जालोर

Quinoa Crop: राजस्थान में यहां फल-फूल रही अमेरिकी औषधीय फसल किनोवा की खेती, किसान हो रहे मालामाल

जालोर जिले के सायला उपखण्ड क्षेत्र का बावतरा गांव इन दिनों अमेरिकी औषधीय फसल किनोवा की सफल खेती के लिए चर्चा में है।

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Jan 11, 2026
अमेरिकी औषधीय फसल किनोवा की खेती। फोटो: पत्रिका

जालोर। जालोर जिले के सायला उपखण्ड क्षेत्र का बावतरा गांव इन दिनों अमेरिकी औषधीय फसल किनोवा की सफल खेती के लिए चर्चा में है। बदलती कृषि तकनीक में यहां के किसानों ने किनोवा को नए विकल्प के रूप में अपनाया है, जिससे अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। गांव में किनोवा की बढ़ती मांग को देखते हुए प्रोसेसिंग यूनिट भी स्थापित की गई है, जो स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर खोल रही है।

बावतरा के किसान अर्जुनसिंह राजपुरोहित और अन्य किसानों के खेतों में इन दिनों किनोवा की फसल लहलहा रही है। किनोवा की बुवाई अक्टूबर में की जाती है, जबकि कटाई फरवरी व मार्च के बीच पूरी होती है। सामान्यत: एक बीघा भूमि में 6 से 8 क्विंटल तक उत्पादन मिल रहा है। कच्चे माल (रॉ किनोवा) की कीमत 50 से 80 रुपए प्रति किलो तक रहती है। बावतरा और आसपास के क्षेत्रों में 500 से अधिक किसान किनोवा की खेती कर रहे हैं।

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लाल-सफेद किस्म की खेती

बावतरा क्षेत्र के किसानों ने बताया कि यहां पर लाल और सफेद किस्म की फसल सबसे ज्यादा उगाई जाती है। वहीं काला किनोवा और तीनों किस्मों का मिश्रित त्रिरंगा भी कुछ किसान उगा रहे हैं। इस फसल की विशेषता यह है कि यह उष्ण कटिबंधीय जलवायु में भी अच्छी तरह पनपती है और कम पानी में भी बढ़िया उत्पादन देती है।
प्रोसेसिंग यूनिट में होती है साफ सफाई

बावतरा में स्थापित प्रोसेसिंग यूनिट में कच्चे किनोवा को साफ-सफाई और प्रसंस्करण के बाद खाने योग्य सामग्री में बदलकर बाजार में भेजा जाता है। यहां से उत्पाद राजस्थान, देश के अन्य हिस्सों और विदेशों तक निर्यात किए जा रहे हैं। इससे स्थानीय किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से भी जुड़ने का अवसर मिला है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रोसेस्ड किनोवा की कीमत 5 हजार से 25 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच जाती है, जिससे किसानों की आय में बड़ा इजाफा हो रहा है।

2012 में की शुरूआत

बावतरा के किसान रमेशसिंह राजपुरोहित ने बताया कि वे 2009-10 के दौरान हैदराबाद में व्यवसाय करते थे। उस समय इन्होंने अनंतपुर में किनोवा की खेती को करीब से देखा। 2012 में बावतरा में आयोजित एक जैविक खेती प्रोत्साहन कार्यक्रम के बाद उन्होंने यहां किनोवा को नयी फसल के रूप में शुरू करने का प्रयास किया। आज गांव व आसपास के करीब 500 किसान किनोवा उगाकर उसे प्रोसेसिंग यूनिट में बेचते हैं। जालोर सहित अन्य जिलों से भी यहां कच्चा माल खरीद के लिए आता है, जिसे प्रोसेस कर विदेशों में भेजा जाता है।

सुपरफूड है किनोवा

किनोवा को सुपरफूड माना जाता है। इसमें आयरन, कैल्शियम, विटामिन-ई, विटामिन-बी3 सहित कई पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। विदेशों में इसे भोजन, खिचड़ी, सलाद और दवा निर्माण में उपयोग किया जाता है। पोषण मूल्य अधिक होने से इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

इनका कहना…

क्षेत्र के किसानों को किनोवा की खेती रास आ रही है। मेरे साथ डेढ़ हजार से अधिक किसान कॉन्ट्रेक्ट खेती से जुड़े हुए है। समय-समय पर हम किसानों का मार्गदर्शन करते है। यहां की जलवायु किनोवा के लिए उपयुक्त है।
-रमेशसिंह राजपुरोहित, प्रगतिशील किसान, बावतरा

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