
जयपुर।
केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए राजस्थान समेत चार राज्यों में पेटकोक और फर्नेस ऑयल के उपयोग पर रोक लगा दी है। इसके चलते प्रदेश के सीमेन्ट उïद्योग, चूने के भट्टों पर ताला लगने की नौबत आ गई है। वहीं थर्मल पावर प्लांट में बिजली उत्पादन भी ठप हो सकता है। उधर, राज्य सरकार ने केन्द्र से इस रोक को हटाने की मांग की है। जबकि, बजरी खनन पर पहले से ही रोक है। बजरी नहीं आने और बची बजरी के मनमाने दाम वसूलने के हालात से आशियाना बनाने की उम्मीद टूटती जा रही है। इसका साइड इफ़ेक्ट यह है कि लोगों को घर बनाना महंगा हो गया। राजधानी जयपुर के कई बड़े प्रोजेक्ट का काम थमने लगा है।
सुप्रीम कोर्ट व एनजीटी की सख्ती
दिल्ली और एनसीआर में गत दिनों हुए प्रदूषण के बाद सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी की सख्ती के बाद केन्द्र ने बड़ा कदम उठाया। इसके तहत राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पेटकोक और फर्नेस ऑयल के उपयोग पर रोक लगा दी। ऐसे में पेटकोक को ईंधन के रूप में उपयोग करने वाले सीमेन्ट उद्योग पर संकट के बादल छा गए हैं। इसके अलावा जयपुर, जोधपुर समेत प्रदेश में बड़ी संख्या में चूने के भट्टे पेटकोक से संचालित होते हैं। इसके अलावा पेटकोक का उपयोग करने वाली टैक्सटाइल और अन्य फैक्ट्रियों पर भी ताला लगना तय हो गया है। राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने केन्द्र के आदेश की पालना में सभी पेट्रोकोक आपूर्तिकर्ताओं को प्रदेश में आपूर्ति तत्काल रोकने के नोटिस जारी कर दिए हैं।
लाखों रोजगार पर संकट
राजस्थान में देश का करीब 12 फ़ीसदी लाइम स्टोन निकलता है। इसकी गुणवत्ता भी अच्छी है। ऐसे में देश की लगभग सभी प्रमुख सीमेन्ट निर्माता कंपनियों के प्लांट्स राजस्थान में स्थापित हुए हैं। इनसे लाखों लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार मिला हुआ है। उद्योग के साथ लाखों लोगों के रोजगार पर संकट आ सकता है।
अमरीका से आता है, लेकिन कोयले से सस्ता
सूत्रों ने बताया कि ऑयल रिफाइनरी का बायप्रोडक्ट पेटकोक है। इसे उद्योगों में ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है। यह कोयले की तुलना में करीब 25 से 30 फ़ीसदी तक सस्ता भी होता है। भारत में अधिकांश पेटकोक की आपूर्ति अमरीका से होती है। भारत में 2013 तक इसका आयात करीब 78 लाख टन था, जो अब बढ़कर 3 करोड़ टन तक पहुंच गया है।
-प्रदेश में सल्फर नहीं पीएम बढ़ा हुआ
राज्य सरकार ने केन्द्र के समक्ष कहा कि पेटकोक पर रोक हटनी चाहिए। पेटकोक से वातावरण में सल्फ र की मात्रा अधिक हो जाती है। जबकि प्रदेश में सल्फर की मात्रा कहीं पर तय मानक से अधिक नहीं देखने को मिली है। वहीं इसके रोक लगने के बाद कोयले का उपयोग शुरू किया गया तो पीएम का स्तर और अधिक बढ़ जाएगा।
-प्राकृतिक गैस का उपयोग कम
प्रदेश में प्रदूषण नियंत्रण के लिए औद्योगिक इकाइयों में प्राकृतिक गैस के उपयोग को बढ़ावा देना था, लेकिन प्रदेश में इसकी दर अधिक होने के साथ नेटवर्क का अभाव है।
जनता परेशान, कारीगर भी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बजरी खनन पर रोक लगी हुई है। बनास से बजरी नही आ रही है। जिसके पास बची है, वह मनमाने दाम पर बेच रहे हैं। अकेले राजधानी में आशियानों के सैकड़ों प्रोजेक्ट अटक गए हैं। इनमें वे लोग भी शामिल है, जिन्होंने काम तो शुरू कर दिया, लेकिन बीच में रोकना पड़ा।
-फैक्ट फाइल-
कुल सीमेन्ट प्लांट्स-22 से अधिक
थर्मल पावर प्लांट-7
लाइम स्टोन का उत्पादन-12 फीसदी देश का राजस्थान में
अनुमानित रोजगार-लाखों (प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष)
वर्जन...
पेटकोक पर रोक लगाने के आदेश केन्द्र सरकार से मिले हैं। प्रदेश में सल्फ र की समस्या नहीं है। ऐसे में केन्द्र से इस पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया गया है।
-एन.सी.गोयल, अतिरिक्त मुख्य सचिव वन एवं पर्यावरण