
Vishvendra Singh and Govind Singh Dotasra - File PIC
राजस्थान की सियासत में इन दिनों भूचाल आया हुआ है, जहां एक तरफ निकाय चुनावों के बाद कांग्रेस पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ रहा है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। सोशल मीडिया के माध्यम से अपने 'मन की बात' साझा करते हुए विश्वेंद्र सिंह ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (PCC चीफ) गोविंद सिंह डोटासरा की कार्यप्रणाली और पार्टी की वर्तमान दशा पर बेहद तीखे सवाल खड़े किए हैं। सिंह ने अपने त्यागपत्र में साफ शब्दों में कहा है कि पार्टी में व्याप्त चापलूसी की परंपरा और गलत नीतियों के कारण उनका दम घुट रहा था, और ऐसे माहौल में घुट-घुट कर जीने के बजाय स्वाभिमान के साथ अलग होना बेहतर है।
अपने त्यागपत्र में विश्वेंद्र सिंह ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए लिखा कि उन्होंने हमेशा अपने इष्ट और अंतरात्मा की आवाज सुनकर फैसले लिए हैं। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया, यदि आज वही पार्टी उनकी निष्ठा, ईमानदारी और कर्तव्यपरायणता का यह सिला दे रही है, तो उनका अंतरमन अंदर से बुरी तरह व्यथित है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज पार्टी में चापलूसी की परंपरा हावी हो चुकी है, और यदि सच को सच कहना तथा झूठ का साथ नहीं देना पाप है, तो वे इस पाप को बार-बार करेंगे। सिंह ने स्पष्ट किया कि उनके पुरखों ने कभी भी गलत चीजों से समझौता नहीं किया, और उन्हीं का अनुसरण करते हुए वे पार्टी नेतृत्व को अलविदा कह रहे हैं क्योंकि वे इस गलत रीति-नीति के साथ अब और कदमताल नहीं कर पाएंगे।
''आदरणीय अध्यक्ष महोदय,मैंने जीवन मे हमेशा मेरे इष्ट गिरिराज महाराज और अंतरात्मा की आवाज़ सुन कर ही फैसला लिया है आज कुछ छुटभैये तथाकथित नेताओं ने जो अनर्गल बयान दिए हैं उस से मेरे कार्यकर्ताओं में आक्रोश है,मेरा भी अन्तर मन दुखी और व्यथित है जिस पार्टी के लिए मैंने मेरा जीवन न्यौछावर कर दिया आज उसी पार्टी ने यदि मेरी निष्ठा, ईमानदारी, कर्तव्य परायणता का यह सिला दिया तो मैं अंदर से बहुत हिल गया हूं,मैंने हमेशा मान, सम्मान और स्वाभिमान से जीवन जिया है मेरे उसूल और आदर्शों से कभी कोई समझौता नहीं किया,मेरे कार्यकर्ताओं में मौजूदा चापलूसी की परंपरा के कारण आक्रोश है,यदि सच को सच कहना, गलत और झूंठ का साथ नहीं देना पाप है तो मैं इसको हर बार करूंगा,मैं ना गलत करता हूं न ही गलत सहन करता हूं,मेरा सार्वजनिक जीवन जनता जनार्दन की देन है,मैं इनके लिए ही जीता हूं और इनके लिए ही मरूंगा,मेरे खून का हर कतरा मेरे कार्यकर्ताओं,मेरे मतदाताओं, मेरे क्षेत्र वासियों, प्रदेश वासियों के लिए बहा है,और बहेगा,मेरा सार्वजनिक जीवन खुली किताब है, बेदाग है,मैंने मेरे दामन पर कभी दाग न तो लगने दिया और ना ही लगने दूँगा,ऐसी परिस्थिति में दम घुटने से मरने के बजाय स्वाभिमान की मौत मरना बेहतर है,मेरे पुरखों ने कभी ऐसी चीजों से कभी समझौता नहीं किया उनका अनुसरण करते हुए मैं भी आपको अलविदा कहने में ही अपनी भलाई समझता हूं,मैं शायद अब आपकी गलत रीति नीति के साथ कदमताल नहीं कर पाउंगा!'' गिरिराज महाराज की जय, जय हिंद, जय भारत
विवाद तब और गहरा गया जब विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट लिखकर पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा पर बेहद गंभीर और व्यक्तिगत आरोप मढ़ दिए।
आरएएस भर्ती विवाद: सिंह ने आरोप लगाया कि जब गोविंद सिंह डोटासरा शिक्षा मंत्री के पद पर थे, तब उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने बेटे, बहू और अन्य रिश्तेदारों को आरएएस (RAS) इंटरव्यू (वर्ष 2016 और 2018) में कथित तौर पर अस्सी-अस्सी अंक दिलवाए।
रीट परीक्षा और प्रमाण पत्र: उन्होंने रीट (REET) परीक्षा में हुई कथित धांधलियों और ओबीसी (OBC) नॉन-क्रीमी लेयर प्रमाण पत्र के दुरुपयोग के मामलों को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
इस्तीफे की मांग: विश्वेंद्र सिंह ने डोटासरा से नैतिक आधार पर तुरंत अपने पद से इस्तीफा देने की मांग की है, साथ ही कांग्रेस आलाकमान से उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने की अपील की है।
हाल ही में संपन्न हुए राजस्थान शहरी निकाय चुनावों में भरतपुर और डीग जिले में कांग्रेस पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद से ही पार्टी के भीतर आंतरिक कलह सतह पर आ गई थी। पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने इस हार के लिए सीधे तौर पर दोनों जिलों के कांग्रेस जिलाध्यक्षों और प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि संगठन के लचर और पक्षपातपूर्ण रवैये के कारण पार्टी के वफादार तथा असली कार्यकर्ताओं को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया और केवल चहेतों को टिकट बांटे गए, जिसके परिणामस्वरूप पार्टी को यह दिन देखना पड़ा।
दूसरी ओर, गोविंद सिंह डोटासरा और उनके समर्थक नेताओं ने विश्वेंद्र सिंह द्वारा लगाए गए तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है डोटासरा का कहना है कि कांग्रेस पार्टी में किसी तरह की कोई गुटबाजी नहीं है और सभी नेता पूरी तरह एकजुट हैं। पार्टी के अन्य नेताओं ने इस घटनाक्रम को विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) का एक 'टूलकिट' और दुष्प्रचार करार देते हुए विश्वेंद्र सिंह को अवसरवादी और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल बताया है। इस हाई-प्रोफाइल इस्तीफे के बाद से राजस्थान की राजनीति में सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।
Updated on:
02 Oct 2026 09:11 am
Published on:
02 Oct 2026 08:42 am
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