
Jalore Jahanavi Firing Case: जालोर जिले में सरवाना थाना क्षेत्र के जानवी गांव में 23 अगस्त को रास्ता रोककर की गई फायरिंग के मामले में पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल की गई कैंपर गाड़ी भी जब्त की है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान वीराराम विश्नोई (45) निवासी रणोदर, थाना चितलवाना के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपी को प्रकरण संख्या 119/24 अगस्त 2026 में बीएनएस की विभिन्न धाराओं और आर्म्स एक्ट के तहत गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे पुलिस रिमांड पर लिया गया है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी से पूछताछ की जा रही है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि फायरिंग की वारदात में अन्य आरोपियों की क्या भूमिका थी और उन्हें हथियार व वाहन समेत अन्य संसाधन किस तरह उपलब्ध हुए। इस मामले में पुलिस पूर्व में कमलेश विश्नोई निवासी डडूसन, थाना सरवाना को भी गिरफ्तार कर चुकी है।
जानकारी के अनुसार, 23 अगस्त को धोलाराम और नरेश कुमार सरहद सुजाननगर-जानवी क्षेत्र से गुजर रहे थे। इसी दौरान कमलेश विश्नोई और उसके साथियों ने दोनों को रास्ते में रोक लिया। आरोपियों ने दोनों से विवाद के बाद अचानक फायरिंग शुरू कर दी। इस दौरान एक गोली नरेश कुमार के गले में जा लगी। गोली लगने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
फायरिंग की घटना के बाद इलाके में दहशत फैल गई। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी अपने मोबाइल फोन बंद कर मौके से फरार हो गए थे। घटना की सूचना मिलने पर सरवाना थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू की। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और अन्य जानकारी के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने के प्रयास किए। जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में फायरिंग के पीछे सामाजिक विवाद सामने आया है। जांच में सामने आया कि घायल नरेश कुमार ने गांव से एक लड़की को भगाने में एक युवक की मदद की थी। बताया जा रहा है कि संबंधित युवक पहले भी इसी तरह की घटना में सहयोग कर चुका था। इसी बात को लेकर लड़की के परिजनों में नाराजगी थी।
पुलिस अब इस विवाद को फायरिंग की वारदात से जोड़कर जांच कर रही है। हालांकि, मामले में विवाद की वास्तविक वजह और सभी आरोपियों की भूमिका का पूरी तरह खुलासा पुलिस की पूछताछ और अनुसंधान पूरा होने के बाद ही हो सकेगा।
फायरिंग के मामले में पिस्टल की बरामदगी के बाद जालोर में अवैध हथियारों की सप्लाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वारदात में इस्तेमाल हथियार आरोपियों तक कहां से पहुंचा। जांच का एक अहम पहलू हथियार उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क तक पहुंचना भी है।
जालोर में इससे पहले भी फायरिंग की घटनाओं में पिस्टल और देशी कट्टों के इस्तेमाल के मामले सामने आते रहे हैं। वर्ष 2019 में एसओजी की कार्रवाई में मध्यप्रदेश के धार से हथियार लाकर जालोर क्षेत्र में सप्लाई करने का मामला सामने आया था। उस दौरान तीन हथियार तस्करों से 10 पिस्टल और 45 जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे।
इस कार्रवाई से जालोर में दूसरे राज्यों से जुड़े अवैध हथियार सप्लाई नेटवर्क की आशंका सामने आई थी। अब जानवी फायरिंग मामले में पुलिस आरोपियों से पूछताछ के जरिए वारदात में शामिल अन्य लोगों, हथियार की सप्लाई और पूरे नेटवर्क से जुड़ी जानकारी जुटाने में लगी है।