जयपुर में पर्यटन सीजन शुरू होने से रणथम्भौर, सरिस्का, झालाना-आमागढ़ समेत अन्य जंगलों में संचालित सफारी में सैलानियों की अच्छी-खासी रौनक देखी जा रही है। वहीं, राजधानी की तीसरी लेपर्ड सफारी बीड़ पापड़ के जंगल में सैलानियों के नहीं आने से सन्नाटा पसरा पड़ा है।
Beed Papad Leopard Safari: जयपुर में पर्यटन सीजन शुरू होने से रणथम्भौर, सरिस्का, झालाना-आमागढ़ समेत अन्य जंगलों में संचालित सफारी में सैलानियों की अच्छी-खासी रौनक देखी जा रही है। वहीं, राजधानी की तीसरी लेपर्ड सफारी बीड़ पापड़ के जंगल में सैलानियों के नहीं आने से सन्नाटा पसरा पड़ा है। इसकी वजह प्रचार-प्रसार व ऑनलाइन बुकिंग प्रक्रिया शुरू नहीं होना बताया जा रहा है। ऐसे में नई सौगात शुरुआत में ही दम तोड़ती नजर आ रही है।
दरअसल, विद्याधरनगर से सटे बीड़ पापड़ के जंगल में 22 वर्ग किमी क्षेत्र में वन विभाग ने आधी अधूरी तैयारी के साथ 5 जून को लेपर्ड सफारी शुरू की थी। उसे भी झालाना और आमागढ़ की तरह पर्यटन का नया आकर्षण बनाने की योजना थी, लेकिन अभी तक अव्यवस्थाओं से जूझ रही है। चार माह बाद भी अभी तक इसका ऑनलाइन टिकट बुकिंग सिस्टम तैयार नहीं हुआ है। जिससे पर्यटक वेबसाइट या ऐप पर बुकिंग नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में सीमित ऑफलाइन बुकिंग के कारण सप्ताहभर में नाम मात्र के ही सफारी वाहन जंगल में जा पा रहे हैं। वहीं विभागीय अफसर भी इस सफारी के प्रचार-प्रसार में कोई खास रुचि नहीं दिखा रहे हैं। मामले में वन अधिकारियों का कहना है कि फाइल प्रक्रिया में है, जल्द ही ऑनलाइन बुकिंग शुरू हो जाएगी।
इधर, जयपुर की झालाना सफारी में रोजाना सभी स्लॉट फुल चल रहे हैं। आगामी दिनों में पर्यटकों की संख्या और बढ़ने की संभावना अधिकारियों ने जताई है। सैलानी झालाना सफारी के लिए अग्रिम बुकिंग भी करवा रहे हैं। जबकि बीड़ पापाड़ के जंगल में बीते 5 जून को शुरू हुई तीसरी लेपर्ड सफारी से फिलहाल सैलानी दूरी बना रहे हैं।
झालाना से सटे आमागढ़ जंगल में इन दिनों अच्छी साइटिंग हो रही है। जिससे पर्यटकों की संख्या भी बढ़ी है। वीकेंड पर दोनों पारी के स्लॉट फुल बताए जा रहे हैं। सामान्य दिनों में भी अच्छी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। दिवाली से नए साल तक ऐसा ही माहौल देखे जाने की उम्मीद है। इधर, नाहरगढ़ जैविक उद्यान में संचालित लॉयन व टाइगर सफारी, पार्क व हाथीगांव में भी इन दिनों बड़ी संख्या में पर्यटक आ रहे हैं।