भी कार्यक्रम में फूलों के गुलदस्ते, बाजार से खरीदे गए महंगे उपहार, साफा, शॉल और फूलों की भारी मालाएं, मैं इन सभी चीजों से पूरी तरह से परहेज़ रखूंगा। आप सभी से करबद्ध गुज़ारिश है कि यदि आपको मेरा सम्मान करना ही है, तो आप औपचारिकता के लिए केवल एक फूल मुझे दे सकते हैं, मैं उसी में आपका पूरा सम्मान स्वीकार कर लूंगा।"

प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के साथ डॉ पूनिया - File PIC

'सम्मान करना है तो...'

अक्सर राजनैतिक दौरों और रैलियों के दौरान देखा जाता है कि नेताओं के स्वागत में भारी मालाएं और महंगे प्रतीक चिह्न भेंट किए जाते हैं, जो बाद में किसी काम नहीं आते। इस फिजूलखर्ची को रोकने के लिए डॉ. सतीश पूनिया ने एक बहुत ही व्यावहारिक और ज्ञानवर्धक विकल्प कार्यकर्ताओं के सामने रखा है।

पूनिया ने वीडियो में आगे कहा, "और अगर आपको यदि कुछ भेंट करने की बहुत ज्यादा तमन्ना है ही, तो आप किसी महंगे खिलौने या शो-पीस के बजाय मुझे एक अच्छी और पढ़ने योग्य पुस्तक भेंट कर सकते हैं। पुस्तकों से न केवल ज्ञान का आदान-प्रदान होता है बल्कि वह समाज को एक सही दिशा देने का माध्यम बनती हैं। आपके द्वारा दी गई पुस्तकें मेरे लिए किसी भी महंगे उपहार से कई गुना बढ़कर और अमूल्य होंगी।"

डॉ. सतीश पूनिया (पत्रिका फोटो)

'गौशाला को अंशदान देकर मुझे रसीद दें'

सामाजिक सरोकारों और मारवाड़-शेखावाटी अंचल की लोक संस्कृति से गहरे जुड़े होने के कारण डॉ. सतीश पूनिया का यह फैसला मूक गोवंश के प्रति उनकी आस्था को भी प्रदर्शित करता है। उन्होंने अपने समर्थकों के सामने यह अनोखी शर्त रखी है कि जो लोग उनके स्वागत में मोटी रकम खर्च करने की इच्छा रखते हैं, वे उस राशि का सही जगह सदुपयोग करें।

वीडियो संदेश में भाजपा नेता ने कहा, "जो मुझे कोई बड़ा या कीमती तोहफा देने की मन में तमन्ना रखते हैं, उनसे मेरा विशेष आग्रह है कि वे उस राशि को अपने नजदीकी क्षेत्र की किसी भी रजिस्टर्ड गौशाला को अंशदान के रूप में दे दें। जब आप उस गौशाला को आर्थिक मदद देकर उसकी रसीद लाकर मुझे सौंपेंगे, तो मुझे जो आत्मिक खुशी होगी, उसकी तुलना किसी भौतिक उपहार से नहीं की जा सकती। गौवंश की सेवा ही मेरी सबसे बड़ी इच्छा है।"

'दिव्यांगों की मदद, अनाथों को आश्रय, गरीब विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति'

अपने इस मानवतावादी संदेश को और आगे बढ़ाते हुए डॉ. सतीश पूनिया ने समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े शोषित, वंचित और बेसहारा लोगों के कल्याण को अपनी इस अपील का मुख्य केंद्र बिंदु बनाया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को मालाओं के बजाय सेवा कार्यों में जुटने की नसीहत दी है।

पूनिया ने भावुक अपील करते हुए कहा, "यदि आप समाज के किसी भी दिव्यांग व्यक्ति की मदद कर उसकी जिंदगी को थोड़ा सा भी सहूलियत भरा बनाने के लिए कोई काम करेंगे, तो मुझे बेहद खुशी होगी। यदि आप अपने सामर्थ्य के अनुसार किसी भी अनाथ आश्रम को गोद लेकर वहां रहने वाले बेसहारा बच्चों के पोषण और उनकी बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति का जिम्मा उठाएंगे, तो मुझे परम आनंद की अनुभूति होगी।"

पूनिया ने कहा, "इसी तरीके से यदि आप अपने आस-पास रहने वाले किसी गरीब या मेधावी विद्यार्थी को आर्थिक संकट के कारण पढ़ाई छोड़ने से बचाने के लिए उसे छात्रवृत्ति देकर आगे पढ़ाने की कवायद करेंगे, तो वह मेरे लिए सबसे बड़ा और वास्तविक सम्मान होगा।"

Updated on:
10 Jun 2026 12:06 pm
Published on:
10 Jun 2026 10:51 am