जालोर

जालोर में सड़कों पर नियम विरूद्ध बेलगाम दौड़ रहे ट्रैक्टर, हर पल सताता है हादसे का डर

जालोर जिले के आहोर क्षेत्र में कृषि कार्य के लिए पंजीकृत ट्रैक्टरों का धड़ल्ले से व्यावसायिक उपयोग हो रहा है। ट्रैक्टर चालक यातायात नियमों की अनदेखी कर सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिससे हादसों में इजाफा हो रहा है। परिवहन व पुलिस विभाग की अनदेखी से स्थिति गंभीर बनी हुई है।

2 min read
Jan 16, 2026
आहोर में एक ट्रैक्टर-ट्रॉली में बाहर की तरफ लटक रहे लोहे के पाइप (फोटो- पत्रिका)

आहोर (जालोर): दिन-ब-दिन तेजी से बढ़ रहे सड़क हादसों के ग्राफ को कम करने को लेकर परिवहन और पुलिस विभाग के तमाम प्रयासों के बावजूद वाहन चालक यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाने से बाज नहीं आ रहे हैं। कृषि क्षेत्र में उपयोग में आने वाले ट्रैक्टरों का जहां पिछले लंबे समय से विभागीय नियमों के विरूद्ध व्यावसायिक उपयोग काफी बढ़ गया है।

वहीं, विभागीय अनदेखी के चलते ट्रैक्टर चालकों की ओर से यातायात नियमों की खुलेआम अवहेलना की जा रही है, जिसकी वजह से सड़क हादसों में इजाफा हो रहा है। लेकिन विभाग द्वारा इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

ये भी पढ़ें

हनुमानगढ़ के हरिपुरा में बुजुर्ग की मौत पर बवाल, ग्रामीणों के सनसनीखेज आरोप, राजनीतिक साजिश से गरमाया मामला

दरअसल, सरकारी नियमों के अनुसार ट्रैक्टरों का कृषि क्षेत्र में ही उपयोग होना चाहिए। जबकि वास्तविकता इससे काफी परे है। ट्रैक्टरों का नियम के अनुसार, कृषि क्षेत्र में उपयोग होने के साथ इनका नियम विरूद्ध व्यावसायिक उपयोग भी जोरों पर हो रहा है। लेकिन परिवहन और पुलिस विभाग इससे बेखबर है।

मजे की बात तो यह है कि ट्रैक्टर संचालकों की ओर से कृषि उपयोग के ट्रैक्टरों का व्यावसायिक उपयोग करने के साथ यातायात नियमों की भी जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, जिसका ही यह परिणाम है कि सड़क हादसों में कमी आने की बजाय इसमें दिनों दिन इजाफा होता जा रहा है।

इसमें हो रहा व्यवसायिक उपयोग

शहर समेत क्षेत्र में पिछले लंबे समय से ट्रैक्टरों का व्यावसायिक उपयोग जोरों पर हो रहा है। ट्रैक्टरों का सर्वाधिक व्यावसायिक उपयोग मकान निर्माण कार्यों के तहत हो रहा है। मकान निर्माण कार्यों के तहत ईंट, बजरी, पत्थर, रफ, पानी के टैंकर, कंकरीट, मिट्टी, पाइप, सीमेंट के ड्रम आदि सामान लाने-ले जाने में ट्र्रैक्टरों का व्यावसायिक धड़ल्ले से हो रहा है।

ट्रैक्टर संचालक नियम विरूद्ध व्यावसायिक उपयोग कर चांदी काट रहे हैं। सड़कों पर सरपट दौड़ने वाले ट्रैक्टर रात्रि के समय एक लाइट के सहारे चलते हैं। वहीं, कई ट्रैक्टरों पर दो की बजाय तीन लाइटें जलती नजर आती हैं। इसके अलावा कई ट्रैक्टरों के पीछे बंधी ट्रालियों पर रिफ्लेक्टर का अभाव है। पाइप, लोहे के सरिए, सीमेंट के ड्रम समेत अन्य सामान का काफी हिस्सा ट्रॉली से बाहर ही रहता है।

कई ट्रैक्टर चालक जमा नहीं करवाते वाणिज्यिक कर

कई ट्र्रैक्टर चालक ट्रैक्टरों का कृषि क्षेत्र के साथ नियम विरूद्ध व्यावसायिक उपयोग तो करते हैं, लेकिन इसका वे नियमानुसार परिवहन विभाग में वाणिज्य कर जमा नहीं करवाते हैं। पूर्व में वाणिज्य कर करीब 15 से 18 हजार रुपए सालाना होता था। लेकिन वर्तमान में सरकार ने नए नियम लागू करते हुए वाणिज्य कर भी पहले से बेहद कम कर दिया है।

नए नियम के तहत अब ट्रैक्टर मालिक को ट्रॉली को व्यवसायिक उपयोग में लेने के लिए विभाग में ट्रैक्टर की कुल कीमत का मात्र एक प्रतिशत टैक्स एक बार ही जमा करवाना होता है। इसके बावजूद कई ट्रैक्टर संचालक टैक्स राशि जमा नहीं करवाकर नियम विरूद्ध ही ट्रैक्टरों का व्यावसायिक उपयोग कर रहे हैं।

ये भी पढ़ें

डूंगरपुर नगर परिषद का नवाचार, कचरा संग्रहण के लिए सीएनजी और पेट्रोल के 8 नए वाहन शुरू

Published on:
16 Jan 2026 11:37 pm
Also Read
View All

अगली खबर