जांजगीर चंपा

CG Analytical News : रेंगती मौत का कहर, नौ साल में इतने लोगों को डसा, झाडफ़ूंक के चक्कर में टूट रही सांसे

- हर साल जहरीले सांप के डसने से दर्जनों लोगों की मौत हो जाती है।

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जांजगीर-चांपा. मानसून के दस्तक देने के पहले ही जमीन पर रेंगती मौत का तांडव शुरू हो चुका है। हाल ही में सर्पदंश से दो लोगों की मौत हो चुकी है। इतना ही नहीं हर साल बारिश के दौरान दर्जनों लोगों की मौत सर्पदंश से हो जाती है। स्वास्थ्य विभाग जहर से निपटने बारिश पूर्व शहरी क्षेत्रों के अस्पतालों को एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध कराती है, लेकिन ग्रामीण अंचलों में नहीं। अलबत्ता ग्रामीणों को तत्काल इलाज की सुविधा नहीं मिल पाती और मौत हो जाती है।

सप्ताह भर पहले मौसम ने रुख बदल लिया है। भीषण गर्मी में हर रोज आंधी-तूफान व बारिश का दौर चल रहा है। सोमवार की सुबह व शाम को अंचल में झमाझम बारिश हुई थी। वहीं मंगलवार की सुबह भी जिले के कई इलाकों में बूंदाबांदी हुई। बारिश होते ही धरती के भीतर से निकले जीव जंतु विचरण करने लगते हैं। इसकी चपेट में आकर लोग असमय काल के गाल में समा जाते हैं। जिले में भी हर साल जहरीले सांप के डसने से दर्जनों लोगों की मौत हो जाती है।

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स्वास्थ्य अमला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में जैसे तैसे एंटीस्नेकवेनम की व्यवस्था कर लेती है, लेकिन ग्रामीण अंचल के अस्पतालों में एंटीस्नेक वेनम आपूर्ति नहीं रहती। पिछले दो दिन के भीतर जिले में सर्पदंश से दो लोगों की मौत हो चुकी है। सोमवार को डभरा निवासी रामेश्वर पटेल को जहरील सर्प ने डस लिया। उसे उपचार के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उचित इलाज नहीं मिलने से उसकी मौत हो गई।

बताया जा रहा है कि रामेश्वर पहले झाडफ़ूंक के चक्कर में आ गया। इससे उसकी इलाज में देरी हो गई। जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने उसका प्राथमिक उपचार कर सिम्स रेफर किया। रास्ते में उसकी मौत हो गई।

अंधविश्वास से मौत
ग्रामीण क्षेत्रों के लोग अब भी अंधविश्वास के वसीभूत हैं। अक्सर देखा गया है कि ग्रामीण सर्पदंश के बाद मरीजों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाने की बजाय झाडफ़ूंक करना मुनासिब समझते हैं, जबकि सर्पदंश के बाद मरीज के लिए एक-एक पल काफी कीमती होता है। झाडफ़ूंक के फेर में बेवजह समय बर्बाद कर मरीज को काल के गाल में भेज देते हैं। ऐसे मरीजों को समय पर अस्पताल में दाखिल कराना चाहिए।

सर्पदंश के बाद ये करें
-सर्पदंश के बाद मरीज को अस्पताल ले जाने से पहले संबंधित स्थान को रस्सी या कपड़े से कसकर बांधें, ताकि सांप का जहर शरीर में फैलने के बजाय एक ही जगह ठहर जाए।

-नए ब्लेड से सांप के दंश वाले स्थान को काटकर जहर निकालने का प्रयास करें। इसके बाद बर्फ के टूकड़े को वहां रखा जा सकता है।
-सर्पदंश के बाद मरीज को सीधे अस्पताल में दाखिल कराना चाहिए। ओझा व बैगाओं के फेर में पड़कर समय न गवाएं।

वेनम की व्यवस्था है
एंटीस्नेक वेनम की आपूर्ति अस्पतालों में है। वर्तमान में जिले के विभिन्न अस्पतालों में 1500 से अधिक एंटीस्नेक वेनम का स्टॉक है। सर्पदंश के बाद मरीजों को सीधे बड़े अस्पतालों में भर्ती होना चाहिए- डॉ. वी जयप्रकाश, सीएमएचओ

नौ साल में गई 127 की जान, आंकड़े सीएमएचओ के अनुसार
वर्ष मौत
2010 15
2011 14
2012 12
2013 16
2014 14
2015 17
2016 16
2017 19
2018 04
कुल 127

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Published on:
15 May 2018 05:50 pm
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