जांजगीर चंपा

नक्सली इलाकों में हो रहा बदलाव, हथियार छोड़कर उठा रहे कलम, गरीब बच्चे आश्रम में पढ़कर बन रहे अफसर

Chhattisgarh News : कभी दहशत और खौफ माहौल वाले अंतिम छोर के सुदूर नक्सल इलाके में आज बदलाव का नजारा दिख रहा है।

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नक्सल इलाके में आज बदलाव का नजारा दिख रहा है।

आशीष तिवारी

Chhattisgarh News : कभी दहशत और खौफ माहौल वाले अंतिम छोर के सुदूर नक्सल इलाके में आज बदलाव का नजारा दिख रहा है। यहां के बच्चे समझदार होते हुए भी अज्ञानता वश जुर्म के दुनिया में चले जाते थे, क्योंकि यहां किसी बच्चे के चाचा ने बंदूक थाम रखी थी तो किसी के पिता तो किसी पड़ोसी का ही नक्सली संगठन में आना जाना था। हर समय गोलियों की गूंज। इसके अलावा गरीबी भी एक कारण था।

जिस कारण वहां रहकर परिजन बच्चे को पढ़ाई के मुख्य धारा से जोड़ नहीं पाते। पढ़ाई से बच्चे कोसों दूर थे। इसकी जानकारी अभेद आश्रम पोड़ीदल्हा के कपालिक बाबा को हुई तो वे इस माहौल में पल रहे 55 बच्चों को 10 साल पहले पोड़ीदल्हा अभेद आश्रम में अकलतरा लेकर आए। कच्ची उम्र में घर, माता-पिता छोड़कर आए ये बच्चे यहां पढ़कर अब जीएसटी अधिकारी, राजस्व निरीक्षक, पुलिस, शिक्षक जैसे पदों पर पहुंच गए है, इनमें सभी जशपुर के अंतिम छोर के गांव के बच्चे हैं।

जीएसटी अधिकारी, आरआई समेत कई पदों पर आश्रम से निकले युवा

एक नाम पारस शर्मा है, जो यहां रहकर पढ़ाई कर रहे थे। इस बीच इनके परिवार के भाई, पिता का अचानक मौत हो गई। यहां 12 वीं तक पढ़ाई करने के बाद वह कोचिंग के लिए बिलासपुर चले गए। कोचिंग का खर्चा भी पूरा आश्रम उठाता था। इसके बाद आज पारस शर्मा जीएसटी अधिकारी के पद पर बिलासपुर में ही पदस्थ है। इसी तरह शिशिर सिंह परमार जिला आयुष्मान अधिकारी है। राजेश उरांव राजस्व निरीक्षक के पद में पदस्थ है। शिविर में भी आश्रम में रहकर ही पूरा पढ़ाई किया है। इसके अलावा यहां पढ़ाई कर बच्चे शिक्षक, तीन से चार लोग पुलिस व कार्यरत हैं।

दीन-दुखियों की सेवा करना प्रमुख उद्देश्य

इस आश्रम का सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण उद्देश्य दीन-दुखियों की सेवा करना और उनके दुखों का निवारण करना है। इसी उद्देश्य से आश्रम में ही जड़ी बूटियों से विशेषज्ञों द्वारा तैयार दवाइयां दी जाती है। इसके साथ ही आश्रम परिसर में ही एक चिकित्सालय खोला गया है, जिसमें आश्रम के अलावा पोड़ी दल्हा और आसपास के ग्रामीण चिकित्सा के लिए आते हैं। यहां करीब 10-12 परिवार जो पूरा असहाय है (कुष्ठ रोग) उनका पूरा देखभाल सहित खाना-पीना का व्यवस्था भी की जाती है। विधवा विवाह, तिलक रहित व सादगीपूर्ण विवाह को प्रोत्साहित किया जाता है।

Published on:
12 Aug 2023 01:20 pm
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