जयपुर

Jaipur: SMS अस्पताल में पहली बार पीडियाट्रिक लिवर ट्रांसप्लांट, 9 साल की बच्ची के लिवर से किशोर को मिला जीवन

एसएमएस अस्पताल में पहली बार सफल पीडियाट्रिक लिवर ट्रांसप्लांट किया गया। एम्स जोधपुर से ग्रीन कॉरिडोर के जरिए 9 वर्षीय बच्ची का लिवर जयपुर लाया गया। इसके बाद इस लिवर का 14 वर्षीय किशोर में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण किया गया।
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Aug 31, 2026
SMS Hospital
SMS अस्पताल व इनसेट में 9 वर्षीय बच्ची अंजलि। फोटो: पत्रिका

जयपुर। एसएमएस अस्पताल में पहली बार सफल पीडियाट्रिक लिवर ट्रांसप्लांट किया गया। एम्स जोधपुर से ग्रीन कॉरिडोर के जरिए 9 वर्षीय बच्ची का लिवर जयपुर लाया गया। इसके बाद इस लिवर का 14 वर्षीय किशोर में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण किया गया। डोनर 9 वर्षीय बच्ची थी, जो सड़क हादसे के बाद से ब्रेन डेड थी। उसके परिवार ने दुख की घड़ी में अंगदान का निर्णय लिया।

जोधपुर से जयपुर तक लिवर को जल्द और सुरक्षित पहुंचाने के लिए पुलिस और प्रशासन के सहयोग से ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। यह जटिल प्रत्यारोपण प्रक्रिया एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी और एसएमएस अस्पताल के अधीक्षक डॉ. मृणाल जोशी के मार्गदर्शन और देखरेख में पूरी हुई। ऑपरेशन में ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. दिनेश भारती और डॉ. आशुतोष पंचोली सहित एनेस्थीसिया, सर्जरी, रेडियोलॉजी और इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ शामिल रहे।

बता दें कि बालोतरा के पचपदरा की अंजलि को ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद उसके माता-पिता ने अंगदान की सहमति दी। इससे तीन गंभीर मरीजों को नया जीवन मिलने का रास्ता खुल गया। अंजलि 19 अगस्त को स्कूल से घर लौट रही थी। सड़क पार करते समय तेज रफ्तार बोलेरो कैंपर ने उसे टक्कर मार दी। गंभीर हालत में उसे एम्स जोधपुर में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों के प्रयास के बावजूद हालत में सुधार नहीं हुआ और 27 अगस्त को उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। अंजलि पचपदरा के निजी स्कूल में कक्षा पांचवीं में पढ़ती थी।

एक किडनी जोधपुर, दूसरी व लिवर जयपुर भेजे

अंगदान के महत्व की जानकारी मिलने के बाद पिता अशोक दास और मां कंचन ने बेटी के अंगदान की सहमति दी। शनिवार को एम्स जोधपुर में अंग निकालने की प्रक्रिया पूरी की गई। सोटो जयपुर की अंग आवंटन नीति के तहत एक किडनी एम्स जोधपुर में प्रत्यारोपित की जाएगी, जबकि दूसरी किडनी और लिवर ग्रीन कॉरिडोर से एसएमएस अस्पताल जयपुर भेजे गए।

देह सौंपी तो पिता हो गए भावुक

अंजलि के पिता अशोक दास रिफाइनरी में बस चालक हैं और मां कंचन गृहिणी हैं। शादी के 15 वर्ष बाद मन्नतों से परिवार में बेटे सवाई का जन्म हुआ था। उसके बाद अंजलि परिवार की खुशियों का हिस्सा बनी। बेटी की असमय मौत से परिवार टूट गया, लेकिन इसी दुख के बीच माता-पिता ने दूसरों की जिंदगी बचाने का फैसला किया। अंगदान के बाद जब अंजलि की देह परिजनों को सौंपी गई तो पिता और परिजन भावुक हो गए। अस्पताल के स्टाफ ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।

Updated on:
31 Aug 2026 07:41 am
Published on:
31 Aug 2026 07:41 am