स्वर्णनगरी का पर्यटन कारोबार एक बार फिर सीजन की दहलीज पर खड़ा है। सितंबर से शुरू होकर मार्च तक चलने वाला पर्यटन सीजन जैसलमेर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।
स्वर्णनगरी का पर्यटन कारोबार एक बार फिर सीजन की दहलीज पर खड़ा है। सितंबर से शुरू होकर मार्च तक चलने वाला पर्यटन सीजन जैसलमेर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। होटल कारोबारी, रिसोर्ट संचालक और कैम्प मालिक इस बार नए सीजन को लेकर पहले से ही तैयारियों में जुट गए हैं। कोविड-19 के बाद से हर साल पर्यटकों की संख्या में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि 2024-25 का सीजन अब तक का सबसे बेहतर हो सकता है। गौरतलब है कि जैसलमेर में पर्यटन सीजन में 1500 करोड़ का कारोबार माना जाता है। जैसलमेर में सर्दियों के महीनों में होटल्स, रिसोटï्र्स और कैम्प्स 90 प्रतिशत तक बुक रहते हैं। पर्यटन से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि यदि इस बार मानसून अच्छा रहा और सडक़-हवाई कनेक्टिविटी बनी रही तो पर्यटकों की संख्या में और इजाफा संभव है।
सम कैंप एंड रिसोट्र्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष कैलाश कुमार व्यास का कहना है कि पर्यटक अब केवल दर्शनीय स्थलों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उन्हें लोक संस्कृति और रेगिस्तान का पूरा अनुभव चाहिए होता है। इसी कारण होटल और कैम्प पैकेज में लोक नृत्य, ऊंट सफारी, सितारों भरी रात में डिनर और लोक संगीत शामिल किया जा रहा है।
होटल संचालक अमित भाटी के अनुसार इस बार हमने अपने होटल में स्थानीय व्यंजनों को खास मेन्यू में शामिल किया है। विदेशी पर्यटकों को यह काफी पसंद आता है। इसके अलावा हम सोशल मीडिया प्रमोशन पर भी जोर दे रहे हैं। सम के एक रिसोर्ट संचालक भैरोसिंह राठौड़ का कहना है कि पिछले साल विदेशी पर्यटक संख्या अच्छी रही। हमें उम्मीद है कि इस बार यूरोपीय पर्यटक ज्यादा आएंगे।
हालांकि, होटल कारोबारियों के सामने चुनौतियां भी हैं। सबसे बड़ी समस्या बिजली कटौती और पानी की किल्लत है। कई होटलों के संचालकों का कहना है कि ऑनलाइन बुकिंग पोर्टल्स भारी कमीशन काटते हैं, जिससे लाभ पर असर पड़ता है।
व्यवसायियों की उम्मीद है कि इस बार अक्टूबर से फरवरी तक विदेशी पर्यटकों की अच्छी आमद रहेगी। होटल और कैम्प संचालक स्थानीय युवाओं को रोजगार भी मुहैया करवा रहे हैं।