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पोकरण: पद रिक्तता की मार, कामकाज प्रभावित …योजनाओं लाभ भी अधर में

ब्लॉक सांकड़ा व भणियाणा के महिला एवं बाल विकास विभाग कार्यालयों में केवल एक अधिकारी व तीन सुपरवाइजर कार्यरत है।

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ब्लॉक सांकड़ा व भणियाणा के महिला एवं बाल विकास विभाग कार्यालयों में केवल एक अधिकारी व तीन सुपरवाइजर कार्यरत है। कार्मिकों की कमी के कारण केन्द्र व राज्य सरकार की ओर से संचालित योजनाओं का ग्रामीण क्षेत्रों में कैसे लाभ मिलेगा, इस पर सवाल खड़ा हो रहा है। क्षेत्र में 280 आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित है। महिला एवं बाल विकास परियोजना कार्यालय ब्लॉक सांकड़ा क्षेत्र में 136 और भणियाणा क्षेत्र में 144 आंगनबाड़ी केन्द्र स्थित है।

सांकड़ा में एक परियोजना अधिकारी कार्यरत है, जिन्हें भणियाणा का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इसके साथ ही सांकड़ा में दो महिला पर्यवेक्षक कार्यरत है। कार्यालय में एक कनिष्ठ लेखाधिकारी के अलावा कोई कर्मचारी नहीं होने के कारण योजनाओं के संचालन व पर्यवेक्षण में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ब्लॉक सांकड़ा मुख्यालय पोकरण कार्यालय में एक कनिष्ठ लेखाधिकारी कार्यरत है। इसके अलावा सहायक प्रशासनिक अधिकारी, कनिष्ठ सहायक जैसे आवश्यक पद रिक्त है। विभागीय गतिविधियों का संचालन मात्र एक महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी के भरोसे हो रहा है।

उन्हें भणियाणा ब्लॉक का भी अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। इसी प्रकार क्षेत्र में संचालित आंगनबाड़ी केन्द्रों की निगरानी व मार्गदर्शन के लिए सांकड़ा क्षेत्र में नियुक्त 5 महिला पर्यवेक्षकों के पदों में से केवल 2 कार्यरत है।

एक सुपरवाइजर के भरोसे भणियाणा ब्लॉक

भणियाणा ब्लॉक में सांकड़ा के सीडीपीओ को अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। भणियाणा में केवल एक महिला पर्यवेक्षक कार्यरत है। इसके अलावा महिला पर्यवेक्षकों के 5 और वरिष्ठ सहायक, कनिष्ठ सहायक व लेखाधिकारी के पद रिक्त है। पद रिक्तता के कारण सुपोषण अभियान, आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पूरक पोषण आहार वितरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य निगरानी और अन्य योजनाओं की निगरानी व क्रियान्वयन बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। केन्द्रों पर होने वाली प्री-स्कूल शिक्षा व पोषण सेवाओं का समय पर पर्यवेक्षण नहीं हो पा रहा है। 280 आंगनबाड़ी केन्द्रों पर एक अधिकारी व तीन पर्यवेक्षक नाकाफी सिद्ध हो रहे है।