जैसलमेर

Rajasthan Monsoon: मानसून का संदेश लेकर थार में उतरे मध्य एशिया के परिंदे, इनका आगमन माना जाता है बारिश की दस्तक

Rajasthan Monsoon: मानसून की आहट के साथ राजस्थान के थार मरुस्थल में प्रवासी पक्षियों की चहल-पहल बढ़ने लगी है। मध्य एशिया से हजारों किलोमीटर की यात्रा कर नीला पतरिंगा यानी ब्लू-चीक्ड बी-ईटर थार मरुस्थल और आसपास के क्षेत्रों में पहुंच रहा है।
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Jun 25, 2026
When will monsoon arrive in Rajasthan
When will monsoon arrive in Rajasthan (Patrika Photo)

When will monsoon arrive in Rajasthan: राजस्थान में जैसलमेर जिले के लाठी क्षेत्र और थार मरुस्थल में मानसून की आहट के साथ ही एक बेहद खूबसूरत नजारा देखने को मिल रहा है। मध्य एशिया से हजारों किलोमीटर का लंबा सफर तय करके बेहद आकर्षक और रंग-बिरंगे प्रवासी पक्षी 'ब्लू-चीक्ड बी-ईटर' (जिसे हिंदी में नीला पतरिंगा कहा जाता है) थार के रेगिस्तान में पहुंच चुके हैं। इन मेहमान पक्षियों के आने से पूरा मरुस्थल चहक उठा है और चारों तरफ रौनक छा गई है।

पक्षी प्रेमियों और पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, इस पक्षी का रेगिस्तान में आना इस बात का साफ संकेत है कि मानसून अब ज्यादा दूर नहीं है। यह पक्षी अपने साथ बारिश का संदेश लेकर आता है।

खास पहचान: रंगों की जादुई बनावट

पर्यावरण प्रेमी पंकज विश्नोई के मुताबिक, नीला पतरिंगा अपनी अनोखी और खूबसूरत रंगत के कारण दूर से ही पहचान में आ जाता है। इसका पूरा शरीर हल्के हरे रंग का होता है, लेकिन इसके गालों और माथे पर हल्का नीला या सफेद रंग इसकी खूबसूरती में चार चांद लगा देता है।

क्या है इनकी विशेषता?

इसकी आंखों के ठीक ऊपर एक पतली काली पट्टी बनी होती है, जो देखने में बेहद आकर्षक लगती है। इसकी पूंछ लंबी और नुकीली होती है, जो इसे दूसरे पक्षियों से बिल्कुल अलग बनाती है। जब ये पक्षी झुंड में आसमान में उड़ान भरते हैं और अपनी मधुर आवाज में चहचहाते हैं, तो थार के धोरों की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है।

हवा में शिकार करने के उस्ताद

इन पक्षियों की उड़ान क्षमता कमाल की होती है। ये हवा में तैरते हुए बेहद तेज गति और सटीकता के साथ उड़ने वाले कीड़ों को पकड़ लेते हैं। रेगिस्तान में इस समय मिलने वाले मधुमक्खियां, ततैया और ड्रैगनफ्लाई इनका मुख्य और पसंदीदा भोजन हैं।

कीड़ों का शिकार करने की इस आदत की वजह से ये पर्यावरण के लिए बहुत मददगार साबित होते हैं। ये प्रकृति में हानिकारक और फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों की संख्या को नियंत्रित रखते हैं, जिससे हमारे इकोसिस्टम (पारिस्थितिकी तंत्र) का संतुलन बना रहता है।

भारत की विविधता बनती है पसंदीदा घर

भारत अपनी अनोखी भौगोलिक बनावट के कारण दुनिया भर के जीवों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना है। यहां एक तरफ घने वर्षा वन हैं, तो दूसरी तरफ सूखा रेगिस्तान और बर्फ से ढके पहाड़ हैं। यही वजह है कि जब दूसरे देशों में कड़ाके की ठंड या चिलचिलाती गर्मी पड़ती है, तो वहां के पक्षी भोजन, पानी और सुरक्षित माहौल की तलाश में भारत का रुख करते हैं।

अकसर गर्मियों में आने वाले प्रवासी पक्षी बहुत ज्यादा दूरी तय नहीं करते, बल्कि ऊंचाई वाले पहाड़ों से नीचे मैदानी और रेगिस्तानी इलाकों की तरफ आ जाते हैं। ऊंचाई में थोड़े से बदलाव से भी इन्हें भरपूर भोजन और अनुकूल मौसम मिल जाता है।

थार की जैव विविधता का सकारात्मक संकेत

जैसलमेर के थार रेगिस्तान में हर साल इन मेहमान पक्षियों का आना यह साबित करता है कि यहां का पर्यावरण और जैव विविधता आज भी समृद्ध है। वाइल्डलाइफ लवर्स और पर्यटकों के लिए यह समय थार घूमने का सबसे बेहतरीन मौका होता है, जहां वे प्रकृति के इस अद्भुत तालमेल को करीब से देख सकते हैं। नीला पतरिंगा का यह आगमन न सिर्फ आंखों को सुकून देता है, बल्कि थार की प्राकृतिक समृद्धि को दुनिया भर में एक नई पहचान भी देता है।

Published on:
25 Jun 2026 08:41 am