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Rajasthan News : नर्मदा नहर में 21 दिन में मिले 8 शव, याद आया चर्चित खुदकुशी कांड; जब परिवार के 7 लोगों ने दी थी जान

Narmada Canal: नर्मदा नहर परियोजना में 21 दिन के क्लोजर खुलने के साथ ही नहर में डूबकर लोगों की मौत होने की घटनाएं लगातार सामने आ रही है। घटनाओं ने स्थानीय प्रशासन के साथ साथ नर्मदा की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए है।
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Narmada Canal

नर्मदा नहर। फोटो: पत्रिका

जालोर। नर्मदा नहर परियोजना में 21 दिन के क्लोजर खुलने के साथ ही नहर में डूबकर लोगों की मौत होने की घटनाएं लगातार सामने आ रही है। घटनाओं ने स्थानीय प्रशासन के साथ साथ नर्मदा की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए है। साथ ही नर्मदा नहर में 8 शवों की बरामदगी ने 3 साल पुराना सामूहिक खुदकुशी कांड फिर से याद दिला दिया है, जब एक ही परिवार के 7 लोगों ने अपनी जीवन लीला खत्म कर ली थी।

24 जून को एक ही दिन में नर्मदा मुख्य कैनाल में डूबने से चार लोगों की मौत हो गई, ऐसे में क्लोजर खुलने के बाद अलग अलग वारदातों में करीब 8 लोगों के शव नर्मदा केनाल से बरामद हो चुके हैं, हालांकि कैनाल के दोनो किनारों पर लाइनिंग दीवार का कोई पुख्ता बंदोबस्त नहीं है। वहीं हादसों के बावजूद प्रशासन कोई सबक नहीं ले रहा है। नर्मदा नहर में औसतन हर साल दस से ज्यादा लोगों की डूबने से मौत होती है। हालात यह हैं कि नहर में डूबे व्यक्ति को निकालने में एक से दो दिन का समय तक लग जाता है। ऐसे में संसाधनों के अभाव में नहर में डूबने के बाद व्यक्ति को सुरक्षित निकालना मुश्किल है।

नहीं हो पाई लाइनिंग

विभाग की ओर से मुख्य नहर, माइनर, वितरिका के आस-पास लाइनिंग तक नहीं हो पाई है। वहीं नहर के आस-पास सुरक्षा दीवार का निर्माण भी नहीं कराया गया है। नेहड़ क्षेत्र में दर्जनों मुख्य रास्ते नहर को क्रॉस कर गुजरते हैं। ऐसे में कई बार हादसे हो चुके हैं। कई बार वाहन भी नहर में गिर चुके हैं, लेकिन नर्मदा नहर परियोजना के अधिकारी व प्रशासनिक अधिकारी भी सुरक्षा को लेकर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।

केवल पालड़ी में 45 से ज्यादा डूबे

नर्मदा मुख्य नहर उपखंड क्षेत्र सांचौर में सीलू ग्राम से प्रवेश करती है और डेडवा गांव तक गुजरती है। सांचौर उपखंड क्षेत्र में पालड़ी ग्राम में 45 से ज्यादा लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है। मार्च 2023 में पालड़ी सरहद में एक व्यक्ति ने पांच बच्चों के साथ नहर में कूदकर जान दे दी थी। मृतकों की पहचान शंकरलाल कोली (32 वर्ष), पत्नी बादली (30 वर्ष) और उनके पांच बच्चे ( उम्र 1 से 12 वर्ष) निवासी गालीफा जिला बाड़मेर के रूप में हुई थी। सामूहिक खुदकुशी कांड के पीछे की वजह पति—पत्नी का झगड़ा सामने आया था।

नहर में डूबने से हुई मौतों का आंकड़ा

वर्षमौतों की संख्या
20137
201413
201514
20166
20179
201814
20196
202021
202113
202211
202318
20249
202513
2026*12 (अब तक)

बाहर से बुलाते हैं तैराक

नहर में डूबे व्यक्ति को बचाने के लिए सुरक्षा उपकरणों की जरूरत रहती है, लेकिन प्रशासन के पास कोई व्यवस्था नहीं है। जबकि वाटर विजन कैमरा, वाटर विजन टॉर्च, लाइफसेविंग जैकेट, फाइबर रस्से, हाईविजन टॉर्च, पानी में जालियां, तलाशी के लिए सिस्टम, प्रशिक्षित गोताखोर, मोटर नाव, वाटर गैज मीटर, एम्बुलेंस, पेट्रोलिंग वाहन आदि की जरूरत रहती है। लेकिन पर्याप्त संसाधनों के अभाव में कई बार प्रशासन व पुलिस को नहर में डूबे लोगों को खोजने में दो दिन से अधिक का समय लग जाता है। नहर के दोनों ओर सड़क बनी होने से लोग शॉर्टकट के चक्कर में नहर मार्ग से सीधे जाने का प्रयास करते हैं, लेकिन नहर व सड़क के बीच कोई सुरक्षा दीवार या डिवाइडर नहीं होने से कई बार वाहन नहर में गिर चुके हैं।

यह है डेथ पॉइंट

नर्मदा मुख्य केनाल पर तीन प्रमुख जगह डेथ पॉइंट बने हुए हैं। जिसमें डभाल पुलिया, सिधेश्वर पुलिया व डेडवा सरहद में बना पुलिया शामिल है। ये अभी सबसे बड़े डेथ जॉन बने हुए हैं।

इनका कहना

नर्मदा मुख्य केनाल के दोनों ओर सुरक्षा दीवार का कोई प्रावधान नहीं है। सांचौर जिला बना तब नहर की सुरक्षा दीवार को लेकर तत्कालीन जिला कलक्टर के निर्देशन पर बजट के लिए प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया था, राज्य सरकार से बजट की स्वीकृति मिल जाती है तो उस पर काम शुरू हो जाएगा।
-अनिल कैथल, अधिशासी अभियंता नर्मदा नहर परियोजना सांचौर