
छेल दुलारी गवरजा, ईशर जी चित्तचोर, ईशरजी मनमोहना, नवलखा सिरमोर, आज हिलमिज पूजो री प्यारी गणगौर ....
जैसलमेर. हिन्दू नववर्ष के आगाज और चैत्रनवरात्रि के तीसरे दिन मंगलवार को जैसलमेर में गणगौर का पर्व उल्लास से मनाया गया। सुबह की शुरुआत में शुरू हुआ गणगौर पूजन का सिलसिला बदस्तूर जारी है। युवतियों ने गणगौर और ईशर का सुबह पूजन कर मंगल गीत गा रही है। जिससे यहां का माहौल लोक संस्कृति से ओत-प्रोत हो गया है। युवतियां और महिलाएं सज-धज कर गणगौर पूजन कर रही है। घरों में स्थापित गवर और ईशर को सजाया गया है और उनके आगे दीप प्रज्वलित कर पूजन करने के बाद पारम्परिक गीत गुनगुनाकर युवतियां मनोवांछित वर की प्रार्थना कर रही है, वहीं महिलाएं ईशर से अपना सुहाग अमर रखने के की। महिलाओं ने गणगौर का व्रत रखा हुआ है। जिसे वे शाम को गणगौर सवारी के दर्शनों के बाद तारा देखकर खोलेगी। मान्यता है कि गणगौर का व्रत करने और गणगौर पूजन करने से मनोवांछित फल मिलने के साथ सुहाग अमर रहता है। इसी मान्यता के चलते जैसलमेर में गणगौर का व्रत रखा गया है। जिसमें महिलाओं और युवतियों में गणगौर का चाव देखा जा सकता है।