Chhattisgarh News: जांजगीर-चांपा में कोर्ट के फैसले से सरकारी अफसरों को बड़ा झटक लगा है। 2015 में न्यायालय ने उनके पक्ष में फैसला दिया और 1 करोड़ 37 लाख रुपए भुगतान करने का आदेश दिया। मामला केएसके वर्धा पॉवर प्लांट के लिए जमीन अधिग्रहण का है।
Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा में आखिरकार बात जब सरकारी संपत्ति की कुर्की और नौबत नीलामी तक पहुंच गई तब जाकर जिला प्रशासन के जिम्मेदारों की नींद खुली और न्यायालय के आदेश के बाद भी जिस मुआवजा राशि का 9 साल भुगतान नहीं हो रहा था, उसका भुगतान प्रशासन ने कुर्की आदेश जारी होने के महज 10 दिन बाद ही कर दिया। मामला केएसके वर्धा पॉवर प्लांट के लिए जमीन अधिग्रहण का है।
गौरतलब है कि, नरियरा में स्थापित केएसके वर्धा पॉवर प्लांट के लिए नरियरा की सुरेखा सिंह की जमीन अधिग्रहित की गई थी जिसका मुआवजा करीब 10 लाख रुपए दिया गया था। जमीन का सही वेल्युवेशन नहीं और कम मुआवजा मिलने पर उन्होंने न्यायालय की शरण ली। 2015 में न्यायालय ने उनके पक्ष में फैसला दिया और 1 करोड़ 37 लाख रुपए भुगतान करने का आदेश दिया। लेकिन मुआवजा भुगतान नहीं किया गया।
इस पर न्यायालय ने शासन की छह गाड़ियाें को कुर्की करने का आदेश जारी कर दिया। इसके बाद विगत 16 अगस्त को जांजगीर एसडीएम की सरकारी गाड़ी को कुर्क करते हुए जब्त कर लिया गया। इसके बाद जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। शासन-प्रशासन की किरकिरी हो गई। तब जाकर प्रशासनिक अधिकारी नींद से जागे और मुआवजा प्रकरण की फाइलें खंगाली गई।
केएसके वर्धा प्लांट के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया उद्योग विभाग के द्वारा की गई थी। प्रकरण में पक्षकार उद्योग विभाग को बनाया गया था। लेकिन इतने सालों तक मुआवजा राशि ध्यान नहीं दिया जा रहा था। नौबत कुर्की तक आते ही आखिरकार उद्योग विभाग की ओर से मुआवजा की राशि 1 करोड़ 37 लाख रुपए का चेक काटकर दिया गया। जिसे अभी न्यायालय के खाते में जमा कराया गया है। अब आगे की प्रक्रिया न्यायालय के आदेश के बाद होगी। इस संबंध में एडीएम एसपी वैद्य ने बताया कि मुआवजा राशि 1.37 करोड़ रुपए जमा करा दिए गए हैं। कुर्क गाड़ी की वापसी के लिए आवेदन लगाया गया है। आगे की प्रक्रिया जारी है।