जयपुर

Rajasthan: शाही ट्रेन पैलेस ऑन व्हील्स में कम हो रहे सैलानी… जानिए वजह और क्या है आगे का सफ़र

राजस्थान की प्रमुख हैरिटेज पर्यटक ट्रेन 'पैलेस ऑन व्हील्स' में सफर करने वाले यात्रियों की संख्या में लगातार गिरावट हो रही है। यात्रियों की संख्या में 50 फीसदी से ज्यादा की गिरावट अब चिंता का विषय बन गई है।

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Aug 05, 2025
शाही ट्रेन पैलेस ऑन व्हील्स में कम हो रहे सैलानी, पत्रिका फोटो

राजस्थान की प्रमुख हैरिटेज पर्यटक ट्रेन 'पैलेस ऑन व्हील्स' में सफर करने वाले यात्रियों की संख्या में लगातार गिरावट हो रही है। यात्रियों की संख्या में 50 फीसदी से ज्यादा की गिरावट अब चिंता का विषय बन गई है। वहीं ट्रेन ऑपरेशन में शामिल निजी कंपनियों और आरटीडीसी के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर खींचतान की खबरें भी सामने आने लगी हैं। राजस्थान पर्यटन विकास निगम- आरटीडीसी की समीक्षा बैठक में वर्ष 2023- 24 में ट्रेन परिचालन से जुड़ी निजी कंपनी पर अनुबंध संबंधी उल्लंघन के मुद्दे को गंभीर माना है।

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लगातार कम हो रहे यात्री

लग्जरी ट्रेन पैलेस ऑन व्हील्स में पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में यात्रा करने वाले पर्यटकों की संख्या एक साल पहले की तुलना में घट गई है। आरटीडीसी से जुड़े जानकारों की मानें तो एक साल पहले के ट्रेन में यात्रा करने वाले यात्रियों की तुलना में आकंड़ा कम हो गया है। हालांकि पिछले दो वित्तीय वर्ष 2019 और 2020 में यह आकंड़ा 50 फीसदी से भी कम दर्ज हो चुका है।

आरटीडीसी की ढिलाई भी कारण

आरटीडीसी से मिली जानकारी के अनुसार निजी कंपनी की ओर से जीएसटी जमा कराने में हुई देरी के लिए खुद आरटीडीसी की ढिलाई भी जिम्मेदार है। निजी कंपनी ने आरटीडीसी के एमडी को लिखे एक पत्र में कहा है कि जीएसटी एक विवाद है जिसका समाधान किया जाना आवश्यक है। आरटीडीसी की समीक्षा बैठक में ट्रेन के परिचालन और प्रदर्शन को लेकर मंथन हुआ। वहीं निजी कंपनी की ओर से कई अनुबंधों के उल्लंघन भी सामने आए हैं, जिनके लिए निगम भी समान रूप से जिम्मेदार है। संचालन और प्रबंधन कंपनी और आरटीडीसी के बीच मुख्य विवाद का मुद्दा ट्रेन के टिकट बुक करने वाले एजेंटों को दी जाने वाली छूट बताया जा रहा है।

भुगतान में देरी का आरोप

आरटीडीसी के अनुसार वर्ष 2023-24 में पैलेस ऑन व्हील्स ट्रेन के संचालन और प्रबंधन का जिम्मा एक निजी कंपनी को पट्टे पर दिया गया था, जिसका वार्षिक शुल्क 5 करोड़ रुपये था और राजस्व पर 18 फीसदी अतिरिक्त था। आरटीडीसी अधिकारियों का कहना है कि निजी कंपनी भुगतान में देरी कर रही है। बताया जा रहा है कि निजी कंपनी ने कुछ दिन पूर्व ही वार्षिक शुल्क का भुगतान किया है। लेकिन अभी तक जीएसटी जमा नहीं किया है।

तय से ज्यादा छूट, निगम को चूना

जानकारों की मानें तो ट्रेन परिचालन कर ही निजी फर्म के मनमाने रवैये के चलते टिकट बिक्री एजेंटों को करीब 40 फीसदी तक की छूट दी गई, जो समझौते में निर्धारित दर से ज्यादा है। ऐसे में छूट ज्यादा होने से आरटीडीसी को राजस्व का बड़ा नुकसान हो रहा है। दूसरी तरफ निगम की ओर से निजी फर्म पर ट्रेन में स्पा और जिम के लिए जगह को नवीनीकरण के नाम पर कम करने पर अनुबंध के उल्लंघन का आरोप लगाया है। आरटीडीसी ने ​निजी फर्म पर बिना मंजूरी गंतव्य स्थान परिवर्तन करने का भी आरोप लगाया है।

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Published on:
05 Aug 2025 01:47 pm
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