jammu kashmir : पुलिस ने गहन तलाशी के दौरान कई किताबों की दुकानों का निरीक्षण किया गया और प्रतिबंधित किताबों की कई प्रतियां बरामद की गईं। बाद में उन्हें जब्त कर लिया गया। ये किताबें कानूनी नियमों का उल्लंघन करती पाई गईं।
jammu kashmir : जम्मू-कश्मीर पुलिस ने शनिवार को उत्तरी कश्मीर के हंदवाड़ा उप-जिले में किताबों की दुकानों पर कई छापे मारे और प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी का साहित्य जब्त किया। पुलिस ने हंदवाड़ा में एक दिन पहले मारे गए छापे में श्रीनगर में 668 किताबें जब्त की थीं जो कथित तौर पर एक प्रतिबंधित संगठन की विचारधारा को बढ़ावा दे रही थीं। jammu kashmir पुलिस कहा कि एक सुव्यवस्थित और कानूनी रूप से निगरानी वाले अभियान के दौरान जमात-ए-इस्लामी से जुड़े प्रतिबंधित साहित्य के प्रसार को रोकने के लिए हंदवाड़ा में विभिन्न किताबों की दुकानों में कड़ी जांच की। jammu kashmir पुलिस ने कहा कि जांच कानून के प्रावधानों के अनुसार की गई थी जिसमें क्रालगुंड, विलगाम, कलमाबाद, हंदवाड़ा शहर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया गया था।
पुलिस ने बताया कि अभियान का उद्देश्य गैरकानूनी सामग्री के प्रसार को रोकना था जो सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ सकती है। उनकी टीमों ने कानून का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए सावधानीपूर्वक और व्यवस्थित तरीके से अभियान चलाया। किताबों की दुकान के मालिकों को प्रतिबंधित साहित्य को स्टॉक करने, बेचने या वितरित करने के खिलाफ स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई थी। उन्हें ऐसी सामग्री के प्रसार में शामिल होने के कानूनी निहितार्थों के बारे में भी जागरूक किया गया और दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया।
पुलिस ने कहा कि मामले में आगे की जांच चल रही है और कानून का उल्लंघन करने के दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। केंद्र सरकार ने 28 फरवरी 2019 को जमात पर प्रतिबंध लगा दिया था। जमात के कई नेताओं ने पिछले साल विधानसभा चुनाव निर्दलीय उम्मीदवारों के रूप में लड़ा था।
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पुलिस की इस कार्रवाई पर मुख्यधारा और अलगाववादी नेताओं की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के नेता और श्रीनगर से सांसद रूहुल्लाह मेहदी ने कहा कि सबसे पहले अधिकारियों ने जामिया मस्जिद में शब-ए-बारात की नमाज़ पर रोक लगा दी और मस्जिद को ही सील कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर यह पर्याप्त नहीं था तो मौलाना मौदूदी के लिखे गए साहित्य को पुलिस की ओर से जब्त करने की खबरें हैं। क्या अब राज्य यह तय करेगा कि कश्मीरी क्या पढ़ें, क्या सीखें और क्या मानें, यह अस्वीकार्य अतिक्रमण है। अगर ऐसा कोई आदेश है तो उसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। राज्य को कश्मीरियों को परेशान करना और उनके धार्मिक मामलों में दखल देना बंद करना चाहिए क्योंकि इस लापरवाह हरकत की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
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हुर्रियत के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने कहा कि किताबें जब्त करना बेतुका है।
इस्लामिक साहित्य पर नकेल कसना और उन्हें किताबों की दुकानों से जब्त करना निंदनीय है लेकिन हास्यास्पद है। वर्चुअल हाईवे पर सभी सूचनाओं तक पहुंच के समय में किताबों को जब्त करके पुलिस की ओर से विचारों पर नियंत्रण करना बेतुका है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) नेता इल्तिजा मुफ्ती ने शुक्रवार को श्रीनगर में 668 किताबें जब्त किए जाने के बाद छापेमारी को 'क्रूरतापूर्ण' करार दिया था।