
राजस्थान के सरहदी जिले जैसलमेर से एक बेहद भावुक और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल उठाने वाला मामला सामने आया है। भारतीय सेना के 92 वर्षीय रिटायर्ड अधिकारी कैप्टन चुन्नीलाल, जिन्होंने 1962 में चीन के खिलाफ और 1965 व 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ ऐतिहासिक युद्धों में देश की रक्षा के लिए अपनी जान की बाजी लगाई थी, आज इस ढलती उम्र में अपनी ही जमीन को बचाने के लिए व्यवस्था के खिलाफ अपनी जिंदगी की चौथी जंग लड़ रहे हैं। कैप्टन चुन्नीलाल का आरोप है कि जैसलमेर जिले के मोहनगढ़ इलाके में स्थित उनकी आवंटित कृषि भूमि को भू-माफियाओं ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर और एक फर्जी हमशक्ल को खड़ा करके उनकी जानकारी के बिना धोखाधड़ी से गिरवी रख दिया और फिर करीब 25 लाख रुपए में बेच दिया।
मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के रहने वाले और पोंग बांध परियोजना के विस्थापित इस बुजुर्ग फौजी के पास आज भी जमीन के मूल मालिकाना हक के असली कागजात मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें और उनके परिवार को अपनी ही जमीन वापस पाने के लिए जैसलमेर के अलग-अलग सरकारी दफ्तरों और पुलिस थानों की चौखट पर हफ्तों से धक्के खाने पड़ रहे हैं।
मीडिया से बातचीत करते हुए भावुक हुए कैप्टन चुन्नीलाल ने बताया कि उनका परिवार मूल रूप से हिमाचल प्रदेश का रहने वाला है, जहां उनके पास बेहद उपजाऊ कृषि भूमि थी। लेकिन सरकार ने पोंग बांध परियोजना के लिए उनकी पैतृक जमीन का अधिग्रहण कर लिया था।
उस समय मिले कम मुआवजे के बदले सरकार ने वादा किया था कि विस्थापित परिवारों को राजस्थान के इंदिरा गांधी नहर परियोजना क्षेत्र में पुनर्वास के तहत जमीन आवंटित की जाएगी। इसी योजना के तहत उन्हें जैसलमेर के मोहनगढ़ में जमीन (मुरब्बा) आवंटित की गई थी।
कैप्टन ने रुआंसे होकर बताया कि जब वे दशकों पहले पहली बार यहां आए थे, तो चारों तरफ सिर्फ रेत के ऊंचे-ऊंचे टीले और बंजर मरुस्थल था। उनके पूरे परिवार ने कड़ी धूप में वर्षों तक हाड़-तोड़ मेहनत की, रेत को समतल किया और अपने खून-पसीने से सींचकर इस बंजर मरुभूमि को उपजाऊ और हरी-भरी कृषि भूमि में तब्दील किया।
लेकिन आज जब वे 92 वर्ष के हो चुके हैं, तब भू-माफियाओं के एक संगठित गिरोह ने फर्जी कागजात तैयार कर उनकी इस जीवनभर की कमाई को धोखे से हड़प लिया।
बुजुर्ग सैनिक के बेटे मुल्तान सिंह ठाकुर ने प्रशासनिक ढर्रे पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि जब उन्हें 16 June को हुई रजिस्ट्री और 22 June को हुए म्यूटेशन (नामांतरण) की जानकारी मिली, तो वे तुरंत न्याय के लिए दौड़े। लेकिन स्थानीय प्रशासन का रवैया बेहद निराशाजनक रहा। वे सबसे पहले मोहनगढ़ थाने गए, तो वहां की पुलिस ने क्षेत्राधिकार का हवाला देकर उन्हें पीटीएम (PTM) थाने भेज दिया। पीटीएम थाने वालों ने उन्हें कोतवाली थाने जाने को कह दिया क्योंकि रजिस्ट्री वहीं हुई थी।
मुल्तान सिंह ने बताया कि जब वे राजस्व अधिकारियों (तहसीलदार और पटवारी) से मिले और शिकायत की कि उनके 92 वर्षीय पिता के स्थान पर रजिस्ट्री ऑफिस में महज 75 साल के एक फर्जी बूढ़े व्यक्ति को खड़ा करके धोखाधड़ी की गई है, तो तहसीलदार ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि उनका काम सिर्फ प्रॉपर्टी रजिस्टर करना है, म्यूटेशन कैंसिलेशन के लिए वे कोर्ट जाएं।
इस भागदौड़ के कारण दिल के मरीज कैप्टन चुन्नीलाल की तबीयत इतनी बिगड़ गई कि दफ्तरों में फिंगरप्रिंट देते समय भी वे अस्वस्थ होकर बार-बार सो जा रहे थे।
इस मुश्किल घड़ी में पूर्व फौजी की मदद कर रहे रिटायर्ड सार्जेंट लालाराम चौधरी ने बताया कि दलालों और भू-माफियाओं के इस गिरोह ने कैप्टन चुन्नीलाल की बेशकीमती जमीन को करीब 25 लाख रुपए में धोखे से बेच दिया और रजिस्ट्री होते ही उस रकम को आपस में बांट भी लिया।
लालाराम ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि जो सैनिक देश के लिए 1962 और 1971 की जंग जीता, आज वह 8 दिनों से टैक्सियों में उधारी के पैसे लेकर न्याय के लिए भटक रहा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद ने इसी दिन के लिए शहादत दी थी कि देश के बुजुर्ग जांबाजों को बुढ़ापे में इस तरह अपमानित होना पड़े? उन्होंने हिमाचल प्रदेश और राजस्थान, दोनों सरकारों से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की भावुक अपील की है।
मामले में शुरुआती ढिलाई के बाद जब पीड़ित परिवार ने जैसलमेर के पुलिस अधीक्षक (SP) से मुलाकात की, तब जाकर उनके कड़े निर्देशों के बाद आखिरकार जैसलमेर के कोतवाली थाने में भू-माफियाओं के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज की जा सकी।
जैसलमेर के एडिशनल एसपी (ASP) रेवतदान ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि एक रिटायर्ड फौजी की शिकायत पर किसी अन्य व्यक्ति द्वारा फर्जी नाम से हमशक्ल खड़ा कर जमीन की रजिस्ट्री कराने का गंभीर मामला दर्ज कर लिया गया है।
पुलिस ने पूरे मामले की गहनता से तफ्तीश शुरू कर दी है और राजस्व विभाग से भी दस्तावेज तलब किए गए हैं। एएसपी ने भरोसा दिलाया है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी और बुजुर्ग सैनिक को उनकी जमीन वापस दिलाई जाएगी।