
जालोर। एएनटीएफ टीम ने "ऑपरेशन मदमलज़ " के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए 6 माह से फरार ईनामी अपराधी जालम सिंह राजपूत को गिरफ्तार किया। मूल रूप से कुडल पुलिस थाना सिवाना जिला बालोतरा निवासी जालम सिंह पर 25 हजार रुपए का ईनाम घोषित था। आईजी एएनटीएफ विकास कुमार ने बताया कि राज्य के नशे के सूत्रधारों कि लिस्ट में शामिल पिछले 6 माह से फरार 25 हजार रुपए के इर्नामी अपराधी जालम सिंह को जालोर से गिरफ्तार किया।
आइजीपी विकास कुमार ने बताया कि जालम सिंह पढ़ा लिखा नहीं है। ऐसे में मजदूरी करने के लिए हिम्मत नगर, गुजरात चला गया। जहां जालम सिंह 16 साल तक बारदाने की मजदूरी का काम कर ईमानदारी की राह पर चलता रहा। अपराधी जालम सिंह कि दोस्ती बारदाने का काम करते-करते एक व्यक्ति से हुई, जिसने उसे नशे के कारोबार में धकेला।
जालम सिंह को उसका दोस्त अवैध मादक पदार्थ एमडी लाकर देता व जालम सिंह एमडी में उसके सहायक पाउडर मिलाकर उसकी मात्रा बढ़ा देता और गुजरात में हिम्मत नगर व उसके आस-पास सप्लाई करता। इस प्रकार जालम सिंह द्वारा उसके दोस्त से खरीदी गई एमडी से जालम सिंह डबल मुनाफा कमा रहा था। आरोपी जालम सिंह धीरे-धीरे बहुत बड़ी मात्रा में एमडी सप्लायर बनकर बड़ी मात्रा में एमडी बनाकर उसको हिम्मत नगर गुजरात में ग्राहकों को पुड़िया बनाकर बेचता था।
एएनटीएफ टीम ने छह माह पूर्व जालोर के भीनमाल में अवैध मादक पदार्थ की तस्करी करते एक युवक को पकड़ा था, युवक से जब एएनटीएफ ने पूछताछ की तो बताया कि यह एमडी जालम सिंह को देनी थी। उस समय जालम सिंह भी एमडी लेने भीनमाल आया हुआ था, लेकिन उसे उसके दोस्त को पुलिस द्वारा पकड़े जाने की सूचना मिल गई और वह वहां से वापिस गुजरात निकल गया। भीनमाल पुलिस द्वारा दर्ज प्रकरण में जालम सिंह का नाम आया व जालम सिंह पुलिस द्वारा पकड़े जाने के डर से अपने घर पर भी आना जाना छोड़ दिया।
जालम सिंह इतना शातिर था कि प्रकरण की खबर लगते ही जालम सिंह ने राजस्थान आने का रास्ता छोड़ दिया व अपने घर आना जाना बंद कर दिया व अपराधी जालम सिंह को पता था कि पुलिस उसे पकड़ने के लिए हिम्मत नगर भी आएगी। पुलिस से बचने को उसने वलसाड़, सुरत, मुम्बई, थाणे, पुणे में अपने परिचितों के यहां फरारी काटी।
जालम ने फरारी काटने समय मोबाईल का भी उपयोग नहीं किया, ताकि पुलिस उसके पास नही पहुंच सके। फरारी के दौरान जहां भी वह जाता लोगों को अपने पास मोबाइल नहीं होने का बताकर घरवालों से बात करने के लिए उनका मोबाईल लेता। अपने घरवालों से मिलने अपने गांव आया व अपने भाई को नया धंधा करवाने के लिए अपने गांव के नजदीक ही थापन गांव में नवदुर्गा नाम से एक होटल खोली और अपने बड़े भाई लालसिंह को बैठा दिया।
जालम सिंह इतना शातिर कि अपनी होटल पर भेष बदलकर आता कुछ समय रुककर होटल के काम-काज देखकर वापिस चला जाता। जालम सिंह अपने परिवार वालों से मिलकर घर पर नहीं रुकता था तथा रूकने के लिए अपने किसी परिचित के यहां चला जाता जिससे वह पुलिस की पकड़ से बचता रहा। जालम सिंह जब राजस्थान आया हुआ था तो उसे किसी मिलने वाले से पता चला कि उसे पकड़ने के लिए ईनाम भी घोषित कर दिया। जालम सिंह वापिस फरारी काटने के लिए राजस्थान छोड़ गुजरात व महाराष्ट्र भाग गया व अपने परिवार वालों से सम्पर्क करना छोड़ दिया।
एएनटीएफ को जानकारी मिली कि जालम सिंह वलसाड व पुणे में फरारी काट रहा है। जिस पर एएनटीएफ टीम वहां पहुंची, लेकिन सफलता नहीं मिली। काफी मशक्कत के बाद एएनटीएफ टीम ने राजस्थान पहुंचते ही जालम सिंह के साथ राजस्थान में तस्करी में साझेदार के रूप में काम कर रहे व्यक्ति से ग्राहक बनकर संपर्क कर बड़ी मात्रा एमडी की खेप खरीदने की बात कही। टीम ने साथ ही जालम सिंह के साझेदार को बताया कि राजस्थान में हम बहुत बड़ी मात्रा में एमडी सप्लाई करना चाहते है, जिससे राजस्थान में एमडी का धंधे का नेटवर्क जम जाए।
टीम को जालम सिंह के साझेदार तस्कर ने कहा कि इसमें मेरा क्या फायदा तब टीम ने कहा कि अगर हमारा राजस्थान में बड़े स्तर पर नेटवर्क जम गया तो हम इसमें तुम्हे पार्टनरशिप देंगे। तब जालम सिंह के साझेदार ने कहा कि मुझे मेरे तस्करी के एक और साझेदार से इस सिलसिले में बात करनी पड़ेगी। कुछ दिन बाद प्लान के अनुसार तस्कर साझेदार ने टीम को सम्पर्क किया व कहा कि उसने जालम सिंह से बात कर ली है। वह प्राइवेट बस से महाराष्ट्र से चलेगा व कल राजस्थान आ जाएगा। एएनटीएफ कि टीम ने उसके पैर राजस्थान की धरती पर पड़े उससे पहले ही उसे पकड़ने के लिए महाराष्ट्र से बालोतरा आने वाली बसों की जानकारी जुटाने लगी।
एएनटीएफ टीम ने बालोतरा से जालोर तक प्राइवेट बसों पर नजर रखते हुए भीनमाल व रानीवाड़ा के बीच कागमाला टोल पर पहुंची व नाका बनाकर मलीनाथ ट्रेवल्स की बस का आने का इंतजार करती रही। कुछ समय बाद मलीनाथ ट्रेवल्स की बस कागमाला टोल पर पहुंची तो टीम ने बस को रुकवाया और बस के अन्दर सवारी सीटों को चैक किया तो अपराधी जालम सिंह के नाम का कोई व्यक्ति बस में नहीं मिला। टीम ने बस के कंडक्टर से सीटों की लिस्ट ली तो सूची में कहीं भी जालम सिंह का नाम नहीं था, लेकिन टीम को पुख्ता सूचना थी व हो ना हो जालम सिंह इसी बस में है। आखिरकार एएनटीएफ की टीम ने आईडी कार्ड की जांच की तो अपराधी जालम सिंह घबरा गया व सारा भेद एएनटीएफ के सामने खोल दिया। अपराधी जालम सिंह ने चैकिंग के दौरान टीम के सदस्यों को पहले अपना नाम जगदीश बताया। आईडी जांच के दौरान जगदीश के पास पहुंची तो पोल खुली। बस से ही जालमसिंह को गिरफ्तार किया।