School Exam Result 2026: शाला दर्पण पर अंक प्रविष्टि के निर्देश जारी, शिक्षकों को सख्त समयसीमा। शिक्षा विभाग अलर्ट मोड पर, परिणाम प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने पर जोर।
shala darpan news: जयपुर। राजस्थान के सरकारी स्कूलों में वार्षिक परीक्षा परिणाम को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। शिक्षा विभाग ने शाला दर्पण पोर्टल पर विद्यार्थियों के अंक दर्ज करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। विभाग के अनुसार कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम 25 मार्च को जारी किया जाएगा, जिसके लिए सभी स्कूलों को समयबद्ध तरीके से अंक अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं।
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी शिक्षकों और संस्था प्रधानों को निर्धारित समय सीमा के भीतर अंक प्रविष्टि सुनिश्चित करनी होगी, ताकि परिणाम समय पर जारी किया जा सके। अंक प्रविष्टि की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन शाला दर्पण पोर्टल के माध्यम से की जा रही है, जिससे पारदर्शिता और सटीकता बनी रहे। विभाग ने यह भी निर्देश दिए हैं कि किसी भी प्रकार की त्रुटि से बचने के लिए अंक दर्ज करते समय विशेष सावधानी बरती जाए।
जानकारी के अनुसार कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों का मूल्यांकन सतत एवं समग्र मूल्यांकन (CCE) पद्धति के आधार पर किया गया है, जबकि कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों के लिए लिखित परीक्षा के साथ आंतरिक मूल्यांकन को भी शामिल किया गया है। शिक्षकों को सभी विषयों के अंक निर्धारित प्रारूप में दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी विद्यार्थी के अंक दर्ज नहीं किए जाते हैं या किसी प्रकार की त्रुटि पाई जाती है, तो संबंधित स्कूल और शिक्षक जिम्मेदार होंगे। ऐसे मामलों में विभाग द्वारा कार्रवाई भी की जा सकती है। इसलिए सभी विद्यालयों को गंभीरता से कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस बार परिणाम प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए विशेष निगरानी रखी जा रही है। जिला स्तर पर भी अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है कि वे स्कूलों से नियमित रूप से प्रगति रिपोर्ट प्राप्त करें और किसी भी समस्या का तुरंत समाधान करें।
अभिभावकों और विद्यार्थियों में भी परिणाम को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। विभाग का प्रयास है कि बिना किसी देरी के निर्धारित तिथि पर परिणाम घोषित कर दिया जाए, ताकि अगले शैक्षणिक सत्र की प्रक्रिया भी समय पर शुरू हो सके।