Colonel Sonaram Funeral: बाड़मेर-जैसलमेर के पूर्व सांसद कर्नल सोनाराम चौधरी का शुक्रवार को उनके पैतृक गांव मोहनगढ़ में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
Colonel Sonaram Funeral: बाड़मेर-जैसलमेर के पूर्व सांसद और कांग्रेस के कद्दावर नेता कर्नल सोनाराम चौधरी का शुक्रवार को उनके पैतृक गांव मोहनगढ़ में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान हजारों की संख्या में लोग अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई देने पहुंचे। मोहनगढ़ के बाजार बंद रहे और सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा।
इस दौरान 'कर्नल सोनाराम चौधरी अमर रहे' के नारों के बीच उनकी अंतिम यात्रा निकली। बता दें, गुरुवार रात को कर्नल सोनाराम का पार्थिव शरीर बाड़मेर से मोहनगढ़ लाया गया।
शुक्रवार सुबह उनके पैतृक आवास पर पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। इस दौरान परिजनों, ग्रामीणों, और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान पत्नी विमला चौधरी फूट-फूटकर रोने लगी। बेटे डॉ. रमन चौधरी सहित परिवार के अन्य सदस्यों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।
श्रद्धांजलि देने वालों में राज्यमंत्री केके विश्नोई, बाड़मेर-जैसलमेर सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल, पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी, पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी, बायतु विधायक हरीश चौधरी, बाड़मेर विधायक डॉ. प्रियंका चौधरी, पूर्व विधायक रूपाराम धनदे, बाड़मेर जिला प्रमुख महेंद्र चौधरी, जैसलमेर पूर्व जिला प्रमुख अंजना मेघवाल, पूर्व मंत्री सालेह मोहम्मद, गफूर अहमद, शमा बानो सहित कई नेता और जनप्रतिनिधि शामिल रहे।
यह अंतिम यात्रा उनके पैतृक आवास से शुरू होकर मोहनगढ़ के मुख्य मार्गों से होकर गुजरी। इस दौरान सड़कों के किनारे खड़े लोग अपने प्रिय नेता के प्रति सम्मान व्यक्त करते नजर आए। यात्रा मोहनगढ़ के श्मशान घाट पर पहुंची, जहां उनके बेटे डॉ. रमन चौधरी ने मुखाग्नि दी। इस भावुक क्षण में डॉ. रमन फूट-फूटकर रो पड़े, जिन्हें आसपास खड़े लोगों ने ढांढस बंधाया।
बताते चलें कि कर्नल सोनाराम चौधरी का बुधवार को दिल्ली में एक मीटिंग के दौरान अचानक स्वास्थ्य बिगड़ गया था। उन्हें तुरंत अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां देर रात उन्होंने अंतिम सांस ली। गुरुवार को उनका पार्थिव शरीर हवाई मार्ग से उतरलाई लाया गया और फिर बाड़मेर स्थित उनके आवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। शुक्रवार को मोहनगढ़ में उनका अंतिम संस्कार हुआ।