जयपुर

अरावली हिल्स पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम: वागड़ आ रही हाई पावर्ड कमेटी, डूंगरपुर और बांसवाड़ा में करेगी जांच

अरावली पर्वतमाला के संरक्षण और परिभाषा की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई-पावर्ड कमेटी फिर राजस्थान के दौरे पर है। 11 से 13 अक्टूबर तक कमेटी वागड़ के डूंगरपुर (पालदेवल-सरकन) और बांसवाड़ा (केवड़िया-कोठारा) का दौरा करेगी। इस दौरान खनन, जंगल, भूमि उपयोग और स्थानीय आदिवासियों की आजीविका के जमीनी तथ्यों का आकलन कर 30 नवंबर तक रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
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Oct 09, 2026
inspect aravalli hills
बांसवाड़ा के पालोदा स्थित अरावली पहाड़ी में होता खनन (पत्रिका फोटो)

Aravalli Hills Supreme Court: जयपुर: अरावली हिल्स और रेंज की परिभाषा, पारिस्थितिक स्थिति और संरक्षण से जुड़े मामलों की पड़ताल के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित हाई-पावर्ड कमेटी (एचपीसी) एक बार फिर राजस्थान के दौरे पर आ रही है। गुजरात के अरावली क्षेत्र का दौरा करने के बाद कमेटी 11 से 13 अक्टूबर तक डूंगरपुर और बांसवाड़ा में रहेगी। इस बार फोकस वागड़ के उन इलाकों पर है, जहां पहाड़ियों, जंगल, खनन और स्थानीय लोगों, खासकर आदिवासी समुदायों की आजीविका के बीच सीधा संबंध है।

क्यों बनी कमेटी

सुप्रीम कोर्ट ने 25 मई, 2026 के आदेश में आइसीएफआरई के महानिदेशक की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय एचपीसी गठित की थी। इसका मकसद पहले तैयार की गई अरावली की परिभाषा और उसके आधार पर होने वाले सीमांकन का स्वतंत्र और विशेषज्ञ मूल्यांकन करना है।

दोनों जिलों में सरकार ने लगाया पूरा प्रशासन

कमेटी के दौरे को लेकर राज्य सरकार ने भी संबंधित अधिकारियों को लगाया है। वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी को फील्ड कोऑर्डिनेटर के रूप में नियुक्त किया जाएगा, जबकि डूंगरपुर और बांसवाड़ा के उप वन संरक्षक और फील्ड स्टाफ कमेटी के साथ रहेंगे।

रिपोर्ट पेश करेगी कमेटी

कमेटी पहले भी राजस्थान के पांच दिवसीय दौरे पर आ चुकी है। उस दौरान विभिन्न स्थानों पर फील्ड विजिट और हितधारकों से संवाद किया गया था, लेकिन सभी संबंधित पक्षों, विशेषकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के लोगों की पर्याप्त भागीदारी नहीं होने की बात सामने आई थी। इसके बाद राजस्थान के दक्षिणी हिस्से में दोबारा जमीनी पड़ताल और स्थानीय लोगों से सीधे संवाद की मांग उठी। सुप्रीम कोर्ट ने भी 7 सितंबर के आदेश में स्पष्ट किया कि कमेटी को राजस्थान और गुजरात के आदिवासी समुदायों समेत सभी संबंधित हितधारकों को अपनी बात रखने का उचित अवसर देना होगा। कोर्ट ने कमेटी को 30 नवंबर, 2026 तक व्यापक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

जमीनी तथ्य जुटाकर तैयार होगी रिपोर्ट

राजस्थान के इस दौरे में कमेटी चयनित स्थलों पर खनन, क्वारी, स्टोन क्रशर, भूमि उपयोग, वन क्षेत्र, जलस्रोत और आसपास के पर्यावरणीय परिदृश्य का आकलन करेगी। जिलों में शाम को होने वाली बैठकों में पर्यावरणविदों, विशेषज्ञों, खनन पट्टाधारकों, ग्रामीणों, किसानों, श्रमिकों और आदिवासी समुदायों समेत अन्य हितधारकों से सुझाव लिए जाएंगे।

11 को डूंगरपुर और 12 को बांसवाड़ा

हाई-पावर्ड कमेटी (एचपीसी) 8 से 10 अक्टूबर तक गुजरात के अरावली क्षेत्रों का दौरा करेगी। 11 अक्टूबर को दक्षिणी राजस्थान में प्रवेश के बाद डूंगरपुर जिले के पालदेवल-सरकन क्षेत्र में फील्ड विजिट होगी। इसके बाद 12 अक्टूबर को बांसवाड़ा जिले के केवड़िया-कोठारा क्षेत्र में पड़ताल की जाएगी। शाम को संबंधित हितधारकों से संवाद होगा। दोनों दिन शाम को करीब तीन घंटे तक स्थानीय लोगों और अन्य हितधारकों के साथ व्यापक चर्चा होगी।

Updated on:
09 Oct 2026 10:36 am
Published on:
09 Oct 2026 10:19 am
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