जयपुर

Vishvendra Singh Resign: क्या कांग्रेस से निकाले जाने से पहले इस्तीफा देकर निकले विश्वेन्द्र सिंह? जानें इनसाइड स्टोरी

Rajasthan Congress Latest Update : पिछले कुछ दिनों से विश्वेंद्र सिंह की ओर से लगातार पार्टी विरोधी बयानबाजी और स्थानीय नेतृत्व पर उठाए जा रहे सवालों की शिकायतें लगातार दिल्ली तक पहुंच रही थीं। चर्चाएं थीं कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी चल रही थी।
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Oct 02, 2026
vishvendra singh resigns from congress rajasthan political crisis
Vishvendra Singh Resigns Congress - File PIC

राजस्थान के राजनीतिक गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौकाने वाली खबर है। ग्रामीण अंचलों में होने वाले पंचायत राज चुनावों से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी कलह खुलकर सड़क पर आ गई है। राज्य के कद्दावर नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने पार्टी के प्रदेश नेतृत्व से चल रहे लंबे गतिरोध और मतभेदों के बीच गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर को कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से अपना इस्तीफा सौंप दिया है। कई दशकों तक 'हाथ' का दामन थामे रहने वाले और मारवाड़-ब्रज क्षेत्र के एक बड़े राजनीतिक चेहरे के रूप में पहचाने जाने वाले विश्वेंद्र सिंह के इस अचानक आए इस्तीफे से राज्य की राजनीतिक हलकों में भूचाल सा आ गया है, और इसे पंचायत चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

अपने इस्तीफे के पीछे की वजहों को स्पष्ट करते हुए विश्वेंद्र सिंह ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और स्थानीय संगठन की कार्यशैली पर बेहद गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने खुलकर अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि उन्होंने जीवन भर अपने इष्ट और अंतरात्मा की आवाज सुनकर फैसले लिए हैं, लेकिन वर्तमान समय में पार्टी के भीतर जिस तरह की चापलूसी की संस्कृति पनप रही है और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है, उससे उनका अंतर्मन बेहद व्यथित और आहत है।

पिछले कुछ दिनों से भरतपुर और डीग जिलों के स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन और टिकट वितरण को लेकर चल रही बयानबाजी के बाद से ही विश्वेंद्र सिंह और प्रदेश संगठन के बीच दूरियां काफी बढ़ गई थीं, जो अब इस बड़े अलगाव के रूप में सामने आई हैं।

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हालांकि, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और कुछ लोग बाहर से प्रायोजित बयानों के जरिए भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।

इस्तीफे के पत्र में छलका दर्द

कांग्रेस अध्यक्ष को भेजे गए अपने त्यागपत्र में विश्वेंद्र सिंह ने तीखे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए पार्टी की मौजूदा कार्यसंस्कृति पर कड़े प्रहार किए हैं। उन्होंने पत्र में लिखा कि जिस पार्टी के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन न्यौछावर कर दिया, यदि आज उसी पार्टी में निष्ठा, ईमानदारी और कर्तव्यपरायणता का यह सिला मिलता है, तो वह अंदर से पूरी तरह हिल गए हैं।

उन्होंने अपने संदेश में साफ तौर पर लिखा कि उनके सार्वजनिक जीवन का हर कतरा उनके मतदाताओं, क्षेत्रवासियों और प्रदेश के मेहनतकश कार्यकर्ताओं के लिए समर्पित रहा है। विश्वेंद्र सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि यदि सच को सच कहना और गलत का साथ न देना गुनाह है, तो वह इस उसूल पर हमेशा कायम रहेंगे।

उन्होंने अपने त्यागपत्र में लिखा, "ऐसी परिस्थिति में घुटन से घुट-घुट कर मरने के बजाय स्वाभिमान की मौत मरना बेहतर है। मेरे पुरखों ने कभी ऐसी चीजों से समझौता नहीं किया, और उनका अनुसरण करते हुए मैं भी आपको अलविदा कहने में ही अपनी भलाई समझता हूं।"

ये लिखा इस्तीफे की पोस्ट में

''आदरणीय अध्यक्ष महोदय,मैंने जीवन मे हमेशा मेरे इष्ट गिरिराज महाराज और अंतरात्मा की आवाज़ सुन कर ही फैसला लिया है आज कुछ छुटभैये तथाकथित नेताओं ने जो अनर्गल बयान दिए हैं उस से मेरे कार्यकर्ताओं में आक्रोश है,मेरा भी अन्तर मन दुखी और व्यथित है जिस पार्टी के लिए मैंने मेरा जीवन न्यौछावर कर दिया आज उसी पार्टी ने यदि मेरी निष्ठा, ईमानदारी, कर्तव्य परायणता का यह सिला दिया तो मैं अंदर से बहुत हिल गया हूं,मैंने हमेशा मान, सम्मान और स्वाभिमान से जीवन जिया है मेरे उसूल और आदर्शों से कभी कोई समझौता नहीं किया,मेरे कार्यकर्ताओं में मौजूदा चापलूसी की परंपरा के कारण आक्रोश है,यदि सच को सच कहना, गलत और झूंठ का साथ नहीं देना पाप है तो मैं इसको हर बार करूंगा,मैं ना गलत करता हूं न ही गलत सहन करता हूं,मेरा सार्वजनिक जीवन जनता जनार्दन की देन है,मैं इनके लिए ही जीता हूं और इनके लिए ही मरूंगा,मेरे खून का हर कतरा मेरे कार्यकर्ताओं,मेरे मतदाताओं, मेरे क्षेत्र वासियों, प्रदेश वासियों के लिए बहा है,और बहेगा,मेरा सार्वजनिक जीवन खुली किताब है, बेदाग है,मैंने मेरे दामन पर कभी दाग न तो लगने दिया और ना ही लगने दूँगा,ऐसी परिस्थिति में दम घुटने से मरने के बजाय स्वाभिमान की मौत मरना बेहतर है,मेरे पुरखों ने कभी ऐसी चीजों से कभी समझौता नहीं किया उनका अनुसरण करते हुए मैं भी आपको अलविदा कहने में ही अपनी भलाई समझता हूं,मैं शायद अब आपकी गलत रीति नीति के साथ कदमताल नहीं कर पाउंगा!'' गिरिराज महाराज की जय, जय हिंद, जय भारत

निष्कासन की सुगबुगाहट और दिल्ली तक रिपोर्ट

विश्वेंद्र सिंह के इस इस्तीफे से ठीक पहले राजनीतिक गलियारों में इस बात की तेज चर्चाएं थीं कि प्रदेश कांग्रेस स्तर से उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी चल रही थी। सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से उनकी लगातार पार्टी विरोधी बयानबाजी और स्थानीय नेतृत्व पर उठाए जा रहे सवालों की शिकायतें लगातार दिल्ली तक पहुंच रही थीं। भरतपुर और डीग जिलों के जिला अध्यक्षों की ओर से भी प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी गई थी, जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि पार्टी के भीतर रहकर संगठन को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

यह भी चर्चा थी कि पार्टी नेतृत्व उन्हें अनुशासनहीनता के आधार पर निष्कासित करने का मन बना चुका था, लेकिन औपचारिक कार्रवाई गाज गिरने से पहले ही 'राजा जी' के नाम से मशहूर विश्वेंद्र सिंह ने खुद आगे बढ़कर इस्तीफा देने का बड़ा राजनीतिक दांव चल दिया

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अपनी ही पार्टी के 'चीफ' पर सीधा निशाना

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पंचायत राज चुनावों से पहले कांग्रेस को झटका!

राजस्थान में एक तरफ जहां बीजेपी निकाय चुनावों में मिली जीत के बाद 'मिशन पंचायत' के तहत ग्रामीण इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के भीतर इस प्रकार की बगावत और दिग्गजों का पार्टी छोड़ना चुनावी समीकरणों को पूरी तरह प्रभावित कर सकता है।

पूर्वी राजस्थान और भरतपुर-डीग बेल्ट में विश्वेंद्र सिंह का अपना एक मजबूत व्यक्तिगत प्रभाव और जनाधार रहा है। ऐसे में, पंचायत राज चुनावों के मुहाने पर खड़े राजस्थान में कांग्रेस नेतृत्व के सामने इस आंतरिक कलह को थामना और रूठे हुए नेताओं को मनाना एक बहुत बड़ी चुनौती साबित होगा। आने वाले दिनों में देखना यह होगा कि विश्वेंद्र सिंह अपने अगले राजनीतिक कदम के रूप में क्या फैसला लेते हैं और इसका असर ग्रामीण चुनावों पर कितना गहरा पड़ता है।

Updated on:
02 Oct 2026 10:19 am
Published on:
02 Oct 2026 10:12 am