अब भी 25 फीसदी काम बाकी
जांजगीर-चांपा. जिले में हाउसिंग बोर्ड का काम बेहद बदतर स्थिति में है। अधिकारियों में घटिया कार्यप्रणाली के चलते डेढ़ साल बाद भी इडब्ल्यूएस के 30 मकान पूरा नहीं बन पाया है। काम अभी 75 फीसदी भी नहीं हो पाने से ऐसा प्रतीत हो रहा मानो मकान को हैंडओवर होने में अभी और दह माह लगेंगे।
वहीं हितग्राही अपने मकान को हैंडओवर लेने के लिए दफ्तर के चक्कर काटने मजबूर हैं, लेकिन अफसर जिला मुख्यालय में रहते नहीं। इसके कारण किसी से संपर्क नहीं हो पाता। आखिरकार हितग्राहियों को सस्ता मकान का सपना पूरा नहीं हो पा रहा है।
जनवरी 2017 में हाउसिंग बोर्ड ने हाउसिंग बोर्ड ने हसदेव विहार कालोनी में इडब्ल्यूएस के 30 मकान व एलआईजी टाइप 10 मकान बनाने की योजना बनाई थी। योजना के तहत सारी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई। इसके बाद मकान बनना शुरू भी हो गया, लेकिन मकान निर्माण की मंथर गति को देख कछुवा भी शर्मा गया है।
डेढ़ साल में मकान का केवल ढांचा बन पाया है। मकान में न तो फिनिसिंग हो पाई है और न ही दरवाजा खिड़की लग पाया है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि मकान को बनने में और कितना समय लगेगा। बड़ी बात यह है कि जो मकान अब तक बनकर तैयार हुआ है वह भी बेहद घटिया स्तर का है।
मकान में बारिश का पानी टपक रहा है। दीवारों में दरारें आ गई है। फर्स उखड़ रहे हैं। इससे मकान स्वामियों को यह मकान घाटे का सौदा लग रहा है। मकान में तनिक भी क्वालिटी नहीं है। हाउसिंग बोर्ड मकान स्वामियों से छह लाख 36 हजार रुपए गिना चुकी है, लेकिन डेढ़ साल बाद भी उनके हाथ खाली है और मकान हैंडओवर नहीं हो पाया है। ऐसे में मकान स्वामियों का सपनों का घर बेहद दूर लग रहा है।
अभी से चल रहा अतिक्रमण का दौर
हाउसिंग बोर्ड के मकान अभी हैंडओवर नहीं हो पाए हैं और कई मकान मालिक अभी से अतिक्रमण करने और नई ड्राइंग डिजाइन बनाने में तुले हुए हैं। हद तो तब हो जा रही है जब कई मकान मालिक रसूखदारी का धौंस दिखाते हुए मकान में अतिक्रमण करने में तुले हुए हैं। अतिक्रमण कर उक्त कालोनी के सड़क, नाली की दिशा भी बदल रहे हैं। जिससे अन्य मकान मालिकों को भविष्य में परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। इस बात की चिंता यहां रहने वाले लोगों को अभी से सता रही है।
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दबाव में हाउसिंग बोर्ड के कर्मचारी
सूत्रों का कहना है कि हाउसिंग बोर्ड के अफसर ऐसे चंद रसूखदारों के दबाव में आकर उन्हीं के दिशा निर्देश में काम कर रहे हैं। जिसे लेकर कलेक्टर से कई बार शिकायत भी की जा चुकी है। इसके बाद भी अफसरों को फर्क नहीं पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि कलेक्टोरेट का एक बाबू इडब्ल्यूएस में मकान खरीदा है। जो अपने हिसाब से मकान के इर्द गिर्द कब्जा करने में तुला हुआ है। जिसे लेकर लोगों ने आपत्ति दर्ज की है।
सैप्टिक टैंक का नहीं पुख्ता इंतजाम
बताया जा रहा है कि हाउसिंग बोर्ड इडब्ल्यूएस के 30 मकान तो बना रहा है, लेकिन इन मकानों के लिए सैप्टिक टैंक के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं कर पाई है। इसके चलते मकान मालिकों को भविस्य में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। मकान मालिकों ने इस आशय की शिकायत भी हाउसिंग बोर्ड के अफसरों को दर्ज करा दी है। इसके बाद भी अफसरों के कान में जूं तक नहीं रेंग रही है।
जांजगीर में ड्यूटी, अंबिकापुर निवास
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि हाउसिंग बोर्ड के एसडीओ एसपी सिंह जांजगीर में नहीं रहते। उनका निवास अंबिकापुर है। वे सप्ताह में एक दिन यानी सोमवार को जांजगीर आते हैं और दौरा कर फिर अंबिकापुर चले जाते हैं। इसके चलते हसदेव विहार कालोनी के हजारों लोगों की फरियाद धरी की धरी रह जाती है। हसदेव विहार कालोनी बिजली पानी सहित कई तरह की शिकायत रहती है जिसे दूर करने उनके पास जाते हैं, लेकिन उनका दर्शन दुर्लभ होता है। क्योंकि वे अंबिकापुर में रहते हैं।
-मकान पूरी तरह बनकर तैयार है। कुछ दिनों बाद हैंडओवर व रजिस्ट्री की जाएगी। पूरी प्रक्रिया होने के बाद शिकायतों व अन्य समस्याओं पर चर्चा की जाएगी।
-एके नीखरा, ईई छग गृह निर्माण मंडल