Jalore Crime News: जालोर जिले के सांचौर क्षेत्र में एएनटीएफ ने नशा तस्करों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 30 हजार रुपए के इनामी अपराधी मनोहरलाल विश्नोई को गिरफ्तार किया है।
जालोर। नशे के कारोबारियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने सांचौर क्षेत्र में एक ही दिन में तीन बड़ी कार्रवाइयां कर महत्वपूर्ण सफलता हासिल की। ऑपरेशन "मदमंजुल" के तहत तीन साल से फरार चल रहे 30 हजार रुपए के इनामी अपराधी मनोहरलाल विश्नोई को गिरफ्तार किया गया। वहीं, अलग-अलग कार्रवाइयों में गांजा और स्मैक बरामद कर दो आरोपियों को भी दस्तयाब किया गया। एक मोटरसाइकिल भी जब्त की गई है।
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एएनटीएफ के पुलिस महानिरीक्षक विकास कुमार ने बताया कि अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस दिनेश एमएन के निर्देशन में प्रदेशभर में मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में जालोर चौकी की टीम ने सांचौर क्षेत्र में लगातार कार्रवाई करते हुए तीन मामलों का खुलासा किया। पहली कार्रवाई में पुलिस अधीक्षक जालोर एवं नागौर की ओर से घोषित 30 हजार रुपए के इनामी अपराधी मनोहरलाल विश्नोई निवासी लियादरा (जालोर) को गिरफ्तार किया गया। आरोपी पिछले तीन साल से फरार चल रहा था और पुलिस की पकड़ से दूर था।
आरोपी चाहे जेल में रहा हो या फरार चलता रहा हो, उसका स्थायी ठिकाना सांचौर स्थित मोटर गैराज हमेशा संचालित रहा। आरोपी मनोहर ने गैराज पर ध्यान केंद्रित किया और अपने विश्वस्त कर्मचारी के माध्यम से गैराज का कारोबार बढ़ाने में लगा रहा। पूछताछ में एएनटीएफ को मनोहर के गैराज के आसपास आने की संभावना की सूचना मिली। इसके बाद सुबह से ही एएनटीएफ की टीमें गैराज के आसपास घेराबंदी कर बैठ गईं और मनोहर के आने का इंतजार करने लगीं। निर्धारित समय पर मनोहर के पहुंचते ही टीमों ने उसे मौके से दबोच लिया।
मनोहर ने छठी कक्षा के बाद ही पढ़ाई छोड़ दी और कमाने की कोशिश में लग गया। पहले महाराष्ट्र के दादर में कपड़ों की दुकान पर काम किया, फिर मुंबई की मेटल मार्केट में चार साल तक नौकरी की। बाद में वह सांचौर लौट आया और एक गैराज में कर्मचारी के रूप में काम करते हुए इस कारोबार के गुर सीख लिए। इसके बाद उसने अपनी कमाई के बल पर बजरंग मोटर गैराज के नाम से वाहनों की मरम्मत का बड़ा गैराज शुरू किया।
इस गैराज में मनोहर ने चोरी के वाहनों के कारोबार में हाथ डाला और अच्छी कमाई की। वर्ष 2017 में चोरी के एक वाहन के मामले में उसका नाम सामने आया और उसे 15 दिन जेल में भी रहना पड़ा। इसके बाद उसने अपने गैराज को अवैध गतिविधियों का केंद्र बना लिया और वहां से नशीले पदार्थों की सप्लाई तथा कमीशन का धंधा बड़े पैमाने पर शुरू कर दिया। मादक पदार्थ बनाने वाले, ग्राहक, वितरक और ट्रांसपोर्टर सभी का जमावड़ा उसके गैराज पर रहता था। यहीं माल की खरीद-फरोख्त होती और आगे सप्लाई की जाती थी। इस धंधे से आरोपी ने भारी धन अर्जित किया। गुजरात तक के व्यापारी भी उसके गैराज पर आकर सौदे करते थे।
पुलिस महानिरीक्षक विकास कुमार ने बताया कि अपने नौ साल के आपराधिक करियर में मनोहर के खिलाफ कई मामले दर्ज हुए। पहला मामला वर्ष 2017 में चोरी के वाहन से संबंधित था, जिसमें उसे जेल भी जाना पड़ा। इसके बाद जालोर जिले के करड़ा थाने में स्मैक तस्करी का मामला दर्ज हुआ। स्मैक के बाद उसने गुजरात से एमडी लाकर उसकी आपूर्ति का बड़ा नेटवर्क तैयार किया, जो लंबे समय तक संचालित रहा। राजस्थान में एमडी के जहर को शुरुआती दौर में फैलाने वाले प्रमुख तस्करों में मनोहर का नाम भी शामिल रहा।
वर्ष 2021 में हुई सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा घोटाले में भी मनोहर का नाम प्रमुखता से सामने आया। इस संबंध में एसओजी में दर्ज प्रकरण संख्या 10/24 में भी वह वांछित और फरार चल रहा है। अपने काकाई साले गोपीराम और उसकी पत्नी विमला को बीकानेर सेंटर पर परीक्षा दिलाने के लिए मनोहर ही लेकर गया था। गोपीराम का कथित रूप से फर्जी तरीके से सब इंस्पेक्टर पद पर चयन हो गया था और वह प्रशिक्षण भी ले रहा था। बाद में घोटाले के तार जुड़ने पर गोपीराम और उसकी पत्नी विमला को एसओजी ने गिरफ्तार कर लिया। इसी मामले में मनोहर भी वांछित चल रहा था।