जैसलमेर

Ravindra Singh Bhati: ओरण संरक्षण के लिए रविंद्र सिंह भाटी ने फिर भरी हुंकार, बोले- मांग पूरी नहीं तो होगा बड़ा जन आंदोलन

शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी का पोकरण पहुंचने पर स्वागत और अभिनंदन किया गया। शिव विधायक भाटी शनिवार को दोपहर बाद पोकरण पहुंचे थे। यहां जोधपुर रोड पर आयोजित एक निजी समारोह में शिरकत की।
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Updated: 12 Apr 2026, 12:05 PM IST
MLA Ravindra Bhati vows to fight from streets to assembly for Oran land demands heritage record in revenue
पोकरण में शिव विधायक के स्वागत में उमड़ी भीड़ (फोटो- पत्रिका)

पोकरण (जैसलमेर): शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने एक बार फिर सरकार की नींद उड़ा दी है। शनिवार को पोकरण पहुंचने पर भाटी ने ओरण के संरक्षण को लेकर हुंकार भरते हुए स्पष्ट कर दिया कि यदि सरकार ने समय रहते ओरण को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया, तो एक बड़ा जन-आंदोलन छेड़ा जाएगा।

शनिवार दोपहर जब रविंद्र सिंह भाटी पोकरण पहुंचे, तो जोधपुर रोड पर युवाओं और समर्थकों का सैलाब उमड़ पड़ा। साफा पहनाकर और मालाओं से लादकर उनका भव्य स्वागत किया गया।

इस दौरान पत्रकारों से मुखातिब होते हुए भाटी ने बेहद सख्त लहजे में कहा, ओरण और गोचर हमारी केवल जमीन नहीं, हमारी पहचान और धरोहर हैं। इसे राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करना ही होगा। अगर सरकार ने पश्चिमी राजस्थान और मारवाड़ की इस जायज मांग को अनसुना किया, तो हम सड़क से लेकर सदन तक मजबूती से लड़ाई लड़ेंगे।

क्या है 'ओरण' और क्यों है यह इतना महत्वपूर्ण?

ओरण दरअसल राजस्थान, विशेषकर थार रेगिस्तान के गांवों में छोड़ी गई वह सामूहिक भूमि है, जिसे स्थानीय लोग 'देवताओं का उपवन' मानते हैं। हर ओरण किसी न किसी स्थानीय लोक देवता (जैसे तेजाजी, पाबूजी, या देगराय माता) को समर्पित होती है। यहां के पेड़ों (खेजड़ी, रोहिड़ा, केर) को काटना वर्जित होता है। यह वन्यजीवों (जैसे गोडावण और हिरण) का सुरक्षित प्राकृतिक आवास है। मारवाड़ और पश्चिमी राजस्थान की अर्थव्यवस्था पशुपालन पर टिकी है। ओरण ही वह स्थान है, जहां हजारों पशुओं के लिए चारागाह उपलब्ध होता है।

आखिर क्यों हो रहा है विवाद?

सबसे बड़ी समस्या यह है कि सरकारी दस्तावेजों में सदियों पुरानी इन ओरण जमीनों को 'बंजर' या 'राजस्व भूमि' के रूप में दर्ज किया गया है, न कि 'ओरण' के रूप में। इसके चलते सरकारें इन जमीनों को विकास परियोजनाओं के लिए आवंटित कर देती हैं।

रिन्यूएबल एनर्जी (सौर और पवन ऊर्जा) का दखल

जैसलमेर और बाड़मेर में सौर और पवन ऊर्जा के बड़े-बड़े प्लांट लग रहे हैं। कंपनियों को जमीन आवंटित करते समय सरकार अक्सर इन 'ओरण' भूमियों को आवंटित कर देती है। जब कंपनियां वहां फेंसिंग करती हैं या पेड़ काटती हैं, तो स्थानीय ग्रामीणों और पशुपालकों का रास्ता बंद हो जाता है, जिससे संघर्ष की स्थिति पैदा होती है।

भाटी की मांग और 'विश्वास' ट्रेंड का असर

विधायक भाटी ने साफ किया कि इस लड़ाई की पूरी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी। उन्होंने कहा कि यह केवल कुछ बीघा जमीन का टुकड़ा नहीं है, बल्कि लाखों लोगों की आस्था और रोजी-रोटी का सवाल है।

सोशल मीडिया पर उनके समर्थन में चल रहे 'विश्वास' ट्रेंड पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा, ये सब मेरे अपने लोग हैं। उनका प्यार और आशीर्वाद ही मेरी असली ताकत है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाटी इस मुद्दे के जरिए पश्चिमी राजस्थान के मूल निवासियों और पशुपालक समुदायों को एकजुट कर रहे हैं, जो आगामी चुनावों या राजनीतिक समीकरणों में बड़ा उलटफेर कर सकते हैं।

रविंद्र सिंह भाटी का यह स्टैंड राजस्थान सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। एक तरफ राज्य में औद्योगिक विकास की जरूरत है, तो दूसरी तरफ सदियों पुरानी सांस्कृतिक और पर्यावरणीय विरासत को बचाने की जंग।

Updated on:
12 Apr 2026, 12:05 PM IST
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