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Video: सरकार! इतनी व्यवस्था तो कर दो…जिससे शुरू हो जाए सोनोग्राफी की सुविधा

जैसलमेर. जिला मुख्यालय स्थित राजकीय जवाहिर अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचे कुम्भारकोठा के कैलाशराम के सिर पर चोट आई थी और उसके साथ आए परिवारजन उसे सोनोग्राफी के लिए निजी केंद्र पर ले जाने की व्यवस्था में जुटे थे, क्योंकि जिला अस्पताल में पिछले दो साल से अधिक समय से रेडियोलॉजिस्ट का पद रिक्त होने के कारण सोनोग्राफी सेंटर पर ताला लगा हुआ है। यह मामला अकेले कैलाश राम का नहीं है।

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जैसलमेर. राजकीय जवाहिर चिकित्सालय में सोनाेग्राफी सुविधा की है दरकार।

जैसलमेर. जिला मुख्यालय स्थित राजकीय जवाहिर अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचे कुम्भारकोठा के कैलाशराम के सिर पर चोट आई थी और उसके साथ आए परिवारजन उसे सोनोग्राफी के लिए निजी केंद्र पर ले जाने की व्यवस्था में जुटे थे, क्योंकि जिला अस्पताल में पिछले दो साल से अधिक समय से रेडियोलॉजिस्ट का पद रिक्त होने के कारण सोनोग्राफी सेंटर पर ताला लगा हुआ है। यह मामला अकेले कैलाश राम का नहीं है।

जिला अस्पताल में प्रतिदिन कम से कम 40 रोगी, जिनमें बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं भी शामिल होती हैं, को सोनोग्राफी जांच करवाने के लिए निजी केंद्रों पर जाने की विवशता झेलनी पड़ती है और उन्हें 1200 से 1800 रुपए खर्च करने होते हैं। इस तरह से सीमावर्ती जिले के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य संस्थान जिला अस्पताल में पिछले दो वर्ष से अधिक समय से सोनोग्राफी जांच सुविधा बंद होने से लोगों में भारी रोष व्याप्त है। रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में अस्पताल की सोनोग्राफी मशीनें धूल फांक रही हैं, जबकि रोजाना बड़ी संख्या में मरीज निजी जांच केंद्रों पर महंगी जांच कराने को मजबूर हैं। आमजन का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग और सरकार की अनदेखी के कारण गरीब मरीज आर्थिक और मानसिक परेशानी झेल रहे हैं।

जिला अस्पताल में सोनोग्राफी सुविधा बंद होने का सबसे अधिक असर गर्भवती महिलाओं, ग्रामीण मरीजों, बुजुर्गों और गंभीर रोगियों पर पड़ रहा है। सरकारी अस्पताल में सुविधा नहीं मिलने के कारण मरीजों को निजी लैबों में 1200 रुपए से लेकर 1800 तक खर्च करने पड़ रहे हैं। कई मरीज आर्थिक तंगी के चलते जांच तक नहीं करा पा रहे हैं।

नहीं लगा पा रहे एक अदद विशेषज्ञ

सोनोग्राफी सेंटर बंद होने की समस्या पुरानी है और इस पर जिला अस्पताल प्रशासन का एक ही जवाब होता है कि, रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया हुआ है। सरकार और उसके नुमाइंदे जिला अस्पताल में एक विशेषज्ञ तक नहीं लगा पा रहे हैं। जबकि इस अस्पताल में शहरी लोगों के साथ आसपास के कम से कम 150 गांवों-ढाणियों के लोग इलाज के लिए निर्भर रहते हैं। जिला अस्पताल में इलाज की उम्मीद लेकर आने पर उन्हें सोनोग्राफी के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। करोड़ों रुपए खर्च कर मशीनें लगाने के बावजूद विशेषज्ञ चिकित्सक की नियुक्ति नहीं होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। शहर के सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे पर बार-बार नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि सीमावर्ती जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की ऐसी स्थिति चिंताजनक है। कई बार मांग उठाने और ज्ञापन देने के बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

परेशान जन कर रहे गुहार

सरकारी अस्पताल में सोनोग्राफी नहीं होने से बहुत परेशानी हो रही है। निजी सेंटरों पर जांच करवाने में हजारों रुपए खर्च हो जाते हैं। गरीब आदमी इलाज कैसे कराए?

- गणपतसिंह

दो साल से सुविधा बंद होना शर्मनाक है। जिला अस्पताल में जरूरी जांच तक नहीं हो रही। सरकार को तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर की नियुक्ति करवानी चाहिए।

- विक्रम कुमार

लोगों में इस मुद्दे को लेकर भारी नाराजगी है। सीमावर्ती जिले के मरीजों के साथ अन्याय हो रहा है। समाधान नहीं होने पर जनप्रतिनिधियों को आगे आकर आंदोलन शुरू करना चाहिए।

- पुष्पलता व्यास

महिलाओं और गर्भवती मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। बार-बार मांग के बावजूद प्रशासन गंभीर नजर नहीं आ रहा।

- रविन्द्र पंवार