Rajasthan Panchayat-Local Body Elections: बैठक में पूर्व विधायक रूपाराम धनदेव ने सरकार पर पंचायती राज व निकाय चुनाव समय पर न कराने का आरोप लगाया। कहा कि चुनाव जानबूझकर टाले जा रहे हैं, जिससे जनता में आक्रोश है।
Panchayat and Local Body Elections in Rajasthan: जैसलमेर: संगठन बढ़ाओ, लोकतंत्र बचाओ अभियान के तहत जैसलमेर विधानसभा क्षेत्र में एक जन जागरुकता बैठक आयोजित की गई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के निर्देशानुसार आयोजित यह बैठक ब्लॉक कांग्रेस कमेटी सम के तत्वावधान में मंडल कांग्रेस कमेटी फतेहगढ़ और से ग्राम पंचायत मोढा के बोगनियाई मुख्यालय पर की गई।
उपस्थित कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए जैसलमेर के पूर्व विधायक रूपाराम धनदेव ने कहा कि वर्तमान सरकार पंचायती राज एवं निकाय चुनाव समय पर नहीं करवा रही है। उन्होंने बताया कि पंचायती राज विभाग और नगरीय निकायों में जनता का कोई प्रतिनिधि न होने से आमजन के कार्य नहीं हो रहे हैं, जिससे प्रदेश की जनता में आक्रोश है।
धनदेव ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर चुनाव किसी न किसी बहाने आगे खींच रही है, जो आमजन के हित में नहीं है। इस अवसर पर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी सम के अध्यक्ष मुराद फकीर साहब ने कहा कि आगामी किसी भी चुनाव में कांग्रेस को जिताने के लिए हर कार्यकर्ता को मेहनत करनी होगी।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार, झिनझिनयाली मंडल की विभिन्न ग्राम पंचायतों के अध्यक्ष भी बनाए गए, जिन्हें कांग्रेस की रीति-नीति आमजन तक पहुंचाने को कहा गया। बैठक में ब्लॉक एवं मंडल कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी, सदस्य, नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। मंच संचालन धनपत सिंह मोढा ने किया।
राजस्थान में पंचायती राज और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर सियासी और कानूनी पारा चढ़ा हुआ है। एक तरफ जहां राज्य निर्वाचन आयोग हाईकोर्ट के अवमानना नोटिस का सामना कर रहा है। वहीं, दूसरी तरफ राज्य सरकार की 'प्रक्रिया जारी है' वाली सुस्त रफ्तार ने चुनावों पर अनिश्चितता के बादल मंडरा दिए हैं। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए अब यह माना जा रहा है कि सरकार इन दोनों चुनावों को एक साथ अक्टूबर-नवंबर 2026 में करवाने की रणनीति पर काम कर रही है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने 15 अप्रैल तक चुनाव संपन्न न कराए जाने पर राज्य निर्वाचन आयोग को अवमानना नोटिस जारी किया है। इसके जवाब में आयोग अब न्यायालय को यह बताने की तैयारी में है कि देरी उसकी ओर से नहीं, बल्कि राज्य सरकार से समय पर सूचनाएं न मिलने के कारण हुई है। सूत्रों की मानें तो आयोग मार्च के पहले सप्ताह में ही चुनाव की घोषणा करने वाला था, लेकिन सरकार से डेटा न मिलने के कारण प्रक्रिया ठप हो गई।
पंचायती राज संस्थाओं के लिए आयोग ने अपनी तैयारी पूरी कर ली थी, लेकिन मामला आरक्षण के निर्धारण पर आकर अटक गया है।
आयोग ने 9 मार्च को सरकार को पत्र लिखकर एससी, एसटी, ओबीसी और महिलाओं के लिए आरक्षण तय कर सूचित करने को कहा था। सरकार ने 31 मार्च को जवाब दिया कि प्रक्रिया अभी जारी है। इसी बीच, सरकार ने पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग का कार्यकाल सितंबर 2026 तक बढ़ा दिया, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि चुनाव अब साल के अंत में ही संभव हैं।
नगरीय निकायों के मामले में तो आयोग और सरकार के बीच संवादहीनता और भी गहरी दिखी। परिसीमन निरस्त होने के बाद आयोग ने बार-बार सरकार से पूछा कि चुनाव किस आधार पर होंगे, लेकिन महीनों तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला।
दिसंबर 2025-फरवरी 2026: आयोग ने स्वायत्त शासन विभाग को कुल 6 पत्र लिखे, जिसमें तीन दिन की चेतावनी वाला पत्र भी शामिल था। जवाब न मिलने पर आयोग ने 20 फरवरी 2026 को 196 निकायों के लिए खुद ही मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम जारी कर दिया। 196 निकायों की अंतिम सूची 22 अप्रैल को और शेष 113 निकायों की सूची 8 मई, 2026 को जारी होगी।
वर्तमान स्थिति यह है कि राज्य सरकार ओबीसी आयोग की रिपोर्ट और परिसीमन के बहाने चुनावों को टालने के मूड में दिख रही है, जबकि निर्वाचन आयोग अपनी साख बचाने के लिए अदालत में सरकार की घेराबंदी कर सकता है। आगामी कुछ सप्ताह राजस्थान की स्थानीय राजनीति के लिए निर्णायक साबित होंगे।