जैसलमेर

रेतीले धोरों में ‘साइक्लोनिक सर्कुलेशन’ ने मचाई थी तबाही,मौसम विभाग ने दिया यह तर्क

-सम क्षेत्र में गुब्बारों की तरह उड़ गए थे 200 टेंट, सैलानियों ने छिपकर बचाई थी जान -मौसम विभाग का तर्क- राडार में नहीं आता यह कुदरती प्रभाव

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Oct 27, 2018
रेतीले धोरों में ‘साइक्लोनिक सर्कुलेशन’ ने मचाई थी तबाही,मौसम विभाग ने दिया यह तर्क

जैसलमेर. जैसलमेर जिला मुख्यालय से 42 किलोमीटर दूरी पर स्थित सम सेंड ड्यून्स में गत 24 तारीख को रात करीब 9 बजे आया तूफान उस समय समूचे पश्चिमी राजस्थान में बन साइक्लोनिक सर्कुलेशन का नतीजा रहा। मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो इस कुदरती प्रभाव के चलते सम के विशाल थार रेगिस्तान में स्थानीय थंडर स्ट्रोम एक्टिविटी बनी। ‘डाऊन ड्राफ्ट’ के चलते कमरे जैसे मजबूत टेंट गैस भरे गुब्बारे के जैसे जमीन से ऊपर उठ कर उड़ गए। दो दिन पहले सम सेंडड्यून्स पर तबाही मचाने वाले तूफान के कारणों की पत्रिका की ओर से की गई पड़ताल में यह जानकारियां सामने आई हैं। उधर, बुधवार को कुदरती कहर ने एकबारगी सम क्षेत्र के रिसोट्र्स संचालकों व स्थानीय प्रशासन को सकते में डाल दिया है, क्योंकि जानकरों के मुताबिक रेत के समंदर में अचानक होने वाली घटना का पूर्वानुमान और निपटने के इंतजाम संभव नहीं है।

..इसलिए सम में कहर बरपा
-मानसून की विदाई के बाद पश्चिमी विक्षोभ के हालात बनते हैं।
-आकाश से अत्यंत बारीक पानी की बूंदे ठंडी हवा के साथ जमीन पर गिरने के करीब आती है, तब जमीन की गर्म हवा का उससे मेल हो जाता है।
-इस वजह से अचानक बारिश, ओलावृष्टि अथवा तेज हवाओं का सिलसिला बनता है।
-सम क्षेत्र चूंकि पूरा रेगिस्तानी इलाका है, जहां पेड़-पौधे और अन्य वनस्पतियां लगभग नगण्य हैं।
-ऐसे में डाऊन ड्राफ्ट गतिविधि के कारण रेत बवंडर के रूप में ऊपर उठी।
-इसके प्रहार से रिसोट्र्स में लगे टेंट हाइड्रोजन गैस भरे गुब्बारे के जैसे उखड़ कर उड़ गए।

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जोश-खरोश से जुटे रिसोर्ट व्यवसायी
सम और लखमणा सेंडड्यून्स क्षेत्र में दो दिन पहले हुई तबाही से उबरते हुए संबंधित रिसोर्ट संचालक बिखरे सामान को दुरुस्त करने में जोश के साथ जुट गए हैं, जो टेंट क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनकी रिपेयरिंग का कार्य शुरू कर दिया गया है। पूरी तरह से ध्वस्त टेंट्स की जगह नए टेंट बनवाने के लिए ऑर्डर दिए जा रहे हैं। ऐसे ही फर्नीचर, बाथरूम तथा अन्य सामान की टूट-फूट को रिपेयर करवाने के काम भी तत्काल प्रभाव से शुरू करवा दिया गया है। दरअसल, उनका सारा ध्यान आगामी दिवाली सीजन पर है। अधिकांश रिसोट्र्स में पहली नवम्बर से सैलानियों की बुकिंग है। तब तक आशियानों को पहले जैसा बनाने की उनके सामने चुनौती है।
सम का ‘दम’ , 200 करोड़ का वार्षिक टर्न ओवर
जैसलमेर पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सम सेंड ड्यून्स का अहम योगदान है। सालाना 1200 करोड़ के टर्न ओवर वाले जैसलमेर पर्यटन बाजार में सम की भागीदारी बढ़ते-बढ़ते करीब 200 करोड़ तक पहुंच चुकी है। देश-दुनिया के सैलानियों को भारतीय पश्चिमी सीमा के अंतिम छोर पर आए जैसलमेर के इस पर्यटन स्थल का दीदार करने के प्रति खास आकर्षण दिखाई देता है। रेतीले धोरों पर भ्रमण की पर्यटकों की रुचि को देखते हुए बाहरी निवेशकों ने भी सम में रिसोट्र्स तथा कैम्प स्थापित करने में गहरी दिलचस्पी दिखाई है।

फैक्ट फाइल
- 200 करोड़ का पर्यटन व्यवसाय सम में
- 04 लाख से ज्यादा सैलानी सालाना आते हैं
- 80 रिसोट्र्स संचालित हो रहे हैं सम सेंडड्यून्स पर
- 02 हजार ऊंटों से धोरों पर की जाती है केमल सफारी

भविष्य के लिए प्रस्ताव बना रहे
पश्चिमी विक्षोभ के साथ स्थानीय परिस्थितियां बनने से सम के रेगिस्तानी क्षेत्र में आए तूफान का सीमित क्षेत्र होने से उनका पूर्वानुमान नहीं हो सकता। इस संबंध में हम प्रस्ताव तैयार कर सक्ष् ाम स्तर पर दे रहे हैं, ताकि भविष्य में स्थानीय स्तर पर घटित होने वाली ऐसी घटनाओं को ऑब्जर्व किया जा सके।
-शिव गणेश, निदेशक, मौसम विभाग, जयपुर

कोई बड़ी हानि नहीं
भौगोलिक घटना को लेकर प्रशासन को कोई अलर्ट नहीं मिला था। चिंता की कोई बात नहीं है। कोई जन हानि नहीं हुई है।
-ओम कसेरा, जिला कलक्टर, जैसलमेर

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Published on:
27 Oct 2018 12:03 pm
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