जैसलमेर

जैसलमेर की मरुस्थलीय मिट्टी में खुशबू बिखेरता जीरा…रबी के कुल रकबे के 30.85% भू-भाग में बुवाई

Record cumin sowing in Jaisalmer: देश की पश्चिमी सीमा पर अवस्थित जैसलमेर जिला अब केवल बॉर्डर, पर्यटन और दुर्ग-धरोहरों के लिए ही नहीं, बल्कि मसाला उत्पादन के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना रहा है। यहां की रेतीली भूमि और शुष्क जलवायु में उगने वाला जीरा किसानों के लिए नकदी फसल के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है

2 min read
जैसलमेर बना जीरा उत्पादन का प्रमुख केंद्र, पत्रिका फोटो

Record cumin sowing in Jaisalmer: देश की पश्चिमी सीमा पर अवस्थित जैसलमेर जिला अब केवल बॉर्डर, पर्यटन और दुर्ग-धरोहरों के लिए ही नहीं, बल्कि मसाला उत्पादन के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना रहा है। यहां की रेतीली भूमि और शुष्क जलवायु में उगने वाला जीरा किसानों के लिए नकदी फसल के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। 2025-26 के रबी फसल चक्र में अकेला जीरा 30.85 प्रतिशत भूभाग में बोया गया है।

जिले में रबी की अनुमानित बुवाई 4 लाख 47 हजार 333 हैक्टर में की गई है, इसमें से किसानों ने जीरा की बुवाई 1 लाख 38 हजार 10 हैक्टर भूभाग में की है। इसकी बड़ी वजह यह है कि जिले के लगभग सभी कृषि क्षेत्रों में जीरा उत्पादन में निरंतर बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिससे किसानों की आय में भी सुधार हुआ है।

ये भी पढ़ें

पोकरण: व्यवस्था का ब्रेक फेल : न डीटीओ और न ही निरीक्षक

जिले के ट्यूबवैल से लेकर नहरी क्षेत्र तक में किसान जीरे की खेती कर रहे हैं। कम पानी में तैयार होने वाली यह फसल शीतकालीन मौसम में बोई जाती है और मार्च-अप्रेल में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। जैसलमेर की जलवायु जीरे के लिए अनुकूल मानी जाती है, क्योंकि यहां नमी कम रहती है, जिससे फसल में रोग लगने की संभावना घट जाती है।

शुष्क जलवायु और अनुकूल मिट्टी

जैसलमेर जिले में जीरा की फसल वर्ष दर वर्ष किसानों में लोकप्रिय हो रही है और इसके उत्पादन में भी बढ़ोतरी का रुख है। इसके लिए सबसे ज्यादा श्रेय यहां की शुष्क जलवायु और अनुकूल मिट्टी को दिया जाता है। जैसलमेर का जीरा अपनी गुणवत्ता और दीर्घायु के लिए प्रसिद्ध है। यहां का जीरा बड़े आकार का, वजनदार और खनिजों से भरपूर होता है।

वहीं, गुजरात का जीरा छोटा और हल्का होता है। जानकारों के अनुसार, जैसलमेर का जीरा 4-5 वर्षों तक खराब नहीं होता, जबकि गुजरात का जीरा एक साल में खराब हो जाता है। जानकारों का मानना है कि जीरा ने किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 25,000 से अधिक कृषि ट्यूबवैल और 40,000 से ज्यादा नहरी मुरब्बों में जीरा की खेती हो रही है, जिससे किसानों को रिकॉर्ड उत्पादन के साथ अच्छा मुनाफा मिल रहा है।

चुनौतियां भी कम नहीं

हालांकि जीरा उत्पादन में चुनौतियां भी कम नहीं हैं। अत्यधिक ठंड, पाला पडऩा और कभी-कभी तेज हवाएं फसल को नुकसान पहुंचा देती हैं। इसके अलावा रोग और कीट प्रकोप की आशंका भी बनी रहती है। इसके बावजूद किसान आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीज और समय पर सिंचाई के माध्यम से बेहतर उत्पादन हासिल कर रहे हैं।

कृषि से संबंधी विभागों की ओर से किसानों को जीरा उत्पादन के लिए तकनीकी मार्गदर्शन और योजनाओं का लाभ भी दिया जा रहा है। विभागों की ओर से खेतों में प्रदर्शन, प्रशिक्षण शिविर और फसल सुरक्षा संबंधी सलाह दी जा रही है। किसानों का कहना है कि यदि सिंचाई सुविधाओं और भंडारण व्यवस्था को और मजबूत किया जाए, तो जैसलमेर जीरा उत्पादन में प्रदेश में अग्रणी हो सकता है।

सर्दी से भी जीरा को नुकसान नहीं

जैसलमेर में जीरा की फसल किसानों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रही है। इस साल भी बहुत बड़े भूभाग में जीरे की बुवाई की गई है। क्षेत्र में पड़ रही तेज सर्दी से भी जीरा की फसल को नुकसान नहीं है।

  • डॉ. जेआर भाखर, संयुक्त निदेशक, कृषि (विस्तार), जैसलमेर

ये भी पढ़ें

Jaisalmer: इंजीनियर के घर में चोरी, लिपिस्टिक से ​दीवार पर लिखा… दारू रखते हो तो आलू-चिप्स भी रखा करो

Also Read
View All

अगली खबर