Jalore News: जालोर में बारिश के दौरान अधिकांश कॉलोनियां जलमग्न हो जाती हैं, लेकिन जल निकासी का कोई स्थाई समाधान नहीं हो रहा है।
Jalore News: सांचौर नगर परिषद क्षेत्र में सरकारी जमीन पर नियम विरूद्ध पट्टे जारी करने का मामला विधानसभा में गूंजने के बाद नगर परिषद की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। सांचौर नगर परिषद क्षेत्र में 35 बीघा नाला एवं करीबन 171 बीघा नाडियां राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज थी, लेकिन नियम विरूद्ध नगर पालिका ने मिलीभगत से पट्टे जारी कर दिए। नगर पालिका की मिलीभगत के चलते भूमि की किस्म बदलते ही लोगों ने उस पर अवैध रूप से कब्जे भी कर लिए, जिसका असर यह हुआ कि नाडी व नालों की जमीन खत्म होते ही बाढ़ का पानी शहर में घुस गया।
वर्ष 2015 व 2017 में आई भीषण बाढ़ के दौरान शहरवासियों को काफी नुकसान हुआ था। दुकानों, कॉलोनियों व घरों में बाढ़ का पानी घुस जाने से शहर के लोगों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। शहरवासियों की ओर से जिला कलक्टर व राज्य सरकार से कई बार समस्या से निजात दिलाने की मांग करने के बावजूद भी कोई समाधान नहीं निकला। ऐसे में अब बारिश के दौरान शहर में कई दुकानों में पानी घुस जाता है। अधिकांश कॉलोनियां जलमग्न हो जाती हैं, लेकिन जल निकासी का कोई स्थाई समाधान नहीं हो रहा है।
बारिश के दौरान आधा जालोर शहर डूब जाता है। नाले व नाडी की भूमि की किस्म परिवर्तन करने के बाद शहर की समस्या दिनों दिन विकराल होती जा रही है। तालाब की जगह अतिक्रमण हो जाने से निकासी नहीं हो रही है। वहीं नालों के बहाव क्षेत्र में पट्टे जारी होने से पानी की निकासी नहीं होने से बाढ़ का पानी रास्ता बदलकर कॉलोनियों में घुस जाता है।
नगर परिषद के राजस्व रिकॉर्ड में प्रथम सेटलमेंट में 35 बीघा नाला की जमीन थी। वहीं नाडियों के 171 बीघा राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज थी, जिसके 8 खसरे दर्ज थे। वर्तमान में बोरला नाडी क्षेत्र, रानीवाड़ा रोड, डाउडा तालाब, बडसम पुलिया क्षेत्र सहित चिन्हित क्षेत्र है जो राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज थे, लेकिन द्वितीय सेटलमेंट 1986 में कुछ नाडियों को छोड़कर 160 बीघा भूमि की किस्म बदल गई। इसी प्रकार 35 बीघा नाले की भूमि की किस्म बदल दी गई, जिसकी आड में कई लोगों ने अवैध कब्जे करके पट्टे बनाकर कच्चे व पक्के मकान भी बना लिए।
नगर परिषद क्षेत्र में नाडी, नालों की जमीन की किस्म परिवर्तन कर पट्टे जारी करने व बारिश-बाढ़ के पानी से शहर में हर बार होने वाले नुकसान का मुद्दा विधानसभा में विधायक जीवाराम चौधरी ने उठाते हुए स्थायी समाधान की मांग की। वहीं पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सांचौर आगमन पर स्थानीय व्यापारियों व जनप्रतिनिधियों ने भी हर बार बाढ़ व बारिश के पानी से शहर को होने वाले नुकसान को लेकर स्थायी समाधान की मांग की थी, लेकिन अभी तक कोई स्थाई समाधान नहीं निकला।