- परिजनों ने कहा स्वस्थ बच्चे को दूसरे को देकर, उनके बच्चे को बताया मृत
जांजगीर-चांपा. जिला मुख्यालय अपना अस्पताल चलाने वाले शिशुरोग विशेषज्ञ डॉ. आरएस प्रसाद पर सोमवार रात बच्चा बदलने का आरोप लगाकर परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। मृत बच्चे के पिता का आरोप था कि जिला अस्पताल से एक स्वस्थ नवजात बच्चे को गंभीर बताकर बिना परिजनों से पूछे सीधे डॉ. प्रसाद के अस्पताल भेज दिया गया। यहां डॉ. प्रसाद ने बच्चे की दिमाग में चोट आने की बात कहकर उसे वेंटिलेटर में रखा। दो दिन तक इलाज के दौरान परिजनों ने जब अधिक खर्च कर सकने में असमर्थता जताई तो डॉक्टर ने सोमवार शाम को बच्चे को मृत बता दिया।
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परिजनों का आरोप है कि एक स्वस्थ बच्चा अचानक कैसे मर सकता है। उन्होंने डॉक्टर प्रसाद पर उनका बच्चा बदलकर दूसरे को देने और उन्हें मृत बच्चा देने का आरोप लगाया है। वहीं डॉ. प्रसाद का कहना है कि बच्चे को इलाज के दौरान एसएनसीयू में रखा गया था और उसकी उनके पास पूरी वीडियो रिकार्डिंग भी है।
जानकारी के मुताबिक जांजगीर थाना अंतर्गत उदबंद गांव के निवासी पंचराम की पत्नी सविता बाई ने 22 सितंबर को एक बेटे को जिला अस्पताल में जन्म दिया था। पंचराम का कहना है कि अचानक जिला अस्पताल की नर्स बच्चे को गंभीर बताते हुए खुद ही उसे लेकर डॉ. प्रसाद के अस्पताल ले आई।
यहां डॉक्टर ने बच्चे को गंभीर बताते हुए पहले तो भर्ती करने से मना किया और बाद में जब परिजनों ने रुपए की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया तो डॉक्टर ने बच्चे को एसएनसीयू में रख दिया। परिजनों का आरोप है कि नर्स को पहले परिजनों से सलाह करनी थी, लेकिन कमीशन के लालच में वह सीधे बच्चे को प्रसाद डॉक्टर के पास ले गई। यहां डॉ. आरएस प्रसाद ने बच्चे के बचने की कम संभावना बताते हुए उनके बच्चे को दो दिन बाद मृत बता दिया और उनके स्वस्थ बच्चे को दूसरी दंपति को बेच दिया है। परिजनों ने मांग की उन्हें उनका बच्चा दिया जाए और इसे लेकर पूरी रात अस्पताल में हंगामा चलता रहा।
डॉ. प्रसाद ने दिया गैर जिम्मेदाराना जवाब
जहां एक तरफ बच्चे की मौत से परिजन काफी रोष में थे और उनकी आंखे नम थीं वहीं डॉ. प्रसाद अपने क्लीनिक में व्यस्त थे और काफी खुश दिख रहे थे उन्हें बच्चे की मौत का भी गम नहीं था। सवाल पूछने पर उन्होंने साफ कहा कि बच्चा सीरियस था। उसके सिर में चोट थी।
इलाज के दौरान मर गया, परिजनों को सूचित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि उनके यहां तो इलाज के दौरान कई बच्चे मरते हैं तो सबकी जिम्मेदारी वह नहीं ले सकते। इतना ही नहीं डॉ. प्रसाद ने बच्चा बदलने के आरोप को पूरी तरह खारिज करते हुए परिजनों को पुलिस में शिकायत करने की सलाह तक डे डाली। उनका कहना है कि जांच में बच्चे का डीएनए चेक होगा उससे दूध का दूध और पानी का पानी अपने आप हो जाएगा।
-बिना परिजनों की सलाह बच्चे को निजी चिकित्सालय में रेफर करना गलत है। यदि ऐसा हुआ तो इसकी जांच कराई जाएगी और कहीं से भी कमीशन के खेल की बात सामने आती है तो जिला अस्पताल के स्टॉफ सहित निजी अस्पताल संचालक के ऊपर भी कार्यवाही की जाएगी- डॉ. वी जयप्रकाश, सीएमएचओ, जांजगीर-चांपा